बज़ट आवंटन में भेदभाव टीसीपी जनजाति परिक्षेत्र बांसवाड़ा जिले में नाम मात्र की खानापूर्ति,अभिभावकों में आक्रोश

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Published on : 26 Aug, 25 05:08

विभाग की 1936 स्कूलों की सूची में घाटोल के केवल तीन स्कूल

बज़ट आवंटन में भेदभाव टीसीपी जनजाति परिक्षेत्र बांसवाड़ा जिले में नाम मात्र की खानापूर्ति,अभिभावकों में आक्रोश

तकनीकी अधिकारियों की सर्वे में आंगनवाड़ी,मां बाड़ी शामिल ही नहीं,कई आंगनवाड़ी के हालत खस्ताहाल

बांसवाड़ा ।टीएसपी जनजाति परिक्षेत्र बांसवाड़ा जिले में सरकारी स्कूलों प्राथमिक विद्यालय उच्च माध्यमिक विद्यालयों का ही भवन भौतिक सत्यापन निरीक्षण किया जा रहा हैं तथा आंगनवाड़ी, मा बाड़ी  की सूचना संकलित नहीं की जा रही हैं 

खांदू कॉलोनी स्थित पीएम श्री विद्यालय की रसायन प्रयोगशाला ओर सज्जनगढ़ की सड़लाईं आंगनवाड़ी केंद्र के बाद झेरपाड़ा प्राथमिक विद्यालय का बरामदा ठहने से शिक्षक सकते में है कब कोई हादसा न हो जाएं और किसी स्टॉफ साथियों पर नहीं गिर जाए।

इधर संस्था प्रधान अपने स्टॉफ साथियों के साथ रोज़ पूरी स्कूल भवन का बारीकी से अवलोकन कर मौका पंचनामा तैयार कर रहे है जिसमें वास्तविक धरातल पर विकट स्थिति का जिक्र किया जा रहा हैं ।

हालांकि बच्चों के अवकाश के कारण सुरक्षित है किन्तु अभिभावक सचेत हो गए हैं और सरकारी स्कूलों में भेजने से कतरा रहे हैं ।इससे नामांकन गिरने का खतरा बढ़ गया हैं।

इधर राजस्थान भर में सरकारी स्कूलों की खस्ताहाल स्थिति उजागर होने और विद्यार्थियो स्टॉफ को नहीं बिठाने सहित मीडिया में सूचना नहीं देने के निदेशक बीकानेर के आदेशों के बाद शिक्षक मुंह बन्द किए हैं।

*जनजाति परिक्षेत्र बांसवाड़ा जिले से भेदभाव*

राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा 1936 स्कूलों को मरम्मत स्वीकृति प्रदान की गई जिसमें जिले के 57स्कूलों ओर घाटोल उपखण्ड के मात्र तीन स्कूलों को सम्मिलित करने ओर बाकी जर्जर भवनों की उपेक्षा करने पर शिक्षकों में खासा आक्रोश व्याप्त हैं।

एक पीओ प्रधानाचार्य ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि विभाग ने जनजाति परिक्षेत्र बांसवाड़ा के अधिकांश जर्जर खंडहर खस्ताहाल भवनों की उपेक्षा की है यह आदेश सर माथे किन्तु वर्तमान में कोई हादसा हुआ तो कौन जिम्मेदार होगा?

विभाग हमे स्कूल भवन सुरक्षित होने ओर अध्यापन के लिए उपयोगी होने का प्रमाण पत्र दे ।

किन्तु जिले में इसका उल्टा हो रहा है शिक्षा अधिकारीयो ने संस्था प्रधानो से पूर्व में ही भवन उपयोगी सूरक्षित होने का लिखित प्रमाण पत्र मांग कर खुद को सुरक्षित कर लिया गया हैं।

शिक्षक संगठन सियाराम ने बताया कि भवन निर्माण के समय समसा कार्यालय,तकनीकी अधिकारियों, और शिक्षा अधिकारीयो की तिकड़ी मिलीभगत से नव निर्माण बेहतर,उपयोगी, सूरक्षित होने का प्रमाण पत्र दिया जाता हैं तो उस भवन निर्माण के 25 से 30 साल बाद तकनीकी डिग्री,अनुभव हीन शिक्षकों से प्रमाण पत्र मांगना न्यायोचित नहीं है।

सियाराम संगठन ने गिरे हुए भवन ओर जर्जर भवनों की मरम्मत का खर्चा भी ठेकेदारों से वसूल करने की मांग की है ताकि गठजोड़ के हिस्सेदारी का खुलासा हो सके और भ्रष्ट अधिकारियों को बेनकाब किया जा सके।

*शिक्षा विभाग स्कूलों की इमारत जर्जर, घोषणा के एक माह बाद भी नहीं मिला सका बजट, दहशत के साए में लगेगी कक्षाएं*

*झालावाड़ हादसे के बाद प्रदेश के लिए 169.52 करोड़, बांसवाड़ा के लिए 2.70 करोड़ मंजूर, मगर पैसा दिया नहीं*

झालावाड़ स्कूल हादसे के एक महीने बाद भी मौत के साए में ही शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं विद्यार्थी। हादसे के बाद जिस रफ्तार से मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री समेत सरकार के सभी नुमाइंदे बयान दे रहे थे लगने लगा था कि सरकार सभी जर्जर विद्यालयों को गिराकर नया बनवा देगी। 

आनन फानन में प्रदेश के 1936 स्कूलों के जर्जर हिस्सों को गिराकर रिपेयर करने के लिए 169 करोड़ का बजट मंजूर भी कर लिया।

इसमें बांसवाड़ा के 57 स्कूलों की रिपेयरिंग के लिए 2.70 करोड़ रुपए शामिल थे। बजट मंजूरी की घोषणा तो आई मगर बजट नहीं आया। हालात ये हैं कि लगभग एक माह बाद भी छात्र जर्जर भवनों में ही पढ़ रहे हैं। इधर, शनिवार और रविवार से प्रदेश सहित बीकानेर जिले में बारिश का दौर फिर से शुरू हो गया है। रविवार को 

शहरी क्षेत्र में 20 एमएम बारिश दर्ज की गई। 

हालात यह है कि बांसवाड़ा डूंगरपुर,चित्तौड़ ,अलवर,नागौर, सिरोही , प्रतापगढ़ और सलूंबर में सोमवार की स्कूली बच्चों की छुट्टी कर दी गई है। बांसवाड़ा में आज भी अनेक स्कूलों की हालत खराब है।

शहर के किराए की बिल्डिंग में संचालित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय ओदीच्यवाडा ,भावसार वाडा को अभी तक नया भवन नहीं मिला है।

 राउमावि अमरथुन 8 कक्षा कक्ष, बरामदा, छज्जा, चारदीवारी जर्जर है प्रवेश वर्जित का बोर्ड लगा दिया है हाल ही में स्कूल के पीछे चारदीवारी का एक हिस्सा रात को गिर गया । घाटोल उपखण्ड के अधिकांश सरकारी स्कूलों को मरम्मत के लिए बजट मिलने का इंतजार है।


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