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ओपीनियन पोल पर पाबंदी वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की

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10 Mar 18
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नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने आज वह याचिका विचारार्थ स्वीकार करने से इंकार कर दिया जिसमें मीडिया द्वारा चुनाव अधिसूचना की तारीख से सभी चरणों के चुनाव संपन्न होने तक ओपीनियन पोल के प्रकाशन और प्रसारण को चुनौती दी गई थी। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि कई विशेषज्ञ हैं और किसी स्थिति का विश्लेषण करके उस पर अपनी राय देना व्यक्ति का अधिकार है, फिर चाहे वह कोई घटना हो या फिर चुनाव।

अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायण ने कहा कि बिना नियमन के ओपीनियन पोल आने वाले चुनावों के बारे में झूठा और गलत पूर्वानुमान लगाते हैं जिसका असर मतदाता के व्यवहार पर पड़ता है जिससे संविधान के अनुच्छेद19 (1) (ए) के तहत सूचना प्राप्त करने की आजादी तथा स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों की संकल्पना को नुकसान पहुंचता है। पीठ ने कहा कि कई नियम हैं जो ओपीनियन पोल का नियमन करते हैं।
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