कुल्हे की बॉल हो गई थी चूर, छह घंटे चला ऑपरेशन

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23 May 20
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कुल्हे की बॉल हो गई थी चूर, छह घंटे चला ऑपरेशन

उदयपुर। बाइक-कार एक्सीडेंट में एक महिला के कुल्हे की बॉल और शॉकेट चूर-चूर हो गए थे। बेडवास स्थित जीबीएच जनरल हॉस्पीटलमें इस महिला का छह घंटे ऑपरेशन करके जान सुरक्षित करते हुए टूटा हुआ जोड व्यवस्थित किया गया।

ग्रुप डायरेक्टर डॉ. आनंद झा ने बताया कि चित्तौडगढ निवासी ४७ वर्षीय महिला तीन दिन पहले बाइक-कार भिडंत में जख्मी हो गई थी। इस महिला के छाती पर चोट लगी थी, इसके कुल्हे की हड्डी में फ्रेक्चर (एसिटाबुलम एवं नेक ऑफ फिमर फ्रेक्चर) हो गया था। इस पर उनके परिजन उन्हें सरकारी व गैर सरकारी हॉस्पीटल ले गए, लेकिन महिला का फ्रेक्चर काफी जटिल होने और छाती पर चोट की वजह से वेंटीलेटर पर होने के कारण कहीं भी इलाज नहीं हो पा रहा था। इस पर परिजन उन्हें यहां बेडवास स्थित जीबीएच जनरल हॉस्पीटल ले आए, जहां ट्रोमा टीम ने आईसीयू टीम की मदद से उपचार शुरू किया। यहां आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. सूर्यकांत पुरोहित ने जांचों के बाद पाया कि महिला के कुल्हे की बॉल और उसको जोडने में मददगार शॉकेट पूरी तरह क्षतिग्रस्त होकर चूर-चूर हो गए थे। यहां चोट की गंभीरता और महिला की जान का खतरा देखते हुए कोरोना महामारी के प्रोटोकॉल नियम व सावधानी का पालन करते हुए महिला को वेंटीलेटर पर रखकर ऑपरेशन करना तय किया। इस महिला की छाती में चोट होने के कारण निश्चेतना का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. पीयूष गर्ग ने निश्चेतना की दवाई का उसी अनुसार उपयोग किया। करीब छह घंटे चले ऑपरेशन में महिला के कुल्हे की जोड, बॉल और शॉकेट नए बनाए गए। यह इस ऑपरेशन में इसलिए भी चुनौतिपूर्ण रहा क्योंकि इसमें महिला के पैरों की नस कटने या लकवाग्रस्त होने का खतरा था। इससे बचाते हुए महिला का सुरक्षित ऑपरेशन किया गया और उन्हें दो दिन आईसीयू में रखते हुए वेंटीलेटर से हटाकर शनिवार को सामान्य वार्ड में शिफट कर दिया गया। इस ऑपरेशन में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. सूर्यकांत पुरोहित, प्लास्टिक सर्जन डॉ. विमल मित्तल, डॉ. सौरभ अग्रवाल और निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. पीयूष गर्ग की टीम का योगदान रहा।


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