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एचपीयू नहीं बढ़ाएगा फीस व दूसरे शुल्क

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21 Mar, 18 13:42
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बीते वर्ष 2017 में एचपीयू ने 191 करोड़ रुपए का बजट रखा था। जिसमें 25 करोड़ घाटे का था। वर्ष 2016 में 20.36 करोड़ घाटे का बजट था। हालांकि, इस बार सरकार की ओर से 110 करोड़ की आर्थिक सहायता विवि को दी गई है। विवि प्रशासन लगभग 66 करोड़ अपने संसाधनों से प्राप्त करता है। एचपीयू के कार्यकारी वीसी प्रो. राजेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि इस बार का बजट सबसे बेहतर होगा। छात्रों पर किसी तरह का बोझ नहीं डाला जाएगा।एचपी यूनिवर्सिटी अपना वार्षिक बजट 26 मार्च को पेश करेगा। सरकार की ओर से इस बार विवि प्रशासन को 10 करोड़ का अतिरिक्त बजट दिया गया है। जिससे विवि प्रशासन ने फैसला लिया है कि छात्रों पर फीस बढ़ोतरी या अन्य तरह के किसी शुल्क की बढ़ोतरी का बोझ नहीं डाला जाएगा।
वर्ष 2007 में कांग्रेस सरकार ने बजट को 69 करोड़ किया था। पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में यूनिवर्सिटी का बजट 50 करोड़ से 62 करोड़ किया गया था। तत्कालीन सरकार ने 12 करोड़ की बढ़ोतरी थी। इसके बाद कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इसमें तीन करोड़ की बढ़ोतरी की। बजट को 65 करोड़ किया गया। वर्ष 2014 में चार करोड़ बजट बढ़ाया था। वर्ष 2016 में बजट 90 करोड़ पहुंचा। इस तरह अब भाजपा सरकार ने बजट को 110 करोड़ पहुंचाया है। ऐसे खर्च होता है विवि का बजट विवि के बजट को खर्च करने की बात करें तो विवि कर्मचारी आवासों की मरम्मत को 75 से 80 लाख रुपए पिछले बजट में रखे गए थे। छात्रावासों की मरम्मत, रीजनल सेंटर धर्मशाला को, लाइब्रेरी में नई किताबों, मैगजीन आदि के लिए, ईआरपी सोल्यूशंस को, आउटसोर्सिंग एजेंसी भुगतान के अलावा ऊना, घणाहट्टी और मंडी में नए कैंपस विकसित करने की प्रक्रिया व अन्य कार्य के लिए बजट रखना पड़ता है। प्रोफेसरों और कर्मचारियों की सैलरी में प्रतिमाह पांच से छह करोड़ रुपए खर्च हाेते हैं। एचपीयू ने मांगे थे 140 करोड़ एचपीयू की आेर से सरकार से 140 करोड़ बजट बढ़ाने की मांग की गई थी। जबकि सरकार ने 110 करोड़ ही बढ़ाए है। पिछले विवि के अपने बजट को देखें तो परीक्षा फीस, छात्रावास फीस और अन्य शुल्कों से विवि को लगभग 34 करोड़ की आय प्राप्त हुई थी। इसमें परीक्षा संचालन पर करीब 14 करोड़ खर्च होने का अनुमान था। विवि के अपने बजट के घाटे में कमी आने की दूसरी मुख्य वजह एचपीयू का अपना कार्प्स फंड बनाना भी है।

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