अच्छी सोच हमारे लिए अमृत है तो बुरी सोच जहर - राष्ट्रसंत श्री ललितप्रभ जी

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Published on : 26 Sep, 23 07:09

अच्छी सोच हमारे लिए अमृत है तो बुरी सोच जहर - राष्ट्रसंत श्री ललितप्रभ जी

उदयपुर। राष्ट्रसंत ललितप्रभ सागर महाराज ने कहा कि ने जहाँ अच्छी सोच अमृत है वहीं बुरी सोच जहर है। बुरी सोच से दूसरों का बुरा बाद में होगा, पर अपना तो पहले ही बुरा हो जाएगा। गाँधीजी ने व्यक्ति को तीन बंदर दिए-बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो और बुरा मत बोलो, पर ये तीनो बंदर तभी सार्थक होंगे जब व्यक्ति चन्द्रप्रभ का चौथा बंदर बुरा मत सोचो को अपनाएगा। जो बुरा नहीं सोचता वह न तो बुरा देखेगा, न बुरा सुनेगा और न ही कभी बुरा बोल पाएगा। गड़बड़ की शुरुआत व्यक्ति की सोच से होती है। उन्होंने अच्छी सोच के लिए औरों की खूबियों पर गौर करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि जो औरों की कमियाँ देखता है वह कमीना होता है, पर जो दूसरों की खूबियाँ देखता है वह खूबसूरत बन जाता है।
संतप्रवर सोमवार को महावीर स्वाध्याय मंडल द्वारा उत्तरी सुंदरवास स्थित वर्धमान पब्लिक स्कुल में आयोजित प्रवचन के दौरान श्रद्धालु भाई बहनों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जहाँ अच्छे विचार जीवन में स्वर्ग के द्वार खोलते हैं वहीं बुरे विचार जीवन को नरक की आग में झोंक देते हैं। विचारधारा को निर्मल, पवित्र और सुंदर बना लेना ही ईश्वर की सर्वाेपरि पूजा और भक्ति है। अगर सासू की विचारधारा अच्छी है तो वह सात जन्मों तक वही बहू घर में लाना चाहेगी नहीं तो घर आई बहू को भी अलग करने की सोचेगी। उन्होंने कहा कि अच्छी विचारधारा बेहतरीन रिश्तों का आधार है, महान व्यक्तित्व की नींव है, मानसिक शांति और आनंद पाने का पहला सूत्र है। अगर व्यक्ति की विचारधारा निर्मल और पवित्र हो जाए तो उसे फिर मंदिर और तीर्थों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि भगवान का निवास बैकुण्ठ में नहीं बेहतरीन विचारधारा में हुआ करता है।
जैसी होगी मति वैसी होगी गति-संतश्री ने कहा कि मरने के बाद व्यक्ति की वही गति होती है जैसी उसकी मति होती है। व्यक्ति गति को सुधारने के लिए मति को पहले ठीक करे। व्यक्ति कीचड़ में पैदा होता है, उसी में जीता है और एक दिन कीचड़ में ही मर जाता है। वे लोग देवतुल्य हैं जो पैदा तो कीचड़ में होते हैं, पर निर्लिप्त जीवन जीते हुए एक दिन कमल के फूल बन जाते हैं।
सार्थक सोचें, सुंदर सोचें-संतप्रवर ने कहा कि जब भी सोचें सार्थक और सुंदर सोचें। भीतर में अच्छे विचारों के बीच बोते रहें ताकि बेहतर परिणाम वाली फसल उगकर आ सके। औरों के विचार और शब्दों को पानी की तरह छानकर उपयोग में लें। महापुरुषों के जीवन पर चिंतन करें, उनके जीवन के अनुभवों को चुराने की कोशिश करें। जो राम, कृष्ण, महावीर, बुद्ध, जीसस, सुकरात, कबीर जैसे महापुरुषों के जीवन से सीखता है, अच्छी बातों को जीवन से जोड़ता है एक दिन वह भी महापुरुषों की तरह पूज्य बन जाता है।
इससे पूर्व संतप्रवर के वर्धमान पब्लिक स्कुल पहुंचने पर महावीर स्वाध्याय मंडल के युवा सदस्यों को जोरदार स्वागत किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाई-बहन मौजूद थे।
युवा पीढ़ी के लिए 5 दिवसीय प्रवचनमाला का विशेष आयोजन-अध्यक्ष राज लोढ़ा ने बताया कि युवा पीढ़ी के संस्कार निर्माण और व्यक्तित्व विकास के लिए राष्ट्रसंत श्री ललितप्रभ जी, राष्ट्रसंत श्री चंद्रप्रभ जी के 26 सितंबर से 30 सितंबर, मंगलवार से शनिवार तक रात्रि 8 से 9.30 बजे तक जैन दादाबाड़ी, मेवाड़ मोटर्स की गली, सूरजपोल में विशेष प्रवचन का आयोजन होगा।


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