आध्यात्मिक ईष्ट हर व्यक्ति के लिए जरूरी रू संजय मुनि

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02 Sep 19
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आध्यात्मिक ईष्ट हर व्यक्ति के लिए जरूरी रू संजय मुनि

उदयपुर। महाप्रज्ञ विहार में रविवार को पर्युषण के तहत जप दिवस पर मुनि संजय कुमार ने कहा कि भारत ही नहीं विश्व के सभी धर्मों में अपने अपने ईष्ट मंत्र हैं। माला के माध्यम से ईष्ट का स्मरण करते हैं लेकिन मंत्र साधना सरल है। अनपढ भी ईश्वर का नाम ले सकता है। अध्यात्म शक्ति सम्पन्न बनने का माध्यम है। अच्छे मंत्र के बार बार स्मरण से पवित्र आभा मंडल बनता है। घर में पवित्र वातावरण बनता है। मुनि श्री ने आचारांग आगम में महावीर के जीव संबंधी घटनाओं का वर्णन किया।

प्रकाश मुनि ने प्रेक्षाध्यान के प्रयोग करवाये और कायोत्सर्ग का अभ्यास करवाया। धैर्य मुनि ने धार्मिक भजन का संगान किया।

प्रसन्न मुनि ने कहा कि आध्यात्मिक साधना से आत्मबल, मनोबल बढता है। साधना से मंत्र सिद्ध हो जाता है तो असुरी शक्ति भागने लगती है। निष्प्रभावी बन जाती है। घर, सनातन मँगलकारी बन जाता है। अलग बीजाक्षर मंत्र और ईष्ट मंत्र के संयोजन से सिद्धि प्राप्त होती है। दुश्मन का अनिष्ट करने के लिए भी तांत्रिक नौरता में मंत्र सिद्ध करके मुठ फेंकना आदि कार्य करते हैं। आध्यात्मिक केवल आत्म कल्याण और सुख शांति के लिए किया जाता है। स्वास्थ्य के लिए भी मंत्रों का प्रयोग किया जाता है। कई शारीरिक अवयव ठीक कोई जा सकते हैं। जैन, बौद्धिक दर्शन में १०८ मण की माला होती है। फारसी में १०५, मुस्लिम में १०१ आध्यात्मिक ईष्ट मंत्र का जप करते हैं। मुख्य रूप से ३ तरह के जपयोग किये जाते हैं। वाचिक बोल बोलकर, मानस यानी मन में में और उपांशु जिसमें केवल होंठ हिलते हैं। यह अच्छा और तनावमुक्त समय पास का साधन है।

सभाध्यक्ष सूर्यप्रकाश मेहता ने बताया कि प्रसन्न मुनि ने अपने हाथों बिना पानी, शस्त्र पंचमुट्ठी केश लुंचन किया। मंगलाचरण कन्या मंडल की कन्याओं द्वारा किया गया। पंडाल की सुंदर व्यवस्था अर्जुन खोखावत ने की। कार्यक्रमों की जानकारी सभा मंत्री प्रकाश सुराणा ने दी।


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