शिक्षा शोषण का नहीं सेवा का माध्यम बने: किरण माहेश्वरी

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Published on : 20 Feb, 20 11:02

शिक्षा शोषण का नहीं सेवा का माध्यम बने: किरण माहेश्वरी

पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री एवं विधायक किरण माहेश्वरी ने आज निजी विश्वविद्यालयों (Private universities) पर विधानसभा में आयोजित चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि राजकीय एवं निजी क्षेत्र के, सभी विश्वविद्यालयों के लिए एक नियामक बोर्ड होना चाहिए। शिक्षा शोषण का माध्यम नहीं बने, सेवा का अनुष्ठान बनें।

किरण ने कहा कि निजी क्षेत्र की शिक्षा संस्थाओं में शैक्षणिक अराजकता का वातावरण (Environment of educational chaos in educational institutions) नहीं होना चाहिए। विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने वाले सभी विद्यार्थियों की सूचना शिक्षादृष्टि पोर्टल पर ऑनलाइन संधारित होनी चाहिए। प्रवेश की समय सीमा का सख्ती से पालन होना चाहिए। शोध प्रबंधन में मार्गदर्शक उसी विश्वविद्यालय का संकाय सदस्य होना चाहिए।

विश्वविद्यालयों के सभी संकाय सदस्यों की सूचनाएं ऑनलाईन (Online) साझी की जानी चाहिए। सभी विश्वविद्यालयों का निगमन एक उच्च शिक्षा का विनियमन अधिनियम बनाकर उसके अंदर किया जाना चाहिए। इससे प्रत्येक विश्वविद्यालय के लिए पृथक पृथक अघिनियम की आवश्यकता नहीं रहेगी।

मार्बल पर जीएसटी की रेट 5% हो: किरण माहेश्वरी

आज राजस्थान विधानसभा में माल एवं सेवा कर संशोधन विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री एवं विधायक किरण माहेश्वरी में कहा कि माल एवं सेवा कर लागू करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक देश, एक कर, एक व्यवस्था का वादा पूरा किया है। यह एक बड़ी आर्थिक क्रांति है।

किरण ने कहा कि आज भारत 29 खरब 40 करोड़ डॉलर के सकल घरेलू उत्पादन के साथ विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। यह प्रधानमंत्री की दूरदर्शी एवं पारदर्शी आर्थिक नीतियों का सुपरिणाम है।

किरण ने कहा कि राज्य सरकार माल एवं सेवा कर परिषद में मार्बल पर कर की दर 5% करवाने का प्रयास करें। तीव्र प्रतिस्पर्धा, उत्पादन लागत में भारी वृद्धि, सिरेमिक टाइल एवं कृत्रिम मार्बल के कारण राजस्थान का मार्बल उद्योग भारी संकट का सामना कर रहा है।

किरण ने कहा कि कांग्रेस ने घोषणा पत्र में व्यापारियों के लिए क्षमा योजना की घोषणा की थी। सभी प्रकार की ब्याज एवं शास्ति क्षमा करने की बात कही थी। किंतु इसकी अनुपालना नहीं की गई।

राजस्थान को केंद्रीय करों में देय भाग को देने में केंद्र सरकार कोई भेदभाव नहीं कर रही है। कांग्रेस अपनी असफलताओं को छुपाने के लिए मिथ्या दोषारोपण कर रही है। यह सरकार थोथी घोषणाओं की सरकार है।


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