त्रिदिवसीय संगीत का महाकुंभ 7 फरवरी से

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Published on : 03 Feb, 20 11:02

तैयारियों एवं विभिन्न व्यवस्थाओं को लेकर हुई बैठक

त्रिदिवसीय संगीत का महाकुंभ 7 फरवरी से

उदयपुर  झीलों की नगरी उदयपुर में आगामी माह 7 से 9 फरवरी तक संगीत के महाकंुभ का आयोजन होगा जहां लहरों के बीच, झील किनारे एवं शहर के मध्य देश-विदेश के विभिन्न फनकार अपने सुरों का जादू बिखेरंेगे। यह आयोजन जिला प्रशासन, पर्यटन विभाग एवं हिन्दुस्तान जिंक वेदान्ता के सहयोग से कल्चलर इवेंट ऑर्गेनाइजेशन “सहर“ द्वारा किया जा रहा है।
अतिरिक्त जिला कलक्टर (प्रशासन) ओ.पी.बुनकर व नगर निगम आयुक्त अंकित कुमार सिंह ने आयोजन को सफल बनाने हेतु विभिन्न विभागों को आवश्यक दिशा निर्देश प्रदान किए। उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर लॉ एण्ड ऑर्डर, फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस, बैठक व्यवस्था, साफ-सफाई, मोबाइल टॉयलेट, पानी, यातायात, सुरक्षा आदि के साथ ही पार्किंग व्यवस्था एवं व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने को कहा। उन्होने कहा कि लगातार चार वर्षों से हो रहे वर्ल्ड म्यूजिक फेस्टिवल ने लेकसिटी की पर्यटन के क्षेत्र में पहचान को नई ऊंचाइयां दी हैं शहर के तीन प्रमुख स्थल गांधी ग्राउण्ड, अमराई घाट व फतहसागर की पाल पर आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने एवं आयोजन को भव्य बनाने को लेकर भी आवश्यक निर्देश बैठक में दिए।
बैठक में पर्यटन उपनिदेशक शिखा सक्सेना सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी एवं आयोजक टीम सहर के संस्थापक संजीव भार्गव व पेकर हक मौजूद थे। भार्गव ने बताया कि इस त्रिदिवसीय आयोजन में दुनियाभर के नामचीन कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। साथ ही यहां के स्थानीय कलाकार भी अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। भार्गव ने यह भी बताया कि आयोजन को लेकर एयरपोर्ट व रेलवे स्टेशन पर आने वाले पर्यटकों को आयोजन की जानकारी प्रदान करने के संबंध में हेल्पडेस्क स्थापित की जाएगी एवं उनके स्वागत में भी आकर्षक प्रस्तुतियां होंगी।
तीन सत्रों में होंगे आयोजन
भार्गव ने बताया कि फेस्टिवल में बेमिसाल जीवंत प्रदर्शन होते हैं और यह सर्वश्रेष्ठ ढंग से  सांस्कृतिक विविधता का जश्न मनाता है। तीन सुरम्य आयोजन स्थलों में फैला यह फेस्टिवल संगीत की गहन विविधता में डूब जाने का अवसर प्रदान करता है। इस विविधतापूर्ण संगीत में सुबह के ध्यानपूर्ण राग से लेकर दोपहर में झील के बगल में गूंजने वाली साकार रूमानी संगीत प्रस्तुतियों तक, दिनभर की तमाम मनोदशाएं सम्मिलित होती हैं। सांध्यकालीन मंच जोशीले युवा संगीत से भरपूर होता है, जो हर आयु वर्ग के लोगों को एक साथ ले आता है। इसके अलावा, महोत्सव में स्थानीय राजस्थानी प्रतिभाएं भी अपनी प्रस्तुतियां देती हैं। यह स्थानीय कलाकारों को एक बेशकीमती मंच और व्यापक पहुंच देता है।


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