समाजसेवी कुसुमलता जैन के निधन पर परिजनों के करवाया नेत्रदान

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Published on : 14 Jun, 19 07:06

निर्जला एकादशी के पावन पर्व और चिकित्सक पुत्र के सहयोग से हुआ समाज सेवी माँ का नेत्रदान

समाजसेवी कुसुमलता जैन के निधन पर परिजनों के करवाया नेत्रदान

कोटा जंक्शन स्थित यूरो किड्स प्ले स्कूल की संचालिका एवं समाजसेविका कुसुमलता जैन (65) का गुरुवार सुबह 5:30 बजे आकस्मिक निधन हो गया। विभिन्न सामाजिक, धार्मिक संस्थाओं, गौशाला व जैन मंदिर से तन-मन-धन से निस्वार्थ सहयोग करने वाली कुसुमलता के निधन का समाचार सुनकर शहर की स्वयंसेवी संस्थाओं, अग्रवाल समाज व जैन समाज व प्रबुद्ध नागरिकों ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

महावीर इएनटी हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. विनीत जैन  ने बचपन से ही अपने माता-पिता को सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते देखा है । साधु-संतों की सेवा,गौ सेवा या किसी गरीब व्यक्ति को दवा,कपड़े,भोजन आदि किसी भी चीज़ की जरूरत होने पर,उनकी माता जी हमेशा तैयार रहती थी । अभी तीन दिन पहले भी वह गौ शाला के लिये अपनी इच्छा से दानराशि भेंट करके गयी है । शतायु रहे इनके ससुर स्व० श्री जगन्नाथ जी जैन जी (भूर जी) की भी इन्होंने अंतिम समय तक खूब सेवा की थी ।

कुसुम जी के निधन की सूचना थोड़ी ही देर में पूरे समाज व स्टेशन क्षेत्र में फैल गयी । शाइन इंडिया के स्टेशन क्षेत्र के संयोजक श्री मुकेश अग्रवाल जी को पता चलते ही,वह तुरंत उनके निवास पर पहुँचे, उन्होंने डॉ विनीत से माता जी के नेत्रदान करवाने की बात कही तो,वह स्वयं इस बात से सहमत हुए,क्योंकि उनकी माँ स्वयं अपने नेत्रदान करवाने की बात उनसे कई बार कह चुकी थी । उनका कहना था कि,मरणोपरांत मेरी आँखों को जरूर दान कर देना,जिससे किसी दृष्टिहीन को रोशनी अवश्य मिल सकेगी ।

उनकी भावनाओं का ध्यान रखते हुए तुरन्त नेत्रदान के लिए शाइन इंडिया की टीम को फोन किया गया,टीम वहाँ पहुँची और उनकी दोनों आंखे सुरक्षित ढंग से संग्रहित कर ली गई हैं।   

नेत्रदान प्रक्रिया में स्वयं डॉ विनीत जैन ने सहयोग किया,साथ ही पूरी प्रक्रिया को वहां उपस्थित सभी क़रीबी रिश्तेदारों ,समाज के प्रतिनिधियों व मित्रों ने देखा । कई लोगों ने पहली बार जाना कि,नेत्रदान में सम्पूर्ण आँख न लेकर सिर्फ उपर की पारदर्शी परत कॉर्निया (पुतली) को लिया जाता है । इस 15 मिनट की प्रक्रिया में न किसी तरह का कोई रक्तस्राव होता न चेहरे में किसी तरह की कोई विकृति आती है ।

कई लोगों को इस बात की भी शंका थी कि,मृत्यु के बाद सिर्फ 3 घन्टे तक ही नेत्रदान लिया जा सकता है,जो कि पूर्णतया गलत है,संस्था सदस्यों ने बताया कि गर्मियों में अधिकतम छ से आठ घंटो में ,सर्दियों में दस से बारह घंटो में नेत्रदान संभव है,इसी तरह यदि पार्थिव शव को डीप फ्रीज़ में रख दिया गया है,तो चौबीस घंटों में भी नेत्रदान लिया जा सकता है ।
                                    
स्व. कुसुमलता जैन के वरिष्ठ पुत्र विकास जैन यूएसए में सीनियर इंजीनियर हैं। पति इंजीनियर महावीर जैन ऑइल एन्ड गैस कंपनी से सेवानिवृत्त हुए हैं। स्व. कुसुमलता ने 1975 में एमए इकोनॉमिक्स की शिक्षा ली थी,उसके बाद 2001 में उन्होंने कोटा जंक्शन क्षेत्र में कोटा में सबसे पहले यूरो किड्स प्ले स्कूल की नींव रखी थी। वे छोटे बच्चों को शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार देने पर जोर देती थी। उन्होंने कई गरीब बच्चों की पढ़ाई व महिलाओं के इलाज में भी हरसम्भव मदद की। अग्रवाल समाज व जैन समाज की सामाजिक गतिविधियों में सदैव अग्रणी रही। कई महिला संगठनों ने उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताते हुए श्रद्धांजलि दी है । हिन्दू धर्म के शास्त्रों में बताया गया है कि ,निर्जला एकादशी के दिन जो भी व्यक्ति संसार से देह त्यागता है,वह निश्चित ही मोक्ष को प्राप्त होता है ।


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