भीलवाड़ा में कोरोना का जलजला 20516 घरों का हुआ सर्वे, 24 के लिए सैम्पल

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Published on : 22 Mar, 20 11:03

भीलवाड़ा में कोरोना का जलजला 20516 घरों का हुआ सर्वे, 24 के लिए सैम्पल, 32 संदिग्धों में से 12 पॉजिटिव शेष की जांच रिपोर्ट आई नेगेटिव

भीलवाड़ा में कोरोना का जलजला 20516 घरों का हुआ सर्वे, 24 के लिए सैम्पल

भीलवाड़ा / जिले में दिनों-दिन कोरोना ने कोहराम शुरू मचा दिया है। 32 संदिग्ध मरीजो में से 12 पॉजिटिव मरीज सामने आए व 20 की रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद जिला प्रशासन, चिकित्सा विभाग के साथ ही डब्ल्यूएचओ, आरआरटी व केंद्र से मेडिकल टीम भीलवाड़ा पहुँच चुकी है। यहां कोरोना वायरस की तीसरी स्टेज की एंट्री हो चुकी है। मतलब राजस्थान में अब सबसे ज्यादा खतरा भीलवाड़ा में ही है, क्योंकि यहां स्थानीय लोगों में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है। अब तक 12 रोगी कोरोना वायरस के पॉजिटिव पाए गए हैं। सबसे बड़ी बात है कि इनमें तीन डॉक्टर व तीन कपांउडर है और बाकी बृजेश बांगड़ अस्पताल का स्टाफ़ शामिल है। पब्लिक हेल्थ डायरेक्टर डॉ. के.के. शर्मा ने बताया कि भीलवाड़ा में 32 संदिग्ध सामने आने के बाद जयपुर जांच के लिए भेजी गई। रिपोर्ट में 12 मरीजो की रिपोर्ट पॉजिटिव, 20 की नेगेटिव रिपोर्ट आई है। ऐसे में एमजी हॉस्पिटल में बनाए गए आइसोलेशन वार्ड में बेड की संख्या बढ़ाते हुए पॉजिटीव मरीजो के संपर्क में रहे उनके परिवारजनों को भी भर्ती कर उपचार शुरू कर दिया गया है। एमजी हॉस्पिटल के आइसोलेशन वार्ड में संदिग्धों की संख्या 20 से बढ़कर 32 पहुँच चुकी है। शुरुआती दौर में 6 पॉजिटिव मरीज सामने आने के बाद प्रशासन ने शहरी क्षेत्र में निषेधाज्ञा के तहत जनता कर्फ्यू की घोषणा कर दी थी। इसके साथ ही 300 जनों की सर्वे टीम ने शहर की विभिन्न कॉलोनियों से 20516 घरों में 105290 लोगों की स्क्रीनिंग की, जिसमें से 722 लोगों में सर्दी-जुखाम के लक्षण दिखे। इसके साथ ही टीम ने संदेह के आधार पर 24 लोगों के सैम्पल लेकर जांच के लिए भिजवा दिए। 
कर्फ्यू में ढील के बाद ये किया पुलिस ने : --
कर्फ्यू की पहली सुबह भीलवाड़ा की सड़कें सुनी रही, लेकिन गली मोहल्ले में रोजमर्रा की वस्तुएं खरीदने वालों की मंडी, किराना दुकानों पर भीड़ रही। आवश्यक जरूरतों को देखते हुए प्रशासन ने 11:00 बजे तक आमजन को वक्त दिया था। समयावधि खत्म होने के बाद पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए हल्का बल प्रयोग करते हुए अनावश्यक बाजारों में निकलने वाले लोगो को खदेड़ना शुरू कर दिया। कर्फ्यू के बावजूद लोग सुबह ही पार्को में घुमने के लिए निकल गए। सड़कों पर लोग रोजमर्रा की तरह घुमते नजर आए। वही माणिक्य नगर में लगने वाली सब्जी मंडी शनिवार को भी सामान्य रूप से लगी। सब्जी खरीदने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही यहां पर सैकड़ों की संख्या में लोग सब्जी खरीदने आ गए थे। शहर में भी लोग अपने वाहनों पर घुमते नजर आए। 
इसकी जानकारी जब जिला कलक्टर राजेन्द्र भट्ट को मिली तो उन्होंने तुरन्त पुलिस अधीक्षक को सख्ती के साथ लोगों को घरों में भेजने के निर्देश दिए। निर्देशो के बाद पुलिस ने सख्ती शुरू की है। पुलिस की सख्ती के बाद शहर की सड़कें पूरी तरह से सुनी हो गई। 

बांगड़ को आम जन मांन रहा जिम्मेदार : --
भीलवाड़ा में कोरोना वायरस फैलाने के जिम्मेदार बांगड़ हॉस्पिटल और वहां के चिकित्सकों के खिलाफ कार्यवाही की मांग ने भी शहर में तेजी पकड़ ली। 
भीलवाड़ा के बहुचर्चित बृजेश बांगड़ मेमोरियल अस्पताल में विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम पहुँच चुकी है। इस अस्पताल की लापरवाही कि वजह से ही भीलवाड़ा में जनता कर्फ्यू लगा हुआ है तथा पूरा राजस्थान कोरोना वायरस के थर्ड स्टेज के दरवाजे पर आकर खड़ा हो गया है। 

ऐसे फैला संक्रमण :--
बांगड़ अस्पताल की वजह से अब तक13 व्यक्ति पॉजिटिव पाए गए हैं तथा 31 व्यक्तियों को आईसोलेटेट किया गया है। इतना नहीं अस्पताल में करीब 253 चिकित्सा कर्मियों के साथ भीलवाड़ा व प्रदेश के अन्य शहरों के 7 हजार मरीजों की जांच भी की जा रही है। इसी प्रकार 75 हजार घरों में भी जांच पड़ताल करने का निर्णय लिया गया है। इसे अस्पताल के मालिकों की लापरवाही ही माना जाएगा कि कोरोना वायरस से संक्रमित दो डॉक्टर अस्पताल में लगातार काम करते रहे। गंभीर बात तो यह है कि डॉक्टरों को संक्रमण होने की जानकारी मिलने के बाद भी मालिकों ने अस्पताल को बंद नहीं किया। अब तक जांच पड़ताल में पता चला है कि अस्पताल के डॉक्टर नियाज को कोरोना वायरस के लक्षण को देखते हुए 12 मार्च को जयपुर के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती करवाया गया। 15 मार्च को डॉ. नियाज को कोरोना का संक्रमित घोषित कर दिया गया। यानि 12 मार्च तक डॉ. नियाज अस्पताल में मरीजों का इलाज कर रहे थे। डॉ. नियाज के संक्रमण का कारण सऊदी अरब से मेहमानों का आना रहा। इसी प्रकार एक अन्य डॉक्टर आलोक मित्तल भी कोरोना वायरस के संक्रमित पाए गए है। 
आरोप है कि डॉ. मित्तल ने भी बड़ी संख्या में मरीजों का इलाज किया। सवाल उठता है कि अपने चिकित्सकों के कार्य को लेकर अस्पताल के मालिकों ने लापरवाही क्यों बरती? ऐसी अनदेखी और लापरवाही के कारण ही लखनऊ पुलिस ने बॉलीवुड सिंगर कनिका कपूर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है, लेकिन इधर भीलवाड़ा में दोषी अस्पताल के मालिकों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। क्या प्रशासन और पुलिस किसी राजनीतिक दबाव में है? अंदाजा लगाया जा सकता है कि अस्पताल की वजह से कितना खतरा उत्पन्न हो गया है। एक शहर में एक साथ 13 जनों के संक्रमित हो जाने से हालात बेकाबू हैं। इस अस्पताल में भीलवाड़ा के बाहर से भी लोग आकर इलाज करवाते हैं। ऐसे में अन्य शहरों में भी खतरा उत्पन्न हो गया है। चिकित्सा विभाग अब उन सभी मरीजों से सम्पर्क कर रहा है जिन्होंने पिछले दिनों भीलवाड़ा के इस अस्पताल में अपना इलाज करवाया। 
अब तक करीब सात हजार लोगों की पहचान की गई है। 
ये भी जाने : ---
आपको बता दे कि विवादों में घिरे बृजेश बांगड़ मेमोरियल अस्पताल का संचालन भीलवाड़ा का कंचन समूह करता है। इस समूह का प्रबंधन लादूराम बांगड़ और उनके भाई गोपाल बांगड़ करते हैं। गोपाल बांगड़ के पुत्र रितेश बांगड़ ने अपनी फेसबुक पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ वाला फोटो लगा रखा है। इस फोटो में प्रधानमंत्री के साथ लोकसभा अध्यक्ष, कोटा के भाजपा सांसद और बांगड़ परिवार के समधी ओम बिड़ला भी नजर आ रहे हैं। असल में रितेश का विवाह बिड़ला की पुत्री रीटा के साथ हुआ है। कंचन समूह भीलवाड़ा में कपड़ा प्रोसेसिंग का काम बड़े पैमाने पर करता है। 
कंचन समूह के कारखानों में तैयार कपड़ा ही देश की बड़ी कंपनियों में सप्लाई होता है। माना जाता है कि कंचन समूह कोई दो हजार करोड़ रुपए का कारोबारी है। भाजपा में रिश्तेदारी के साथ ही कंचन समूह के मालिक लादूराम बांगड़ विधायक रामलाल जाट के साथ कांग्रेस में भी सक्रिय रहे हैं। समूह के अनेक समारोह में कांग्रेस विधायक भी  बढ़चढ़ कर भाग लेते रहे हैं। चूंकि कंचन समूह का राजनेताओं से सीधा जुड़ाव है, इसलिए भीलवाड़ा में इस समूह और उससे जुड़ी संस्थाओं का भी तगड़ा रौब रुतबा है। माना जा रहा है कि इसी रोब और रुतबे के कारण अब तक इस हॉस्पिटल के खिलाफ कोई क़ानूनी कार्यवाही नही की गई है। बागंड हॉस्पिटल की जमीन का अलाटमेंट 27 अगस्त 2001 जीवन ज्योति नैत्र सेवा सोसायटी को आलाटमेंट लीज निष्पादित हुई थी। दो साल मे निर्माण नही होने पर जमीन अलॉटमेंट निरस्त करने की शर्त थी, लेकिन सोसायटी द्वारा निर्माण नही करने पर अलाटमेंट निरस्त नही किया गया। यूआईटी के एक्सईएन संजय माथुर ने अपनी रिपोर्ट और यूआईटी की नोट सीट संख्या 151 पर लिखा की बांगड़ हास्पीटल के निर्माण मे फ्रंट व साइड बैक नही छोडा, जी+ वन की निर्माण स्वीकृति थी लेकिन जी+2 बिना स्वीकृति के निर्माण किया गया है, 6×120 पर भी अवैध अतिक्रमण, सोनोग्राफी सेंटर को भी किराए पर दे रखा है। अगर यूआईटी इसे समय रहते सीज कर लेती तो आज प्रदेश की जनता के सामने इस महामारी को यह नौबत शायद नही आती। 
इनकी रही लापरवाही: --
ऐसे में बांगड़ हॉस्पिटल के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन की भी लापरवाही सामने आ रही है, जिसकी अंनदेखी के चलते आज भीलवाड़ा कोरोना के कोहराम से जूझ रहा है  |


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