भ्रान्ति के चलते 12 घण्टे लेट हुआ नेत्रदान,कॉर्निया सुरक्षित

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Published on : 11 Sep, 19 06:09

भ्रान्ति थी,पर डीप फ्रीज़ में रहने के कारण 12 घंटे बाद भी हुआ नेत्रदान

भ्रान्ति के चलते 12 घण्टे लेट हुआ नेत्रदान,कॉर्निया सुरक्षित

कल देर रात महावीर नगर निवासी श्वेता सिंह ने व्यक्तिगत कारणों के चलते घर पर ही फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद देर रात उसका शव न्यू मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी के कोल्ड रूम में रखा दिया गया था। श्वेता के पिता जी श्री लल्लन सिंह जी रावतभाटा स्थित, गैमन इंडिया में कार्यरत है । बेटी की इस उम्र में गलत कदम उठा लेने से वह बहुत आहत थे । सागर पिपलानी जो कि गैमन इंडिया में ही सप्लायर का काम देखते है,साथ ही वह शाइन इंडिया के साथ भी पिछले 5 सालों से ज्यादा समय से जुड़े हुए है। 

श्वेता के शव को मोर्चरी में शिफ्ट करवाते समय वह भी वहाँ मौजूद थे,मौक़ा देखकर उन्होंने लल्लन जी से बेटी के नेत्रदान करवाने की बात की,पर उस समय वह घोर दुखः में थे, रात भर में 3-4 बार सागर जी ने,लल्लन सिंह जी की नेत्रदान के लिये समझाईश की,पर उस समय उन्होंने ठीक से ज़वाब न देकर अन्य रिश्तेदारों के आने के बाद ज़वाब देने की कह कर मना कर दिया। पिपलानी जी यह जानते थे कि,एक बार यदि समझाईश का लिंक टूट गया तो फिर बहुत मुश्किल से ही उनके पिता जी को तैयार किया जा सकता था ,पर साथ ही इनको यह भी पता था कि,अगर शव को डीप फ्रीज़ में या कोल्ड रूम में रख दिया जाये,तो कॉर्निया 24 घंटे तक सुरक्षित है।  आखिर रात के 3 बज़े तक बीच बीच मे समझाईश का दौर चलता रहा, उसके बाद सागर जी घर आ गए । सागर जी ने सुबह फिर 7 बज़े से परिवार के लोगों से सम्पर्क किया,आनाकानी होता देख,जल्दी से घर से तैयार होकर ,मोर्चरी पहुँचे,फिर दुबारा समझाईश करके,उनके मन से इस भ्रांति को हटाया गया कि,नेत्रदान में पूरी आँख ही ले ली जाती है ,उनको कहा गया कि सिर्फ अंगूठे के नाखून के बराबर का हिस्सा आँख के ऊपर से लिया जाता है,पूरी आँख को नहीं लिया जाएगा,न किसी तरह का कोई खून उस दौरान निकलता है। लल्लन जी व सभी उपस्थित लोग इसी भ्रांति के कारण रात भर से सही तरह से ज़वाब नहीं दे रहे थे,सागर जी के इतना सब समझाने के बाद जाकर सुबह 11:30 बज़े नेत्रदान की प्रक्रिया सम्पन हुई । 

संस्था सदस्यों ने बताया कि यूँ तो साधारण-तया मृत्यु के बाद 6 से 8 घण्टे में नेत्रदान ले लिया जाना चाहिए, परंतु सर्दी के दिनों में या जब तापमान थोड़ा कम हो तो ऐसे समय में 10 से 12 घंटे तक भी नेत्रदान संभव है । इसी तरह यदि शव को समय रहते (मृत्यु के बाद जितना जल्दी हो सके) डीप फ्रीज़ या कोल्ड रूम या बर्फ की सिल्ली, पर रखा जाये तो ऐसी स्थिति में 24 घण्टे में भी नेत्रदान संभव है । यही कारण रहा कि,श्वेता की आँखों का कॉर्निया पूर्णतया सुरक्षित था,इसलिए उसको प्राप्त कर लिया गया। 

मोर्चरी के स्टॉफ चेतन व मुकेश के साथ वहाँ के पुलिसकर्मियों ने भी जब देखा कि सिर्फ 15 मिनट के अंदर,बिना रक्त निकले व चेहरे पर किसी तरह की विकृति आये बिना,नेत्रदान हो गया,तो वह स्वयं भी इस बात से सहमत हो गए कि,वह भी अब अधिक से अधिक लोगों को नेत्रदान के प्रति जागरूक करेंगे । नेत्रदान सम्पन्न करवाने में संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन के ज्योति-मित्र सागर पिपलानी जी व आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान के कोटा चैप्टर का सहयोग रहा। 


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