61 शिक्षिक-शिक्षिकायें नेशन बिल्ड अवार्ड से सम्मानित

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Published on : 13 Sep, 19 14:09

शिक्षक ही ला सकता है समाज में बदलाव

61 शिक्षिक-शिक्षिकायें नेशन बिल्ड अवार्ड से सम्मानित

उदयपुर  रोटरी क्लब उदयपुर द्वारा आज रोटरी बजाज भवन में आयोजित एक समारोह में जिले में कार्यरत शिक्षा की विभिन्न विधाओं में अध्यापन कराने वाले 61 शिक्षक-शिक्षिकाओं को नेशन बिल्ड अवार्ड से सम्मानित किया गया। समारेाह के मुख्य अतिथि महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रोद्यौगिकी विश्वविद्यालय के कुलपित डॉ. एन.एस.राठौड थे।

डॉ. राठौड ने कहा कि शिक्षक सदैव हर जगह पूजनीय रहा है। कक्षा में अध्यापन कराने वाला शिक्षक ही नहीं वरन् हर वह व्यक्ति शिक्षक होता है जिस व्यक्ति से शिक्षा प्राप्त हों। शिक्षक यदि आज पढान बंद कर दें तो कल बेकार हो जायेगा। शिक्षा का क्षेत्र् चुनौतीपूर्ण बनता गया है। समाज में शिक्षक का योगदान बहुत बडा है। समाज में सिर्फ शिक्षक ही बदलाव ला सकता है। यदि समय के साथ बदलाव न किया जाय तो कोई भी संस्थान, कंपनी बंद होने के कगार पर पंहुच सकती है।

ये हुए नेशन बिल्ड अवार्ड से सम्मानित- क्लब की ओर से डॉ. रक्षा शर्मा,डॉ भवानीबालसिंह,डॉ. राशि माथुर,डॉ. रोडसिंह देवडा,डॉ. दिलीपसिंह चौहान,शुभ्रा सुराणा,डॉ. गोविन्दसिंह शक्तावत,डॉ. ऋतु भटनागर, प्रकाश वया,डॉ.नीलम भण्डारी सहित 60 शिक्षक-शिक्षिकाओं उपरना,शॉल,स्मृतिचिन्ह एवं श्रीफल प्रदान कर नेशन बिल्ड अवार्ड से सम्मानित किया गया।

प्रारम्भ में समारेाह की अध्यक्षता करते हुए क्लब अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमावत ने कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति यह नहीं कहती कि शिक्षक केवल शिक्षक बन कर रहें। अब शिक्षक के मायनें बदल चुके है। उन्हें गुरू बन कर अपने गुरूत्तर दायित्व का निर्वहन करना होगा। ज्ञान का भण्डार आज स्मार्ट फोन पर चला गया है। शिष्य शिक्षक से अधिक जानने लग गया है। गुरूत्तर दायित्व अपने जीवन के अनुकूल के माध्यम से संस्कारों एवं मूल्यों का प्रतिस्थापन शिक्षक को समाज व विद्यालय में जीवित रखेगा।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से देश की शिक्षा नीति परिवर्तन के दौर में चल रही है। उसको देखते हुए शिक्षक का कर्तव्य और बढ जाता है। ऐसे में हम सभी को मिलकर परिवर्तन की नयी शुरूआत करनें का संकल्प लेना चाहिये। सत्य से संदेश की यात्र की जानी चाहिये। इस अवसर पर डॉ. कुमावत ने मिट्टी के गणेशजी की स्थापना कर अनंत चतुदर्शी पर उनका विसर्जन करने कथा बतायी।

समारोह में कृष्णवत्सल पण्ड्या, भुवनेश आमेटा, हेमन्त मेहता को सम्मानित किया गया। अंत में सचिव संजय भटनागर ने आभार ज्ञापित किया। शुरूआत में मनमोहन भटनागर एवं कादंबरी ने ईश वंदना प्रस्तुत की। कार्यकम का संचालन वंदना ने किया।


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