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पीड़ितों को इंसाफ के लिए ही कलम का जोहर दिखाते हैं अब्बासी

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01 Jul 20
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डॉ. प्रभात कुमार सिंघल, कोटा

पीड़ितों को इंसाफ के लिए ही कलम का जोहर दिखाते हैं अब्बासी

पीड़ितों को इंसाफ मिले, मुफ़लिसों  को उनका हक मिले और बेईमान व भ्रस्टाचारियों को सजा मिले, इसी को लेकर कलम चले और सार्थक हो तो पत्रकारिता अपने लक्ष्य में सफल हो जाये। इन्हीं उद्देश्यों को स्वतंत्र पत्रकार के.डी.अब्बासी ने अपनी पत्रकारिता का ध्येय बनाया और लेखनी के जोहर दिखा रहे हैं। हर आम की समस्या,उस पर अत्याचार इनकी पत्रकार आत्मा को झकझोर देता हैं। सहन नहीं कर पाते। अपनी प्रभावी लेखनी से समस्या को इस प्रकार उठाते हैं कि पीड़ित को न्याय मिलता हैं और वह महसूस करता हैं की वाकई क्या पत्रकार ऐसे भी होते हैं। 

     पीड़ितों को न्याय दिलाते-दिलाते ये अपराध पत्रकारिता से ऐसे जुड़े कि आज क्राइम रिपोर्टिंग में इनका कोई सानी नहीं। मजाल क्या छोटी से छोटी घटना भी नज़र से चूक जाएं। हर समय चाक चौबंद, चारों और नज़र। समाचार पत्र भी इनकी खबरों का इनतज़ार करते हैं। कई बार इनकी खबर बड़े समाचार पत्रों का प्रमुख आधार बनती हैं। खबरों के इनके अपने श्रोत हैं, गोपनीय और विश्वसनीय। 

              अपराध रिपोर्टिंग के तो ये जानेमाने नाम हैं ही साथ ही कलेक्ट्रेट पर कोई प्रदर्शन हो ,कोई बैठक हो ,कोई समस्याग्रस्त ज्ञापन का मसला हो  ,रेलवे में कोई अव्यवस्था हो ,पुलिस प्रताड़ना हो ,नाली पटान ,खरंजे की कोई समस्या हो ,प्रेस कॉन्फ्रेंस हो ,जनता की समस्याओं के समाधान से जुड़े सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों ,अधिकारियों की उपेक्षा हो इन सब की त्वरित ,जीवंत ,फोटोग्राफ के साथ लाइव रिपोर्टिंग हर पल हर क्षण प्रसारित करते हैं। कोटा सहित राजस्थान के अनेक अख़बारों और हिंदी समाचार पोर्टल पर इनकी खबरें और रिपोर्टिंग का प्रकाशन लगातार होता हैं। 

           अब्बासी ने सांध्य दैनिक विश्व मेल कोटा से अपनी पत्रकारिता की यात्रा शुरू की और ,अमर नायक, ,भारत की महिमा ,दैनिक जागरण ,दैनिक जननायक ,राष्ट्रिय सहारा ,सहारा टी वी में काम करने के बाद अब स्वतंत्र पत्रकार के रूप में रोज़ पत्रकारिता के माध्यम सेअपनी लेखनी का दम दिखा रहें हैं। ज्वलंत मुद्दों पर रोज़ मर्रा लिखने वाले ज़िंदा, निष्पक्ष  और निर्भीक पत्रकार के रूप में अपनी पहचान बनाई हैं। किसी भी मुद्दे पर लिखते समय इनकी लेखनी तनिक भी विचलित नहीं होती, न किसी दबाव से न प्रलोभन से। इन सब से कोसों दूर निष्पक्ष पत्रकारिता के एक ज्वलंत उद्धाहरण हैं।

       पत्रकार के साथ-साथ अब्बास अपने साथियों के हितों के लिए भी कितने चिंतित हैं इस तथ्य से साफ होता है कि उनके साथ मिलकर उन्हें स्वरोज़गार के लिए प्रेरित भी करते रहे ,अपना वक़्त देकर उन्हें स्थापित करने का सफलतम प्रयास भी करते रहे ,यही वजह है के आज कई साथी लोग इनकी वफादारी ,कुशल प्रबंधन ,मदद से स्वरोज़गार व्यवस्था की दौलत से मालामाल है। ये यारों के यार हैं। पत्रकार कोई भी हो इनके कम्प्यूटर,इनटरनेट,जेरोक्स सुविधाओं के साथ आवभगत के द्वार सदैव खुले रहते हैं। अपनी खुशमिजाजी और दरियादिली के साथ मुस्करा कर सभी को अपना बनाने की बेमिसाल दौलत से मालामाल अब्बासी जी का हर दिल अज़ीज़  व्यक्तित्व बेमिसाल हैं।

   जीवन की व्यतताओं, भागमभाग के बीच सीमित साधनों में अपने परिवार का कुशलता से संचालन करते हुए भी पत्रकारिता के लिए जिस प्रकार का जुनून इनमें देखने को मिलता है वह बिरलों में ही मिलता हैं। किसी भी प्रकार के प्रलोभन से दूर वफ़ादारी ,दयानतदारी ,पत्रकारिता के लिए समर्पण ,मेहनत ,लगन का जज़्बा इनमें कूट -कूट कर भरा है। यह उस दौर के पत्रकार हैं जब 

इंटरनेट नहीं था और कलम के लेखन से पत्रकारिता की जाती थी। कहते हैं साहब क्या दौर था किसी के लिए चार लाइन की लिख दी बस समझो जैसे तूफान आ गया। पत्रकार औऱ सम्पादक पर क्या-क्या दबाव नहीं आते थे। कार्रवाही भी होती थी

आज तो जब कि भृस्टाचार को जैसे अपना लिया है ,मान्यता सी मिल गई हैं, पूरा पेज छाप दो तो भी किसी को परवाह नहीं होती। पर क्या करें हमें तो हमारा कर्म करना हैं।

     आज के दौर में जिन हालातों से पत्रकारिता गुजर रही हैं, उद्योग बन चुकी हैं, ठेके की पत्रकारिता चल पड़ी हैं  ऐसे में निष्पक्ष रहकर पत्रकारिता करना लोहे के चने चबाने जैसा ही कठिन हैं। कितने मिलते हैं आज इन जैसे पत्रकार। अब्बासी जी के जन्म दिन पर यही शुभकामना उपहार हो सकती हैं इनके लिए कि ये सदैव अपने बनाये पथ पर हमेशा निडर हो कर चलते रहें और इनकी पत्रकारिता को और चार चांद लगे।

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