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पारस अस्पताल ने री-डू वीनस बाईपास ग्राफ्ट एंजियोप्लास्टी के जरिए बचाई 65 साल के मरीज की जान

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21 Sep 22
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पारस अस्पताल ने री-डू वीनस बाईपास ग्राफ्ट एंजियोप्लास्टी के जरिए बचाई 65 साल के मरीज की जान

 

एंजियोप्लास्टी क्या है और ह्रदय में ब्लॉकेज का कैसे लगाएं पता?

ह्रदय ब्लॉकेज में एंजियोप्लास्टी या बाईपास सर्जरी, क्या है दोनों में से बेहतर विकल्प?

 

उदयपुर: उदयपुर के पारस अस्पताल की कार्डियोलॉजी टीम ने एक और सफलता हासिल की है। पारस अस्पताल में 65 साल के मरीज की सफल री-डू वीनस(पैर से लिया गया ग्राफ्ट) बाईपास ग्राफ्ट एंजियोप्लास्टी की गई। डॉ. अमित खंडेलवाल डायरेक्टर एंड एचओडी कार्डियोलॉजी विभाग, पारस अस्पताल उदयपुर ने बताया की मरीज का 2006 में ह्रदय की तीन धमनियों (आर्टरी) में ब्लॉकेज के कारण बाईपास हुआ था। मरीज की स्थिति 10 साल तक स्थिर रही लेकिन फिर अचानक 2016 में उन्हें छाती में तकलीफ होने लगी तब पता चला की दाएं तरफ की धमनी के वीनस बाईपास ग्राफ्ट में 90 प्रतिशत ब्लॉकेज है, उस समय उनकी वीनस बाईपास ग्राफ्ट में एंजियोप्लास्टी की गई। कुछ दिन पहले मरीज को वापस छाती में दर्द, घबराहट, पसीने की स्थिति में अस्पताल ले जाया गया। ईसीजी करने पर पता चला की मरीज को मेजर हार्ट अटैक आया है और गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें पारस अस्पताल, उदयपुर रेफर कर दिया गया। जब मरीज को पारस अस्पताल लाया गया तब उनका कम बीपी और अस्थिर हृदय गति की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तुरंत कैथ लैब में लिया गया जहां उनकी एंजियोग्राफी की गई जिसमें सामने आया की मरीज के दाई धमनी के वीनस बाईपास ग्राफ्ट में जो एंजियोप्लास्टी‌ 2016 में की गई थी उसी में 100% ब्लॉकेज वापस हो गया है। उस ग्राफ्ट को खोलना बहुत ही चुनौतीपूर्ण था क्योंकि आर्टिरियल ब्लॉकेज में ज्यादातर थ्रोम्बस व फेट पैड होता है पर वेन्स ग्राफ्ट ब्लॉकेजेस में डीजेनरेटेड डेब्रिस होती हैं जिसका इलाज बहुत मुश्किल होता है। मरीज की दाई तरफ की नाड़ी पहले से ही 100% ब्लॉकेज के कारण खराब थी और उसी धमनी की बाईपास ग्राफ्ट में ब्लॉकेज होना यहां एक गंभीर समस्या थी और किस धमनी को खोला जाए यह भी एक महत्वपूर्ण निर्णय था। मरीज का इको पर ह्रदय पंपिंग फंक्शन सिर्फ 25 से 30 प्रतिशत रह गया था।

डॉ. अमित खंडेलवाल, डायरेक्टर एंड एचओडी कार्डियोलॉजी विभाग, पारस अस्पताल उदयपुर ने बताया कि मरीज की कम हृदय गति को देखते हुए टेंपरेरी पेसमेकर से स्थिर किया गया। कई तारों और बलूंस की मदद से जिसमें कटिंग बलून ओपीएन-एनसी ‌बलून भी इस्तेमाल किए गए और फिर अंत में 3 मेडिकेटेड स्टेंट लगाकर वीनस बाईपास ग्राफ्ट की गई। उस नाड़ी को खोल दिया गया जिससे रक्त का बहाव बेहतर रूप से होने लगा। उन्होंने यह भी बताया की एंजियोप्लास्टी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसका उपयोग कोरोनरी धमनी रोग के कारण अवरुद्ध कोरोनरी धमनियों को खोलने के लिए किया जाता है। यह ओपन-हार्ट सर्जरी के बिना हृदय की मांसपेशियों में रक्त के प्रवाह को शुरू करता है। हार्ट अटैक जैसी आपात स्थिति में एंजियोप्लास्टी की जा सकती है या इसे वैकल्पिक सर्जरी के रूप में किया जा सकता है। एंजियोप्लास्टी को परक्यूटेनियस कोरोनरी इंटरवेंशन (पीसीआई) भी कहा जाता है। ज्यादातर मामलों में एंजियोप्लास्टी के बाद कोरोनरी आर्टरी स्टेंट भी रक्त वाहिकाओं में डाले जाते हैं। ये स्टेंट नसों में रक्त प्रभाव को फिर से दुरुस्त करने का काम करते हैं। दिल का दौरा पड़ने के बाद जितना जल्दी हो मरीज की एंजियोप्लास्टी हो जानी चाहिए जिससे की मृत्यु का जोखिम कम हो जाता और हृदय की मांसपेशियों का नुकसान भी कम हो जाता है।

 

एंजियोग्राफी एक जांच की प्रक्रिया है जिससे नसों में रुकावट और कितनी रुकावट है इसका पता चलता है। एंजियोप्लास्टी हृदय की धमनियों का इलाज है जिसमें बंद पड़ी धमनियों में रक्त प्रभाव को पुनः तह किया जाता है।

 

कोरोनरी आर्टिरीज डिसीज (CAD) या दिल की बीमारी होने पर रोगी के दिल की स्थिति को देखते हुए एंजियोप्लास्टी या बाईपास सर्जरी में से किसी की सलाह दी जा सकती है। जिन रोगियों में दवा से ब्लॉकेज ठीक नहीं किया जा सकता है उन्हें एंजियोप्लास्टी करवाने की सलाह दी जाती है। वहीं, अगर स्थिति ज़्यादा गंभीर हो और एंजियोप्लास्टी से ब्लॉकेज को ठीक नहीं किया जा सकता हो तो बाईपास सर्जरी करवानी पड़ती है। बाईपास सर्जरी एक सर्जिकल प्रक्रिया है जबकि एंजियोप्लास्टी में सर्जरी करने की आवश्यकता नहीं होती है। एंजियोप्लास्टी में संक्रमण का खतरा और दर्द कम होता इसलिए यह एक प्रचलित प्रक्रिया है। लेकिन गंभीर मामलों में उपचार के लिए हार्ट की बाईपास सर्जरी जरूरी हो सकती है।

 

सफल एंजियोप्लास्टी के बाद मरीज स्वस्थ है और अपने दैनिक काम को आसानी से करने में सक्षम है। मरीज का कहना है कि मैं बहुत खुश हूं और डॉ. अमित खंडेलवाल और पारस अस्पताल की पूरी टीम को धन्यवाद देता हूं।

 

 


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