सिटी पेलेस: भरतनाट्यम की मंत्र्मुग्ध प्रस्तुतियों से कला प्रेमी हुए भाव विभोर

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13 Nov 19
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सिटी पेलेस: भरतनाट्यम की मंत्र्मुग्ध प्रस्तुतियों से कला प्रेमी हुए भाव विभोर

 

उदयपुर उदयपुर के सिटी पेलेस स्थित ऐतिहासिक माणक चौक में कार्तिक पूर्णिमा की शाम को महाराणा मेवाड चेरिटेबल फाउण्डेशन, उदयपुर के तत्वावधान में ‘ब्रह्मांजलि’ कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। कोरियोग्राफी (पद्मश्री) गीता चन्द्रन की नाट्य वृक्ष डांस कम्पनी ने कई मनमोहक प्रस्तुतियां प्रदान की।

कार्यक्रम के आरंम्भ में महाराणा मेवाड चेरिटेबल फाउण्डेशन, उदयपुर के अध्यक्ष एवं प्रबंध न्यासी श्रीजी अरविन्द सिंह मेवाड की उपस्थिति में फाउण्डेशन के ट्रस्टी लक्ष्यराज सिंह मेवाड व अपनी पुत्री मोहलक्षिका कुमारी मेवाड के साथ दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

रात 7.30 बजे कार्तिक पूर्णिमा की रोशनी से जब सिटी पेलेस का ऐतिहासिक माणक चौक जगमगाने लगा तब ब्रह्माण्ड के रचेता भगवान ब्रह्मा की स्तुति से ‘ब्रह्मांजलि’ उत्सव का शुभारंभ किया गया।

भगवान ब्रह्मा द्वारा बनाई गई यह सृष्टि, बहुविध आयामों की धनी, एक अद्भुत रचना है। ब्रह्मा के इसी बहुआयामी चमत्कार को ‘अनेकांता’ के माध्यम से (पद्मश्री) गीता चन्द्रन और उनकी नाट्य वृक्ष डांस कम्पनी ने प्रस्तुत किया। गुरु गीता चन्द्रन ने इस प्रस्तुति में सामूहिक नृत्य रचनाओं की संकल्पना लय, दर्शन, संगीत और पौराणिक कथाओं के विभिन्न पहलुओं से प्रेरित होकर की। सभी संरचनाएं भले ही समसामयिक परिपेक्ष्य से संबंध रखती है, लेकिन पारम्परिक भरतनाट्यम शैली और कर्नाटक संगीत में ढाली गई हैं।

कोरियोग्राफी इस बात पर जोर डालती है कि सार्वभौमिक सत्य की कई व्याख्याएं हो सकती हैं। गीता जी और नाट्यवृक्ष की नृत्यांगनाओं ने इस विचार को विभिन्न तरीकों से उजागर किया। उन्होंने विरोधाभास, मतभेद या एकता की व्याख्या नृत्य के गणित, संगीत, ध्वनि व रस के सिद्धान्तों का प्रयोग करते हुए की। इस प्रस्तुति में चार संरचनाएं प्रस्तुत की गई, जो थीं - ‘ब्रह्मसंधि’, ‘वाकवृष्टि’, ‘रसानंद’ और गृहभेद।

गुरु गीता चन्द्रन के सानिध्य में नृत्यांगणा शरण्या चन्द्रन, दिव्या सलुजा, अमृतास्रुती, राधिका, मधुरा एवं सौम्यालक्ष्मी ने कई मनमोहक प्रस्तुतियां प्रदान की। कार्यक्रम के अंत में फाउण्डेशन की ओर से कलाकारों को सरोपाव भेंट कर और उनकी कला को सम्मानित किया।


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