पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ सम्पन्न

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Published on : 25 May, 23 15:05

पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ सम्पन्न

मोक्ष कल्याणक के साथ ही पांच दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ सम्पन्न
उदयपुर श्री आदिनाथ दिगंबर जैन चौरिटेबल ट्रस्ट पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति की ओर से वात्सल्य वारिधि आचार्य शिरोमणि 108 श्री वर्धमान सागर जी महाराज सत्संग के सानिध्य में हिरण मगरी सेक्टर 11 में आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का गुरुवार को हजारों समाज जनों की उपस्थिति में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों एवं भक्ति भाव के साथ हर्षाेल्लास से समापन हुआ।
आलोक स्कूल सेक्टर 11 के प्रांगण में बने विशाल पंडाल में महोत्सव के अंतिम पांचवें दिन गुरुवार को मोक्ष कल्याणक मनाया गया। सवेरे 5रू30 बजे से आयोजन की शुरुआत ध्यान एवं आशीर्वाद से हुई। उसके पश्चात श्री जिन अभिषेक एवं नित्यानंद की क्रियाएं संपन्न की। प्रातः7.30 से विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए जिनमें अग्नि देव द्वारा सत्कार विधि, मोक्ष कल्याणक पूजा, एवं हवन की पूर्णाहुति हुई। ज्योंही मोक्ष कल्याणक के धार्मिक उपक्रमों के बीच हवन की पूर्णाहुति हुई तो समूचा पांडाल भगवान आदिनाथ के जयकारों से गूंज उठा। मंच पर उपस्थित सौधर्म इन्द्र एवं इन्द्र इन्द्राणियो सहित पंडाल में मौजूद हजारों श्रावक श्राविकाएं भक्ति भाव में झूम उठे। मोक्ष कल्याणक के साथ ही पांच दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ का समापन हुआ।
संरक्षक अशोक शाह ने बताया कि इसके बाद शोभायात्रा के साथ हजारों समाज जनों की साक्षी में सभी प्रतिमाओं को इंन्द्र- इन्द्राणियो ने मस्तक पर धारण कर गाजे-बाजे के साथ मंदिर जी में स्थापित करवाया। उसके बाद भगवान को वेदी में विराजमान करवा कर कलशा रोहण एवं ध्वजदण्डारोहण जैसे महान धार्मिक कार्यक्रम हुए। पूरे 5 दिन तक चले पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ में मेवाड़ वागड़ सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने देवाधिदेव श्री 1008 वृषभादिवीरान्त चतुर्विशति रत्नमयी स्फटिक जिनबिम्ब ओमकार ह्लींकार, इंद्र मान स्तंभ एवं गुरु बिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के महान धार्मिक आयोजनो का लाभ लिया।
शाह ने बताया कि महासभा के अध्यक्ष जमनालाल हपावत के पुत्र सौधर्म इन्द्र बनें कमलेश  हपावत एवं कृष्णा हपावत, शंातिलाल वेलावत, भंवरलाल मुंडलिया, रोशन-लक्ष्मीदेवी गदावत, राजेश देवड़ा,रूपलाल कमला देवी मुण्डफोड़ा ने मंदिर में चांदी की मूर्ति की स्थापना की।


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