विश्वसनीय कार्यवाही नहीं हुई तो सोमवार को राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या आठ पर उतरेंगे

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19 Aug 19
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विश्वसनीय कार्यवाही नहीं हुई तो सोमवार को राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या आठ पर उतरेंगे

सबसे पहले हम जे वाई एस और भ्रश्टाचार विरोधी संघर्श समिति खेरवाडा की तरफ से आप सबका स्वागत करते हैं।

खेरवाडा और केसरियाजी तहसील में चल रहे मनरेगा कार्य के तहत संचालित की जा रही अपना खेत अपना काम योजना में निर्मित किये जा रहे केटलषेड, वर्मी कम्पोस्ट पिट व भूमि समतलीकरण के कार्य में २१ करोड से अधिक का घोटाला सामने आया है। पिछले ४ माह से जागरूक युवा संगठन व भ्रश्टाचार विरोधी संघर्श समिति के युवा इस भ्रश्टाचार के विरोध में अभियान चला रहे है। भ्रश्टाचार विरोधी समिति का मानना है कि दौनों पंचायत समितियों की ७२ पंचायतों में ६२०० से अधिक लाभार्थियों को ३५ से ५० हजार तक की सामग्री कम दी है जबकि बिल पूरे उठा लिये है।

विभिन्न पंचायतों के लाभार्थी लगातार उप-खण्ड अधिकारी खेरवाडा, उप-खण्ड अधिकारी केसरियाजी, जिला परिशद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जनजाति आयुक्त आदि से जांच कर प्रभावी कार्यवाही करने की गुहार कर चुके हैं। हालांकि खेरवाडा की सुन्दरा पंचायत के ११० लोगों के मामले की जांच की गई तो ११ लाख का फर्जीवाडा सामने आया और ४ अधिकारियों को दोशी पाया गया है। षेश पंचायतों में हुए इसी तरह के फर्जीवाडे की जांच कार्यवाही सरकारी अमला न होने का तर्क देकर ठण्डे बस्ते में डाल दी गई है। ऐसे में भ्रश्टाचार विरोधी संघर्श समिति और जागरूक युवा संगठन ने खेरवाडा में दिनांक २२ जुलाई को उप-खण्ड कार्यालय खेरवाडा के सामने दिन भर का धरना दिया तथा जुलूस निकालकर १५ दिन में जांच कर भ्रश्ट अफसर व पंचायत नेताओं व सचिवों के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करने, लाभार्थियों की राषि उन्हें लौटाने तथा ११ फर्मो के विरूद्ध कार्यवाही करने की मांग की तथा ऐसा नहीं करने पर हाई वे रोकने की चेतावनी दी लेकिन प्रषासन के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।

अब हम क्या कर सकते हैं ? हम अपना दर्द आफ साथ साझा करने आये है तथा सुझाव भी चाहते है कि षान्तिपूर्ण संघर्श के सारे रास्ते अपनाने के बाद भी प्रषासन कुछ नहीं करे तो पिडत जनता को क्या करना चाहिये ? हमें एक ही विकल्प सुझा कि सरकार पर दबाव डालने के लिये सभी ’लाभार्थी’ राश्ट्रीय राजमार्ग संख्या ८ पर उतरें और फैसलाकूल कदम उठाएं।

इस पूरे मामले को समझने के लिये कुछ आंकडों को रखने की अनुमति दिजिये।

 

हम सभी मनरेगा योजना से भली भांती परिचित है। इस योजना में हर साल राषि बढाई जा रही है। इसी योजना में अपना काम अपना खेत योजना भी चल रही है जिसमें पिछले तीन साल से जनजाति क्षेत्र में केटलषेड निर्माण, वर्मी कम्पोस्ट पिट व भुमि समतलीकरण की एक कोम्बो योजना चलायी जा रही है जिसमें मटेरियल और लेबर की राषि का प्रावधान है। पूरे राजस्थान की बात न भी करें तो भी उदयपुर जिले में २०१७-१८, २०१८-१९ व २०१९-२० मेंव्यक्तिगत लाभ के कूल १४०२५+३४७६२+१४७८४ =६३५७१ काम पूरे हुए तथा ५२१९६ काम इस समय चल रहें हैं। इस पर कूल २४३.६१ करोड रुपये खर्च हो चुके है। खेरवाडा की बात करें तो २०१७-१८, २०१८-१९ व २०१९-२० में व्यक्तिगत लाभ के कूल ३८७+ ३८४३ +५९३ = ४८२३ काम पूरे हुए तथा ८०९६ काम चल रहें हैं। जिस पर अब तक ८३.०९ करोड रुपये खर्च हो चुके है। इसी तरह केसरियाजी की बात करें तो २०१७-१८, २०१८-१९ व २०१९-२० में व्यक्तिगत लाभ के कूल ९६०+ २१६३ +२३१५ = ५४३८ काम पूरे हुए तथा ५५४७ काम चल रहें हैं। जिस पर अब तक ४९.२८ करोड रुपये खर्च हो चुके है। इस तरह केसरियाजी और खेरवाडा में कूल मिलाकर १०२६२ काम पूरे हुए और १३६६३ काम चल रहें हैं और अब तक इस पर कूल खर्च १३२.३७ करोड रुपये खर्च हो चुके हैं।

     हम इन्ही कामों में से खेरवाडा और केसरियाजी में हुए केटलषेड, वर्मी कम्पोस्ट पिट व भूमि समतलीकरण के कार्यो में हुए ६२०० कामों की ही बात कर रहें है। इसमें हमने सूचना के अधिकार में प्राप्त सूचनाओं और इन्टरनेट पर उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर लाभार्थियों से सम्फ किया तो ज्ञात हुआ कि कईयों के बिल उठा लिये गये है तथा उन्हें धेला भी नहीं मिला है, कईयों को आधे से भी कम सामग्री मिली है जबकि उनके नाम पर ५२ हजार से लेकर एक लाख २५ हजार रुपये तक सामग्री देने के नाम पर बिल उठा लिये गये है। हमने सारे का औसत निकालकर आंकडा निकाला है और कम से कम आकलन करने की कोषिष की है तो प्रति लाभार्थी ३५००० रुपये डकार लिये गये है। इस तरह कूल ३५००० को ६२ सौ से गुणा करें तो २१ करोड ७० लाख रुपया लाभार्थियों को नहीं मिला है जबकि सरकार से उठा लिया गया है। देखने में यह आया है कि जितना अधिक पंचायत समिति के हेड क्वार्टर से दूरी के गांवों में पता लगाते हैं उतना ही अधिक घपला दिखाई देता है। इस समय हम केवल दो पंचायत समितियों और एकमात्र योजना की चर्चा कर रहें है।

हमारा दृड मत है किअन्य पंचायत समितियों में भी इसी तरह की स्थिति है जिसे उजागर किया जाना चाहिये। यदि केवल जनजाति क्षेत्र की सभी पंचायत समितियों के मामलों की जांच करें तो केवल अपना खेत अपना काम योजना का यह घपला २ सौ करोड से अधिक का निकलेगा। हालांकि इसमें श्रम के नाम पर हुए घपले को अभी भी जोड नहीं गया है क्योंकि हमारी भी सिमाएं है। सार की बात यह है कि इस योजना में जनजाति और किसानों के लिये सरकार से पैसा आया और उसकी आधे से अधिक राषि भ्रश्ट कर्मचारियों, अफसरों और जन प्रतिनिधि कहे जाने वाले नेताओं के बीच बंटवारे में चली गई तथा लाभार्थी मुंह ताकते ही रह गये।

हमारे युवा साथियों ने लाभार्थियों को घर-घर जाकर जब यह जानकारी दी तो उनको आष्चर्य हुआ और वे गुस्से में है। इसलिये भ्रश्ट तत्वों के विरूद्ध कार्यवाही करने, उनके नाम पर उठाई गई राषि वापस दिलाने और सामग्री सप्लाई करने वाली फर्मो के बिरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने की मांगों को लेकर चार महिने से कई पंचायतों में पर्चे निकालकर मिटिंगे की। उन सभी लोगों ने उपखण्ड अधिकारी खेरवाडा, उपखण्ड अधिकारी केसरियाजी, जिला परिशद के कार्यक्रम अधिकारी, जिला कलेक्टर, जनजाति आयुक्त और यहां तक कि उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट को भी ज्ञापन दिया। सभी पंचायतों के लाभार्थी प्रतिनिधियों ने २६ दिन पहले उपखण्ड कार्यालय खेरवाडा पर दिनभर धरना देकर अलग-अलग ज्ञापन सौंपे और जुलूस भी निकाला लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है।

     प्रारंभ में सुन्दरा पंचायत में ११० लाभार्थियों के मामले की जिला कलेक्टर महोदय के आदेष से जांच हुई, जिला परिशद के कार्यक्रम अधिकारी ने स्वयं लाभार्थियों को सुना तो वहां पर ११ लाख रुपये की रिकवरी निकली है और ४ अधिकारियों के खिलाफ प्रषासनिक कार्यवाही की अनुषंसा की गई है उसके बाद सब ठण्डे बस्ते में है। हालांकि सुन्दरा के ५० लाभार्थियों की तो जांच ही नहीं हुई है तथा निकाली गई रिकवरी भी घपले की एक चौथाई भी नहीं है। हम इसको ही सत्य मान ले तो भी हर पंचायत में ये ही हाल है जिसकी कोई जांच नहीं की जा रही है। निःसंदेह पंचायत समिति के बी. डी ओ व सहायक अभियंता जैसे बडे अधिकारी इसमें सम्मिलित है अतः जांच भी जिला स्तर अथवा उच्च स्तर के अधिकारी ही करने चाहिये। अतएव कलेक्टर आदि अधिकारियों का कहना है कि हमारे पास जांच करने वाला प्रषासनिक अमला नहीं है तो सवाल उठता है कि क्या भ्रश्टाचार की जांच में कितना समय लगेगा या कभी कोई जांच नहीं होगी ?

     वे तकनिकी अधिकारियों की बात करते है। हमने अतिरिक्त जिला कलेक्टर को ५६ ऐसे लाभार्थियों की भी सूचि दी है जिनको कोई सामग्री नहीं मिली। ऐसे में क्या तकनीकि जांच करनी है। नाप लेने वाले, फर्जी फोटो अपलोड करने वाले, बिल बनाने, पंचायत से आगे भेजने व पास करने वाल और उसे स्वीकृत करने वाले अधिकारी सिधे जिम्मेदार है उनके खिलाफ तो तत्काल ही कार्यवाही हो सकती है। यह समझ में नहीं आ रहा है कि प्रषासन ऐसा क्यों नहीं कर रहा है ? आर्थिक अपराध और भ्रश्टाचार रोकने वाले अनेको सफेद हाथी विभाग बने हुए है उन्हें जांच क्यों नहीं सौपी गई है? हमें लगता है कि उदयपुर में तकनीकी और प्रषासनिक अफसरों की कोई कमी नहीं है। यदि एक एक अफसर को एक एक पंचायत की जिम्मेदारी दी जाय तो भी सात दिन में दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है। सरकार चाहे तो कानून के आधार पर इस योजना का हर पंचायत में सामाजिक अंकेक्षण भी कर सकती है।

     अन्त में हम यह कहना चाहते हैं कि सरकार द्वारा जांच में ढलाई करने की वजह से भ्रश्ट तत्वों के हौंसले बुलंद हो रहें है और वे हमारे साथियों को धमकिया दे रहें है, गिदड भभकियां दे रहें है। लाभार्थियों को भी धमका रहें हैं कि षिकायत वापस ले लो अन्यथा आगे काम नहीं देंगे। गांव में रहने नहीं देंगे आदि-आदि पर हम सब लोग डटे हुए हैं।

इसी के मद्देनजर हम जे.वाई.एस. व भ्रश्टाचार विरोधी संघर्श समिति के प्रतिनिधी प्रेस के सम्मुख उपस्थित हैं। हमारी जानकारी के अनुसार भ्रश्टाचार के विरूद्ध ग्राम स्तर पर इस तरह का अभियान राजस्थान में पहली बार चलाया जा रहा है। क्षेत्र से भ्रश्टाचार को उखाडने के लिये यह संधर्श नींव का पत्थर साबित होगा। अतः आप सभी से अनुरोध है कि भश्टाचार के विरूद्ध संघर्श में सहयोग करे। हम फिलहाल खेरवाडा केसरियाजी में भ्रश्टाचार के विरूद्ध संघर्श कर रहें है। हम चाहते है कि मिडिया ऐसे मसलों को उजागर करे, सरकारी अधिकारी ईमानदारी से व त्वरित जांच करें ताकि भ्रश्टाचारी चौकडी में खौफ पैदा हो तथा गरीबों को पूरा लाभ मिले।

वैसे हम आपसे जल्दी ही मिलेंगे और यह बताएंगे कि क्षेत्र से कितने कुएं गायब हो गये हैं, कितने षौचालय नहीं मिल रहें है? कितनी सडकें धरती निगल गयी है ? लोगों के यह समझ में नहीं आ रहा है कि ऐसे मसलो पर गुमषुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराएं या चोरी की। खैर.......

आज हम आफ माध्यम से प्रशासन को यह सूचना देने आये है कि इस मामले में विश्वसनीय कार्यवाही नहीं हुई तो सोमवार को राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या आठ पर उतरेंगे जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। हम आपको भी यह देखने और कवर करने के लिये आमंत्रित करते है कि गरीब जब उठ खडा होता है तो कैसे संधर्ष करता है ?


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