कला षिक्षा को अधिक रोजगारपरक बनाना आवष्यक - किरण माहेष्वरी

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Published on : 19 Mar, 17 15:03

प्रदेष में विजुअल मीडिया और फिल्म निर्माण की षिक्षा के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए जयपुर में फिल्म मैकिंग का इंस्टीट्यूट शीघ्र शुरु किया जा रहा है। इससे मल्टीमीडिया, एनिमेषन और फिल्म मेकिंग की षिक्षा दी जा सकेगी। उच्च षिक्षा मंत्री श्रीमती किरण माहेष्वरी ने राष्ट्रीय ललित कला अकादमी नई दिल्ली और

कला षिक्षा को अधिक रोजगारपरक बनाना आवष्यक - किरण माहेष्वरी
उदयपुर। प्रदेष में विजुअल मीडिया और फिल्म निर्माण की षिक्षा के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए जयपुर में फिल्म मैकिंग का इंस्टीट्यूट शीघ्र शुरु किया जा रहा है। इससे मल्टीमीडिया, एनिमेषन और फिल्म मेकिंग की षिक्षा दी जा सकेगी। उच्च षिक्षा मंत्री श्रीमती किरण माहेष्वरी ने राष्ट्रीय ललित कला अकादमी नई दिल्ली और मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय महिला चित्रकार कला शिविर में यह बात कही। उन्होंने कलाषिक्षा को और अधिक रोजगारपरक बनाने के लिए मंथन किए जाने की आवष्यकता जताई।
कार्यक्रम की विषिष्ट अतिथि श्रीमती किरण माहेष्वरी ने कहा कि महिला कलाकारांे के लिए परिवार के विभिन्न दायित्वों के बीच भी कला-साधना निरंतर जारी रखना एक मुष्किल कार्य है। महिला कलाकारों को इसे जारी रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि मेरे अंदर भी एक चित्रकार मौजूद है इस षिविर में आकर वह कला जागृत हो गई है। उन्होंने कहा कि जब भी अवसर मिलता है वे कैनवास पर चित्र बनाती है और इससे वे रिलैक्स महसूस करती हैं। उन्होंने वादा किया कि वे कला जगत की अपेक्षाओं को भी पूरा करने का प्रयत्न करेंगी। उन्होंने षिविर के प्रतिभागियों को स्थानीय कलाओं जैसे मिनिएचर, मेवाड़ की लघु चित्र शैली, पिछवाई कला और मौलेला आर्ट और उनके कलाकारों से रुबरु करवाने का सुझाव दिया।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. जे. पी. शर्मा ने कहा कि चित्रकला में राष्ट्र की मनोदषा व्यक्त होती है। स्त्रियों में कलात्मक अभिव्यक्ति के प्रति जन्मजात रुझान होता है। वे जन्म से ही कलाकार होती हैं। कलाकार भावों की अभिव्यक्ति अपने चित्रों के माध्यम से करता है और समाज को संदेष देता है। उदयपुर लोक संस्कृति संगीत और कला की दृष्टि से बहुत वाइब्रंेट शहर है। वरिष्ठ कलाकारों की उपस्थिति से ललितकला के शोधार्थियों को कला का मर्म समझने में सहायक होगी। सत्र को संबोधित करते हुए ललित कला अकादमी नई दिल्ली के प्रषासक श्री सी.एस.कृष्णा शेट्टी ने बताया कि ललितकला अकादमी की स्थापना के बाद से यह पहला अवसर है जब महिला चित्रकारों का कोई षिविर आयोजित किया जा रहा है। इस दृष्टि से उदयपुर और राजस्थान को हमेषा याद किया जाएगा। उन्होंने इस षिविर के आयोजन के लिए मोहनलाल सुखाड़िया विष्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राजस्थान की संस्कृति बहुत कलरफुल है और सबको बहुत आकर्षित करती है। अकादमी के इस षिविर में देष के कोने-कोने से आनेवाले कलाकार विविध संस्कृतियों के प्रतिनिधि भी हैं। इस अर्थ में यह षिविर कला-कर्म के साथ ही महान भारतीय संस्कृति को समझने का अवसर भी उपलब्ध कराता है।
कलाविद और वरिष्ठ चित्रकार प्रो.सुरेष शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि कला कर्म मनुष्य को दिव्यता की ओर ले जाता है। कलाषिक्षा में दीक्षित बालिकाएँ आमतौर पर विवाह के बाद कलाकर्म बंद कर देती हैं। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए और अपनी कलासाधना जारी रखनी चाहिए। उन्होंने लगातार कार्य कर रही वरिष्ठ महिला कलाकारों का नामोल्लेख कर नवोदित महिला कलाकारों को सतत कलाकर्म करने की प्रेरणा दी।
प्रदेष में विजुअल मीडिया और फिल्म निर्माण की षिक्षा के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए जयपुर में फिल्म मैकिंग का इंस्टीट्यूट शीघ्र शुरु किया जा रहा है। इससे मल्टीमीडिया, एनिमेषन और फिल्म मेकिंग की षिक्षा दी जा सकेगी। उच्च षिक्षा मंत्री श्रीमती किरण माहेष्वरी ने राष्ट्रीय ललित कला अकादमी नई दिल्ली और राष्ट्रीय महिला कला उत्सव २०१७ के तहत इस सात दिवसीय शिविर का आयोजन किया जा रहा है। शिविर में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख्याति की २५ महिला चित्रकार ष्षामिल हैं। शिविर में प्रतिदिन कलाकारों के कृतित्व, रचना पक्ष ओर कलामूल्यों पर स्लाइड शो के माध्यम से प्रदर्शन किया जाएगा।
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