हिन्दी दिवस पर काव्य गोष्ठी का आयोजन

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Published on : 16 Sep, 18 06:09

हिन्दी दिवस पर काव्य गोष्ठी का आयोजन
जैसलमेर हिन्दी दिवस पर स्थानीय कवियों साहित्यकारों व हिन्दी प्रेमियों द्वारा सार्वजनिक जिला पुस्तकालय में विचार एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन कर देश के विकास एवं एकता में हिन्दी भाषी के महत्व व योगदान पर चर्चा की।
वरिष्ठ साहित्यकार दीनदयाल ओझा की अध्यक्षता में आयोजित गोष्ठी का प्रारम्भ तमिल भाषी कवि व साहित्यकार मणिक्कम द्वारा करते हुए हिन्दी में ’’गुरसा हानिकारक’’ कविता से की। व्याख्याताा अशोक कुमार ने कहा कि हमें अंग्रेजी ही विकास कर सकती है इस मानसिकता को छोडना होगा तभी हम अपनी संस्कृति व विरासत को बचा पायेंगें। कवि राम लखारा विपुल ने अपनी कविता हिन्दी है अभिमान हमारा हिन्दी जनमन गान हमारा के जरिये हिन्दी की महता को स्थापित किया। कवि ओम अंकुर ने कवि कालिदास के स्मरणों से अपना काव्य प्रारम्भ करते हुए कहा कि हिन्दी विश्व की ऐसी अनुपम भाषा है जिसमें हमें छनद व अंलकारों के उपहार प्राप्त है।
साहित्यकार नन्द किशोर दवे ने वर्तमान समय में हिन्दी की दुर्दशा को अभिव्यक्त करते हुए कहा कि आज हिन्दी व हिन्दू दोनो ही अपने घर में अपमानित है। कवि भोजराज वैष्णव ने अपनी कविता के जरिये आव्हान किया कि हिन्द को हिन्दीयों हिन्दी का मान बढाओं।
रंगकर्मी विजय बल्लाणी ने कहा कि हिन्दी में लिखने वालो की कमी नहीं है किन्तु पढने वाले कम है। बल्लाणी ने हिन्दी के भविष्य को अच्छा बताया।
साहित्य कार लक्ष्मीनारायण में मजदूर केन्द्रीत कविता प्रस्तुत कर हिन्दी भाषा की महिमा बताई।
रम्मत लेखक व कवि आनन्द जगाणी ने हिन्दी के उत्थान विकास एवं सम्मान में लगे भरतेन्दु हरिशचन्द्र से लेकर नीरज तक को याद करते हुए कहा कि हिन्दी आज बाजार की भाषा बन रही है अतः इसका विकास व महत्व कम नही होगा। जगाणी ने अपनी कविता ’’मिलती केवल उसे अहमियत होती जिसके पास वल्दीयत के जरिये गोष्ठी में समां बांधा।
व्यंग्य लेखक व उद्घोषक मनोहर महेचा में पाठयक्रम में हिन्दी की दुर्दशा पर चिन्ता जाहिर करते हुए कहा कि गणित, विज्ञान व अंग्रेजी के अंक हिन्दी पर भारी रहते है।
हास्य कवि गिरधर भाटिया ने वर्तमान समय में नारी अत्याचार व दुर्दशा पर कविता ओ मेरी अजन्मी बेटी नहीं दूंगी में जन्म तुझे क्योंकि यह दुनिया नही है लायक तुम्हारे के जरिये संवेदनाओं का ज्वार ला दिया।
डाँ. ओम प्रकाश भाटिया ने इसके उलट बेटी का मां से संवाद कविता के माध्यम से अजन्मी बेटी के मां की दुर्दशा का चित्रणा व्यक्त किया कवि आर.के.व्यास द्वारा भी कविता प्रस्तुत की गई।
गोष्ठी के सुत्रधार मांगीलाल सेवक ने कविता हिन्दी को हदय में वसाओ भाई व हिन्दी हमारी माता है प्रस्तुत की।
अध्यक्ष दीनदयाल ओझा ने कहा कि यह बडा दुखद है कि आज बच्चे अंग्रेजी के माध्यम से हिन्दी सीख रहे है। ओझा ने कवि विद्यापति की तर्ज पर छंद व सवैये सुनाये। गोष्ठी में भीमसिंह भाटी सहित अन्य साहित्य अनुरूगी उपस्थित थे। अन्त में पुस्तकालयअध्यक्ष आनन्द कुमार द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

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