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158 वर्ष बाद क्रान्ति के इस महानायक के गढ़ पर हुआ वन्दे मातरम का उदघोष

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29 Jun 15
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158 वर्ष बाद क्रान्ति के इस महानायक के गढ़ पर हुआ वन्दे मातरम का उदघोष
मितौली-खीरी, प्रथम स्वतंत्रता आन्दोलन के महानायक राजा लोने सिंह की गढ़ी पर स्थानीय मितौलीवासी, शिक्षक व् उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आये हुए प्रशिक्षु शिक्षकों ने अपनी राष्ट्रीय एतिहासिक धरोहर को जानने व् उसे सरंक्षित करने के जज्बे के साथ एक शैक्षणिक भ्रमण व् विशाल जनसभा का आयोजन किया., वन्दे मातरम् के उद्घोष के साथ ही गढ़ी में स्थित गढ़ देवेश्वर महादेव के मंदिर में रुद्राभिषेक हुआ.

कार्यक्रम की अध्यक्षता राजा लोने सिंह विद्यालय के संस्थापक बलबीर सिंह ने की, मुख्य अतिथि कस्ता विधान सभा के विधायक सुनील कुमार लाला व् कार्यक्रम का निर्देशन कृष्ण कुमार मिश्र ने किया.

कार्यक्रम में विधायक सुनील कुमार लाला ने स्थानीय कमेटी बनाकर इस पुरातात्विक महत्त्व के स्थल को सरंक्षित करने की बात कही तथा देश की इस महत्त्व पूर्ण धरोहर को संजोने में अपने हर संभव योगदान देने का आश्वाशन दिया.

बलबीर सिंह ने क्रान्ति के महानायक राजा लोने सिंह के बलिदान की गौरवशाली गाथा से जनमानस को परिचित कराया और साथ ही गढ़ी परिसर में वृक्ष रोपे जाए और उसके लिए ५० ट्री- गार्ड देने की बात कही, इसी सन्दर्भ में मितौली विकास क्षेत्र के प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष होमेश्वर पाण्डेय ने २१ ट्री -गार्ड देने का आश्वासन दिया.

कार्यक्रम के निदेशक कृष्ण कुमार मिश्र-मैनहन ने राजा लोने सिंह की बेगम हज़रात महल के साथ आजादी की लड़ाई के किस्सों से सभी को परिचित कराया और कहा की देश की पुरातात्विक धरोहरों को संजोना हम सभी का संवेधानिक कर्तव्य है.

विधायक सुनील कुमार भार्गव, बलबीर सिंह, कृष्ण कुमार मिश्र, शिव सेवक पाण्डेय, नितिन पाण्डेय, मितौली युवा व्यापार मंडल अध्यक्ष अमित गुप्ता और सभी शिक्षको ने सैकड़ों वर्ष पुराने शिव मंदिर में पूजा अर्चना की, भगवान् शिव को विधायक सुनील कुमार लाला व् कृष्ण कुमार मिश्र ने नारियल चढ़ा कर पूजन किया.




मितौली गढ़ी पर स्थित मजार पर विधायक सुनील कुमार लाला बलबीर सिंह कृष्ण कुमार मिश्र ने चादर चढ़ाई और साम्प्रादायिक सौहार्द की यह मिसाल जहां दो धर्म स्थल मौजूद है उनके विकास की बात कही.

कार्यक्रम में अध्यापक ब्रजकिशोर शुक्ल, रमेश चन्द्र मिश्र, राजेन्द्र कटियार, संतोष भार्गव, प्रशांत पाण्डेय, राजेश पाण्डेय मौजूद रहे, 1857 की क्रान्ति के महानायक की इस ध्वंश गढ़ी पर हजारों लोग एकत्र हुए, सभी ने राजा लोने सिंह की शहादत को याद किया और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजली दी.
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