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भगवान की भक्ति में हमारा विश्वास कमजोर नहीं होना चाहिए

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25 Jul, 18 10:38
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भगवान की भक्ति में हमारा विश्वास कमजोर नहीं होना चाहिए तपोभूमि लालीवाव मठ में प्रतिवर्ष के भांति इस वर्ष भी गुरुपूर्णिमा महामहोत्सव के तहत प.पू. महामण्डलेश्वर श्री हरिओमदासजी महाराज के सानिध्य में चली रही कथा में साध्वी जयमाला दीदी वैष्णव ने बताया की जीवन का हर फैसला भगवान पर छोड़ दो । वह आपकी हर समय रक्षा करेगा । ईश्वर के सामने अपनी इच्छाएं रखो, इन इच्छाओं के लिए समय तय मत करो । जो जीवन में घटेगा उस पर प्रश्न मत खड़े करो, बल्कि प्रभु पर अटूट विश्वास रखो, फिर देखना प्रभु आपको गोद से नहीं उतारेंगे । भक्ति में हमारा विश्वास कमज़्ाोर नहीं होना चाहिए । सुख-दुख, संकट में हमेशा प्रभु को याद करों । बाकी सब प्रभुजी सही करेंगे । यह बात लालीवाव मठ में चल रही पांच दिवसीय नानीबाई रो मायरों कथा में मंगलवार को कही । मनुष्य जीवन में ईश्वर, भक्ति से मोक्ष और सर्वकार्य पूर्ण होने का मार्ग बताया ।
जो जन कल्याण की सोचे वही सच्चा संत है - जयमाला दीदी
वैसे तो संत की प्रवृत्ति कल्याणकारी होती है, लेकिन सच्चा संत वही होता है, जो हमेशा जन कल्याण में लगा रहता है । जीव मात्र के कल्याण की सोचे, वही सच्चा संत होता है ।
कथा में भजनों पर झूमे श्रद्धालु
तपोभूमि लालीवाव मठ में पांच दिवसीय नानी बाई रो मायरा कथा में जयमाला दीदी वैष्णव कथा का वाचन करते हुए कहा कि जिस मनुष्य ने जन्म लेकर भी साधना व प्रभु भक्ति से विद्या, विनम्रता, दान, धर्म और सदाचार जैसे गुणों को नहीं अपनाा । ऐसा मनुष्य पशु की भांति पृथ्वी पर भर है । कथा के दौरान भजन भी सुनाए जिस पर श्रद्धालु नाचने लगे ।
भगवान केवल निष्काम भक्ति को स्वीकार करते है । सकाम भक्ति किसी की मंजूर नहीं होती । भक्त नरसी निष्काम भक्त थे, तभी तो भगवान ने उनकी लाज रखी । नरसीजी ने केवल भक्ति की । उसके पीछे कोई कामना नहीं थी । भगवान तो भक्तों के वश में है । शबरी, मीरा, करमाबाई जैस कई उदाहरण हैं । भगवान को अपने से अधिक अपने भक्तों का गुणगान प्रिय है । इसीलिए हम उनके भक्तों की गाथाएं भी गाते हैं । जयमाला दीदी ने बताया कि भक्त नरसीजी जन्म से गूंगे व बहते थे । बचपन में माता-पिता चल बसे । दादी ने लालन-पालन किया । नरसीजी की भोजाई के रुखे व्यवहार से दादी सदैव चिंतित रहती थी । महाशिवरात्री के दिन साधु के वेश में आए भगवान ने नरसीजी की दादी की मनोकामना पूरी करते हुए नरसीजी को बोलने व सुनने की शक्ति दे दी ।
संचालक डॉ. दीपकजी द्विवेदी ने बताया कि पार्थेश्वर महापूजा एवं रुद्राभिषेक पूजन आचार्य श्री ईच्छाशंकरजी पण्डित, श्री समरत मेहता पण्डित, श्री घनश्यामजी पण्डित टीम के आचार्यत्व में श्री सुखलाल तेली परिवार द्वारा किया गया । लालीवाव मठ शिष्यों ने विधिविधान के साथ पार्थिव शिवलिंग का पूजन किया गया। कथा के पारम्भ में माल्यार्पण, सियारामदासजी महाराज, गोपालसिंह, सुभाष अग्रवाल, सुखलाल तेली, धरमु भाई, राजु भाई, प्रवीण गुप्ता, ईश्वरीदेवी वैष्णव, राणा हलवाई, डॉ. विश्वास आदि लालीवाव मठ भक्तों द्वारा किया गया ।
कथा के बिच में भागवत समिति बाँसवाड़ा द्वारा पीठाधीश्वर लालीवाव मठ महाराज एवं व्यासपीठ पर विराजमान जयमालादीदी का पुष्प माला, भेंट एवं शोल ओढ़ाकर सम्मान किया गया । आज की कथा में भारतमाता के श्री रामस्वरुपजी महाराज का सानिध्य भी प्राप्त हुआ ।
इसके पश्चात् व्यासपीठ एवं पार्थिव शिवजी की ओम जय शिव ओमकारा आरती उतारी गई । उसके पश्चात प्रसाद वितरण किया गया । संचालन डॉ. दीपक द्विवेदी द्वारा किया गया ।
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