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राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्य्क्ष  दिवस कार्यकृम

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12 Aug 20
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राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्य्क्ष  दिवस कार्यकृम

राजकीय सार्वजनिक मण्डल पुस्तकालय, कोटा मे दिनांक 12 अगस्त 2020 को भारतीय पुस्तकालय एवं सुचना विज्ञान के जनक पद्म श्री डा. शियाली रामामृत रंगानाथन जी की 129 वी जन्मदिवस समारोह को राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्य्क्ष  दिवस कार्यकृम के रुप में आयोजन किया गया।  कार्यकृम की शुरुवात मां सरस्वती पूजन के साथ –साथ भारतीय पुस्तकालय एवं सुचना विज्ञान के जनक पदमश्री डा शियाली रामामृत रंगनाथन जी का माल्यार्पण किया गया । इस अवसर पर कोवीड -19 के कारण स्थानीय शहर के कार्यरत पुस्तकालयाध्यक्षों में डा प्रितिमा व्यास पुस्तकालयाध्यक्ष अकलंक महाविधालय , डा. मनीषा मुदगल , योगेंद्र सिंह पुस्तकालयाध्यक्ष ठाकुर करण सिंह मेमोरियल ग्रामीण पुस्तकालय ने शिरकत की ।

इस अवसर पर कोवीड -19 तथा डीजिटल निर्भरता विषय  पर  बोलते हुये डा. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने कहा की – कोरोना की वजह से हमें डीजीटल रिसोर्सेज को एट होम उपलब्ध करवाने की और बढना होगा लेकिन एक बडी चुनोति यह है कि देश का प्रमुख पाठक वर्ग हिंदी या क्षेत्रीय भाषाओं मे अध्यायन करता है लेकिन इन भषाओं मे डीजीटन साहित्य नही के बराबर है इसके लिये भारत सरकार को एक डीजीटल बुक्स को हिंदी सहित क्षेत्रीय भाषाओं मे उपलब्धता बावत निति लानी होग़ी । इस अवसर पर डा प्रभात द्वारा संपादित एवं नव आगत पुस्तक “मीडीया संसार” पर विमर्श भी किया गया  

 ठाकुर करण सिंह मेमोरियल ग्रामीण पुस्तकालय के लाईब्रेरीयन योगेंद्र सिंह ने कहा कि रंगानाथन जी का सपना था कि सार्वजनिक पुस्तकालयों का काफी द्रुत गति से विकास हों गांव –गांव ढाणी - ढाणी तक पुस्तकालय हो तथा उन तक आम आदमी की पहुंच हो । इस अवसर पर डा मनीषा मुदगल ने कहा कि सार्वजनिक पुस्तकालयों का जीवन में बडा ही महत्व हैं क्युंकि यह पुस्तकालय हमें अनवरत शिक्षा एवं अध्ययन से जुडने का मौका देते हें उन्होने बताया की पुस्तकें पढने से आपके दिमाग में सकारात्मक बदलाव आता हैं बच्चो को बचपन में पंचतंत्र की कहानिया इस लिये पढाई जती हे क्युंकि इससे उनमें संस्कार आते हें । अतिथी वक्ता डा प्रितिमा व्यास ने कहा कि आधुनिकता के परिवेश में पुस्तकालयों की दशा में काफी बदलाव आया आज पुस्तकालायध्यक्षों की जिम्मेदारी पुर्व से कहीं ज्यादा बढ गयी हें आज साहित्य विभिन्न प्रकार की पेकेजिंग मे आने लगा हें पाठकों की सुचना आव्श्यक्तायें पुर्व की तुलना में काफी बढ  गयी हें इसलिये पुस्तकालयाध्यक्षों को टेकी सेवी होना पढेगा ।

कार्यक्रम संयोजिका शशि जैन ने कहा कि -  रंगानाथन जी एक ऐसी करिश्माई सख्शियत थे जिन्होने भारतीय पुस्तकालय एवं सुचना विज्ञान की तकनिकी पहलुओ में जबर्दस्त बदलाव पैदा किया उनके द्वारा रचित कोलन लासीफिकेशन सिस्टम के बारे में उन्होने बताया कि – वह एक मात्र ऐसी वर्गीकरण पदति हें जिसका वेज्ञानिक आधार हे जिसकों की विदेशों मे सराहा गया ।

इस अवसर पर अजय सक्सेना , नवनीत शर्मा , नासिर खान , रमेश दत्त , संतोष आदि मौजुद रहे तथा त्रिलोक चन्द उपाध्याय वरिष्ठ पुस्तकालयाध्यक्ष ने आभार जताया 


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