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जीवन में पंचदोषो से बचने के लिए सत्संग जरूरी: आचार्य ऋषिकेश शास्त्री

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14 Jan 20
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जीवन में पंचदोषो से बचने के लिए सत्संग जरूरी: आचार्य ऋषिकेश शास्त्री

निम्बाहेडा। मेवाड के प्रसिद्ध श्री शेषावतार कल्लाजी वेदपीठ को भागवतपीठ के रूप में स्थापित करने के लिए पंचम सोपान के रूप में आयोजित ब्रम्हपुराण कथा के द्वितीय दिवस रविवार रात्रि को व्यासपीठ पर बिराजित पुराण मर्मज्ञ एवं भागवत चिंतक आचार्य ऋषिकेश शास्त्री ने कहा कि जीवन को सुमार्ग पर ले जाने के लिए पंचदोषो रूप, रस, रंग, गंध और स्पर्श से बचाव की दृष्टि सत्संग का सहारा लेना जरूरी है। आचार्य श्री ब्रम्हपुराण के ब्रम्हा एवं सूर्य वंश की विस्तार से व्याख्या करते हुए कहा कि कथा सुनने का उद्देश्य मन को पवित्र बनाकर प्रभु के चरणो में लगाना है। इस दृष्टि से प्रत्येक व्यक्ति को कथाश्रवण के साथ साथ सत्संग का सानिध्य लेना चाहिए। उन्होनें राजा ययाति के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि उसके पांच पुत्र थे जिन्होनें राजा को सत्संग के लिए तो प्रेरित किया लेकिन वह इन्द्रियों का सुख भोगता रहा। अंत में उसने ईश्वर से प्रार्थना की कि वे इन्द्रियों के संयम का मार्ग प्रशस्त करें तब ब्रम्हाजी ने उसे अवगत कराया कि प्रायः एकादश दिशा की ओर भागती रहती है तथा मन जहां जाता है उसी ओर इन्द्रियां भी चलायमान होती है, इसलिए मन को नियंत्रित करने पर ही ईश्वर की शरणागति संभव है। उन्होनें कहा कि चलायमान इन्द्रियो को प्रभावी नियंत्रण के साथ ही मन को भी नियंत्रित किया जा सकता है। प्रारंभ में वेदपीठ के न्यासियों एवं कल्याणभक्तों द्वारा प्रधान आचार्य एवं मुख्य यजमान के रूप में ठाकुर श्री कल्लाजी तथा व्यासपीठ का विधि विधान के साथ पूजन किया।
आने वाले समय में कल्याण लोक नेमीशारण्य का रूप लेगा: शास्त्री
आचार्य ऋषिकेश शास्त्री ने कहा कि जहां नीम के पेडो की बहुतायत हो उसे ही नेमीशारण्य कहा जा सकता है क्योंकि अन्य पेडो की तुलना में नीम जल्दी पल्लवित और पुष्पित होता है। उन्होनें कहा कि वैदिक विश्वविद्यालय परिसर में वर्तमान में नीम के सैकडो पेड पल्लवित होकर लहलहा रहे है जिससे लगता है कि आने वाले समय में कल्याण लोक का यह परिसर नेमीशारण्य के रूप में अपनी विशिष्ठ पहचान बनायेगा। उन्होनें कहा कि नीम वृक्षावली के साथ साथ इस परिसर में वेदो की ऋचाओं का गान और पुराणो के श्लोकों का अनवरत पठन पाठन होने से यह परिसर वेद और पुराण के ज्ञान का भी विश्व स्तरीय केन्द्र बनेगा। आचार्य श्री ब्रम्हपुराण के दौरान नेमीशारण्य की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाल रहे थे।


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