डिजिटल स्पेस में भारतीय धरोहर प्रदर्शनी अतुल्य भारत से परिचय करा रही है- डॉ. हर्ष वर्धन

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Published on : 19 Feb, 20 06:02

डिजिटल संरक्षण के माध्यम से पुरानी धरोहर को डिजिटल रूप में फिर साकार करके भविष्य के लिए संरक्षित रखा जा रहा है

डिजिटल स्पेस में भारतीय धरोहर प्रदर्शनी अतुल्य भारत से परिचय करा रही है- डॉ. हर्ष वर्धन

 इस परियोजना को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा वित्तीय सहायता प्रदान की गई

इस प्रदर्शनी को स्थाई बनाने के प्रयास किए जाएंगे

राष्ट्रीय संग्रहालय में लगी प्रदर्शनी 23 फरवरी, 2020 तक चालू रहेगी

     नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में “डिजिटल स्पेस में भारतीय धरोहर प्रदर्शनी” लगाई गई है, जो इस महीने की 23 तारीख तक चलेगी। डिजिटल संरक्षण की परियोजना के लिए भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने वित्तीय सहायता प्रदान की है। इस परियोजना पर प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा भी नजर रखी जा रही है।

     इस प्रदर्शनी को देखते हुए केन्द्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने आज कहा कि भारतीय डिजिटल हेरिटेज परियोजना विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की एक अनूठी पहल है। इसके अंतर्गत पुराने क्षतिग्रस्त स्मारकों तथा विलुप्त हो रही नृत्य जैसी कला विधाओं का संरक्षण किया जाता है। यह प्रदर्शनी अतुल्य भारत से परिचय करा रही है। इसके लिए पहले स्मारकों की लेजर स्कैनिंग और मैपिंग की जाती है। इसके बाद ऐतिहासिक उपलब्ध जानकारी के आधार पर इन स्मारकों का डिजिटल स्वरूप तैयार किया जाता है। यह स्वरूप 3डी आकार का होता है। इस स्वरूप के तैयार होने के बाद किसी भी आकार का स्वरूप प्रिंट किया जा सकता है। इसके अलावा जीर्ण-क्षीर्ण स्मारकों को उनके प्रारम्भिक स्वरूप के अनुसार तैयार करके भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शनी को स्थाई बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यालयों और अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को प्रदर्शनी देखने के लिए यहां लाएं।

     डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि इन संरक्षित स्वरूपों की प्रदर्शनी रोचक, ज्ञानप्रद और महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी में डिजिटल हम्पी, कोणार्क मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, रानी की राव और ताजमहल के संरक्षित स्वरूप प्रदर्शित किए गए हैं। ये स्वरूप दर्शकों को बीते युग की वैभवपूर्ण कलाओं से परिचित कराते हैं। इन स्वरूपों को यदि घर बैठे देखा जाए तो कोई भी व्यक्ति इन ऐतिहासिक स्मारकों की जानकारी और महत्व का आभास कर सकता है। डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि ऐसी परियोजनाओं के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी वित्तीय सहायता तथा हर प्रकार की मदद देता रहेगा। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी डिजिटल इंडिया की अवधारणा को सार्थक बना रही है।

     डॉ. हर्ष वर्धन ने यह भी बताया कि इस काम में विभिन्न आईआईटी सहयोग दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शनी को व्यापक बनाने के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों में काम किया जाएगा। यह प्रदर्शनी अतीत और भविष्य के बीच पुल का काम करेगी तथा पीढ़ियों को समृद्ध सांस्कृतिक और वास्तुकला के ज्ञान से अवगत करा के उन्हें सीखने का अवसर देगी। यह प्रदर्शनी देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर सकेगी।

इस अवसर पर वरिष्ठ नेता प्रोफेसर विजय कुमार मल्होत्रा ने भी विचार व्यक्त किये। इस प्रदर्शनी की अवधारणा डॉ. अनुपमा मलिक ने तैयार की है। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस परियोजना की यूनेस्को तथा अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने सराहना की है। इस प्रदर्शनी को देखकर दर्शकों में डिजिटल संरक्षण के बारे में उत्सुकता बढ़ी है।

 


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