राष्ट्र आराधना का लिया संकल्प

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Published on : 02 Jun, 18 10:06

"पूर्णविजय संकलपोस्माकम सतत परिश्रम शीलवतां" गीत के साथ हुआ दीक्षांत समारोह

राष्ट्र आराधना का लिया संकल्प प्रान्त प्रचार प्रमुख डॉ.यज्ञ आमेटा ने बताया कि आवासीय संस्कृत प्रशिक्षण वर्ग के 12 दिन दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया जिसमें 12 जिलों से आए लगभग 300 कार्यकर्ताओं ने भारत माता के चित्र के सामने दीप प्रज्वलित कर संकल्प लिया कि हम यहां से जा कर "गृहं गृहं संस्कृतम्" और समाज में राष्ट्र आराधना का काम करेंगे। समाज को एक करने का काम करेंगे, ऐसा निशुल्क काम करने के लिए संकल्प लिया और गांव गांव में जाकर के संस्कृत संभाषण शिविर का आयोजन, गीता संस्कृत शिक्षण केंद्र, बाल संस्कार केंद्र, इत्यादि आयामों के द्वारा संस्कृत की अलख जगाने के लिए संकल्पित हुए, "पत्राचार के द्वारा संस्कृतम्" जो आज देश भर में एक सबसे अच्छा प्रचलित पाठ्यक्रम है , जिसमे संस्कृत घर घर जाकर व्यवहार का साधन बनती है
दीक्षांत कार्यक्रम का परिचय देते हुए प्रान्त संगठन मंत्री देवेंद्र पंड्या ने कहा कि संस्कृत भारती द्वारा आवासीय भाषा बोधन वर्ग के अंतिम 12वे दिन दीक्षांत कार्यक्रम का आयोजन किया जो कि वैदिक परंपरा में जो गुरुकुल परंपरा के अनुसार छात्र पढ़ते थे और वहां से वह छात्र शिक्षार्थी समाज के लिए जाते थे तो दीक्षांत गुरु के द्वारा दीक्षा दी जाती थी और उस के माध्यम से ही वह समाज में जाकर के समाज सेवा अपनी व्यक्तिगत जीवन की सेवा में लगे लगते थे और समाज को संगठित करने के लिए और भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए संकल्पित होते थे, प्राचीन मानवीय मूल्यों को गुरुकुल परंपरा में जो छात्र पढ़ते थे उन पर स्थापित करते थे इसी परंपरा को संस्कृत भारती आज भी प्रज्वलित किए हुए हैं और जो भी प्रशिक्षणार्थी आवासीय वर्ग में रहते हैं उन्हें शिक्षा दी जाती है उस के माध्यम से यह संकल्प दिया जाता है कि भारत को फिर से प्रकाशित करना है, संस्कृत भाषा को जन भाषा बनाना है, संस्कृत को अधिक से अधिक व्यवहार की भाषा बनाना आदि जैसे मुख्य सिद्धांतों को आश्रय बनाकर शिक्षार्थी समाज में सम्मिलित हों, इसी के लिए शिक्षार्थियों के द्वारा एक दीप जलाया जाता है एक दीप से दूसरा दीप दूसरे दीप से 30 से अधिक इस प्रकार से पूरे भारत के मानचित्र को अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का संकल्प लेते है, इससे यह सिद्ध होता है कि भारत को फिर से विश्व गुरु बनाना है प्रकाशमान बनाना है।
दीक्षांत समारोह में मुख्य रूप से संजय शांडिल्य, दुष्यंत नागदा, यज्ञ आमेटा, देवेंद्र पंड्या, हिमांशु भट्ट, मधुसूदन शर्मा,
दिव्या ढूंढारा, सरिता शर्मा आदि उपस्थित रहे।
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