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नगर निगम प्रांगण में 18 नवम्बर को होगा राष्ट्रीय कवि सम्मेलन

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14 Nov 17
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नगर निगम प्रांगण में 18 नवम्बर को होगा राष्ट्रीय कवि सम्मेलन उदयपुर, हुमड़ भवन में आयोजित प्रात:कालीन धर्मसभा में आचार्य सुनीलसागरजी महाराज ने कहा कि इस काल में मनुष्य की आयु भी कम हो गई है और साथ-साथ में आध्यात्मिक ज्ञान भी कम हो रहा है। आज चारों और भोगवादी संस्कृति हावी है। पहले की तुलना में आज चाहे साक्षरता बढ़ी है, सुख- सुविधाओं के साधन बढ़े हैं, नये- नये अविष्कारों में लोगोंं का ज्ञान और ध्यान दोनों लग रहे हैं लेकिन आध्यात्मिकता का ज्ञान घटने से लोगों में मानवता, सहनशीलता, सौहाद्र्रता, प्रेम और स्नेह की कमी हो रही है। आज कल हर काम मशीन से होता है। इस माशीनरी और इलेक्ट्रेनिक जमाने में मनुष्यों की कीमत भी कम हो गई है। श्रम शक्ति की कीमत भी कम हो गई है क्योंकि आज हर काम मशीन से हो जाता है। विज्ञान और विज्ञान के साथ- साथ विकास हो होना ही चाहिये लेकिन साथ- साथ में वैदिक और आध्यात्मिक ज्ञान भी होना जरूरी है क्योंकि बिना इसके मानवता, इंसानियत और आपसी सद्भाव भी बना रहे। हमें संवेदना और मानवता को मरने से बचाने के लिए विज्ञान के साथ- साथ वैदिक और अध्यात्मिक ज्ञान हो भी बढ़ावा देना होगा ताकि संवेदना, मानवता और इंसानियत को मरने से बचाया जा सके।
आचार्यश्री ने कहा कि आज के समय में जन्म दिन की बधाई देना हो, शोक प्रकट करना हो, निमंत्रण, आमंत्रण देना हो, सलीाह देना या कोई भी कार्य हो सभी मोबाईल के जरिये हो जाते हैं। माना कि इस तकनीकी युग में यह आज की जरूरत है, लेकिन इससे आपसी मेल-जोल, संवेदनाएं और आपसी सौहाद्र्र तो कम हुआ ही है। इस युग में ज्ञान की कमी नहीं है, किताबी ज्ञान के साथ- साथ भौतिक और वैज्ञानिक ज्ञान भी बढ़ा है लेकिन साथ- साथ में मनुष् य के जीवन में भाग-दौड़ भी इतनी बढ़ गई है कि वह एक दूसरे के सुख- दुख में भी शामिल नहीं हो पाता है। मशीनी युग में संवेदनाएं धीरे- धीरे खत्म होती जा रही है। बाहरी वस्तुओं के मोह के चलते व्यक्ति स्वयं को भी भूलता जा रहा है। हर तरह के संसाधन होने के बावजूद आज एक दूसरे की तकलीफ बांटने वाला नहीं मिलता है। लोगों के पास समय ही नहीं है, दिनभर भागदौड़ में वह व्यस्त रहता है। पुराणों और शस्त्रों में जो कुछ भी लिखा है उन्हें पढ़- सुन कर हमारे जीवन में कितना बदलाव आया है यह सोचना महत्वपूर्ण है।
दुनिया में जन्म तो हर इंसान लेता है और अपनी आयु पूरी करके चला भी जाता है। लेकिन इस दुनिया में जन्म लेना कितनों का सार्थक होता है। दुनिया में जन्म और मरण दोनों ही महत्वपूर्ण होते हैं। दोनों को ही सार्थक करना होता है। मनुष्य का जीवन और मरण तब ही सार्थक है जब वह तमाम विकारों और कषायों से दूर रहे, त्याग, तपस्या और संयम का जीवन जीये। जो दुनिया में आया है, चाहे वह राजा हो या फकीर सभी को एक दिन तो जाना है। लेकिन दुनिया में पुरूषार्थी वो ही कहलाता है जो संयमित जीवन जीकर अपने आत्मस्वरूप को उपलब्ध होकर मरण को प्राप्त करे।
18 नवम्बर को होगा राष्ट्रीय कवि सम्मेलन: प्रचार प्रसार मंत्री पारस चित्तौड़ा नेे बताया कि सुनीलसागर चातुर्मास व्यवस्था समिति की ओर से आचार्यश्री सुनीलसागरजी महाराज के तत्वावधान में 18 नवम्बर को नगर निगम प्रांगण में भव्य राष्ट्रीय सम्मेलन होगा। कवि सम्मेलन के सूत्रधार राव अजात शत्रू होंगे और कवि सम्मेलन में सौरभ जैन एवं अनामिका जैन जैसे राष्ट्रीय कवि कविता पाठ करेंगे। आचार्यश्री सुनील सागरजी महाराज के पिच्छि परिवर्तन के तीन दिवसीय कार्यक्रम की श्रृंखला में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में 18 नवम्बर की शाम को नगर निगम प्रांगण में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन, 19 नवम्बर को स्कूली बच्चों द्वारा जैन धर्म पर आधारित भव्य रंगारंग प्रस्तुतियां होंगी एवं 20 नवम्बर को जीटीवी सारेगमप विनर अंजलि गायकवाड़ की प्रस्तुति होंगी। अंजलि देश को में सबसे कम उम्र की गायिका होने के भी गौरव प्राप्त है।
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