कृषि के लिए जैव उर्वरक और जैव कीटनाशकों के उत्पादन के लिए उन्नत तकनिकीयां

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Published on : 08 Nov, 19 11:11

कृषि के लिए जैव उर्वरक और जैव कीटनाशकों के उत्पादन के लिए उन्नत तकनिकीयां

उदयपुर    महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर के संघटक राजस्थान कृषि महाविद्यालय के अधीन कार्यरत मृदा विज्ञान व कृषि रसायन विभाग के अन्तर्गत २१ दिवसीय विन्टर स्कूल प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ शुक्रवार को अनुसंधान निदेशालय में हुआ। उल्लेखनिय है कि इस विंटर स्कूल का आयोजन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के द्वारा प्रायोजित किया गया है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिशद्, नई दिल्ली के उपमहानिदेशक कृषि शिक्षा प्लानिंग व गृह विज्ञान डॉ. पी.ए. पांडे ने अपने अभिभाषण में बताया कि आज परिषद् अपने बजट का ११ प्रतिशत मानव संसाधन विकास पर खर्च कर रहा है इसलिये दक्षता में विकास हेतु वैज्ञानिकों सहित सभी स्टेक होल्डर के उचित प्रशिक्षण की महत्ती आवश्यकता है। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों बधाई देते हुये कहां कि राष्ट्र की विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते है। इस प्रकार के प्राथमिकताओं को उन्होंने वैज्ञानिकों के माइंड सेट को बदलने के लिये आवश्यक बताया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महाराणा प्रताप कृशि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर के माननीय कुलपति प्रो. नरेन्द्र सिंह राठौड ने कृषि वैज्ञानिकों के कंधों पर बडी जिम्मेदारी बताते हुये कहां कि आज देश में ७५ राज्य कृषि विश्वविद्यालयों में व भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के अनुसंधान संस्थानों के कुल २०,२०० वैज्ञानिक ही अपनी सेवायें वृद्धि विकास में दे रहे है। इस प्रकार के प्रशिक्षणों से देश के विभिन्न राज्यों से आये वैज्ञानिकों के ज्ञान व सोच के सकारात्मक बदलाव आयेंगे। उन्होंने सभी प्रशिक्षणकर्ताओं से जैविक उर्वरक व जैविक कीटनाशकों के विकास और उपयोग में एमबेसेडर के तौर पर भूमिका निभाने की आवश्यकता जताई। प्रो. राठौड ने अर्न्तराष्ट्रीय स्तर पर कार्बन फूट प्रिन्ट और मिथेन उत्पादन घटाने, वातावरण अनुकूल वर्षा उत्पादन करने और कृषि में टिकाऊपन लाने के लिये जैविक कृषि को बढावा देने की बात कहीं। उन्होंने इस क्षेत्र में स्टार्टअप और नवाचार को अपनाने की बात भी कहीं।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में अधिष्ठाता, राजस्थान कृषि महाविद्यालय, उदयपुर डॉ. अरूणाभ जोशी ने बताया कि महाविद्यालय में बायोफर्टिलाइजर व बायोपेस्टीसाइड पर उल्लेखनीय कार्य हो रहे है। उन्होंने जैविक उर्वरक व जैविक कीट नियंत्रक को पर्यावरण अनुकूल बताते हुए इस प्रशिक्षण को आयोजन की आवश्यकता जताई।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ. राम हरी मीणा ने बताया कि विंटर स्कूल में ८ राज्यों के २३ वैज्ञानिक भाग ले रहे है जिसमें विभिन्न विषयों के प्रख्यात वैज्ञानिक अपने ज्ञान को विशेषज्ञ के रूप में साझा करेंगे। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान ४४ लेक्चर, १३ हेण्डस ऑन ट्रेनिंग और २ एक्सपर्ट फील्ड विजिट का आयोजन भी किया जायेगा।

कार्यक्रम का संचालन जैव तकनीकी विभाग के सहायक प्राध्यापक, डॉ. देवेन्द्र जैन ने किया, धन्यवाद डॉ. गजानन्द जाट, सहायक प्राध्यापक ने ज्ञापित किया। कार्यक्रम में विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, निदेशक अनुसंधान, निदेशक प्रसार शिक्षा, विभागाध्यक्ष व प्राचार्य उपस्थित थे।


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