मील का पत्थर साबित होगा फ्यूमर प्लांट

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Published on : 10 Feb, 19 07:02

मील का पत्थर साबित होगा फ्यूमर प्लांट

अप्रेल माह से शुरू होगा देष का पहला अत्याधुनिक तकनीक आधारित संयत्र

हिन्दुस्तान जिंकअपनी स्थापना से ही पर्यावरण सरंक्षण के प्रति समर्पित रहा है इसी कडी में फ्यूमर प्लांट की स्थापना इसका मुख्य अंग है। हिन्दुस्तान जिंक ने पर्यावरण सरंक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हुए ६०० करोड रूपये लागत का फ्यूमर प्लांट स्थापित किया है जिससे न केवल ठोस अपषिश्ठ जेरोसाईट का उत्पादन षून्य हो जाएगा अपितु पर्यावरण सरंक्षण के लिए भी यह एक नवाचार है। जेरोसाइट को रखने के लिए अब जमीन की आवष्यकता नही होगी एवं प्राकृतिक संसाधनों का सरंक्षण होगा।

हिन्दुस्तान जिंक द्वारा चंदेरिया में स्थापित देष का पहला फ्यूमर प्लांट इसी वर्श अप्रेल माह से षुरू होगा। इस कारखाने के लगने के बाद पर्यावरण की दृश्टि से जो अनुसंधान एवं विकास का क्रम हिन्दुस्तान जिंक में निरंतर चलता रहता है वह और गति पकडेगा। फ्यूमर प्लांट के प्रारंभ होने के साथ ही यह संयंत्र जस्ता उत्पादन के साथ साथ पर्यावरण के क्षेत्र में भी मील का पत्थर साबित होगा।

फ्यूमर प्लांट से जिंक की रिकवरी ९६.८ प्रतिषत से ९७.५ प्रतिषत तक में सुधार होगा जिससे सीसा, जस्ता एवं चांदी की रिकवरी भी होगी। चंदेरिया संयंत्र से निकलने वाले अपषिश्ट से जो स्लेग निकलेगा उसका उपयोग सीमेंट उद्योगों द्वारा किया जाएगा। इसके तहत् एक कारखाने का वेस्ट दूसरे कारखाने का इनपुट बनेगा जिससे इकोफ्रेण्डली संकल्पना मजबूत होगी। यह सबसे सफलतम प्रकि्रया होगी जिससे जिंक फ्यूमर प्लांट में बिना जेरो साइट के उत्पादन के खनिज की रिकवरी होगी।

फ्यूमर प्लांट से निकलने वाला स्लेग से सीमेंट उद्योगों में उपयोग में लिए जाने वाला कैल्षियम कार्बोनेट का उपयोग भी कम होगा जो कि कार्बन फुटप्रिंट को कम करेगा। इससे प्राकृतिक संसाधनों एवं पर्यावरण का सरंक्षण होगा। फ्यूमर प्लांट की परियोजना में केंद्रीय प्रदूशण मंडल के द्वारा दिये गये मानकों के अनुसार २४ घण्टें वॉटर एवं एयर मॉनिटरिंग डिवाइस लगाया गया है।

 

 


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