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सेठ और श्रेष्ठ बनने के लिए पुरूषार्थ जरूरी: आचार्यश्री सुनील सागरजी

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07 Mar 18
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 सेठ और श्रेष्ठ बनने के लिए पुरूषार्थ जरूरी: आचार्यश्री सुनील सागरजी उदयपुर,आचार्यश्री सुनीलसागरजी महाराज ससंघ ने 6 मार्च मंगलवार को आदिनाथ भवन सेक्टर 11 से मंगल विहार कर अल्प प्रवास के लिए सर्वऋतुविलस स्थित श्री महावीर जिनालय में प्रवेश किया। महावीर जिनालय के व्यवस्थापक शांतिलाल भोजन ने बताया कि आचार्यश्री ससंघ ने प्रात:काल 6 बजे की मंगलवेला में हिरण मगरी सेक्टर 11 स्थित आदिनाथ जिनालय में दर्शन कर सैंकड़ों श्रावक- श्राविकाओं और बैण्ड बाजों के साथ विहार कर सर्वऋतुविलास स्थित महावीर जिनालय में मंगल प्रवेश किया। सेक्टर 11 से मंगल विहार के दौरान शांतिलाल वेलावत, भंवर मुण्डलिया, सुरेश पदमावत, कालूलाल चित्तौड़ा, पारस चित्तौड़ा, श्रीपाल धर्मावत सहित महिला मण्डल की सदस्याएं बड़ी संख्या में गुरूदेव के जयकारे लगाते हुए सर्वऋतुविलास में मंगल प्रवेश तक साथ चली। मंगल प्रवेश के बाद आचार्यश्री ने भगवान महावीर स्वामी की मनोज्ञ प्रतिमा के दर्शन किये।
मंगल प्रवेश के बाद आयोजित धर्मसभा में आचार्यश्री सुनीलसागरजी महाराज ने कहा कि बिन पुरूषार्थ किये मनुष्य न तो सेठ बन सकता है और न ही श्रेष्ठ बन सकता है। जो मिला है उसकी हमेशा कद्र करना सीखो, उसका विवेकपूर्वक उपयोग करना सीखो। वर्धमान प्रभु के दर्शन करना ही सौभाग्य की बात है। पुरूषार्थ से ही वर्धमान बना जा सकता है।
आचार्यश्री ने कहा कि वीतरीाग जिन शासन की परम्परा निरन्तर वर्धमान हो रही है। जिसे जो मिला है उसी से वह विकास करने की कला जानने वाला ही बड़े पद का उत्तराधिकारी होता है। आचार्यश्री ने एक रूपक के माध्यम से यह विवेकपूर्ण बात श्रावकों को समझाई। मु_ी भर धन भी धर्म की भूमि में देने से कई गुना फल मिल जाता है। धर्मसभा का संचालन मोहन नागदा ने किया।
10 मार्च को आदिनाथ जयंति: शांतिलाल भोजन ने बताया कि आगामी 10 मार्च को आदिनाथ जयंति धूमधाम और उत्साह से मनाई जाएगी। इस जयंति का भव्य आयोजन 10 मार्च को नगर निगम प्रांगण मेें आचार्यश्री ससंघ के सानिध्य में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से भव्य रूप से मनाया जाएगा। पारस चित्तौड़ा
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