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भागवत कथा का समापन

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16 Apr 18
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बारां के निकट बटावदा में स्थित मंषापूर्ण हनुमान जी महाराज के प्राँगण में चल रही संगीमय श्रीमद् भागवत कथा का समापन हवन व भण्डारे के साथ सम्पन्न हुआ।
सातवें दिन कथावाचक पण्डित मुकुट बिहारी शास्त्री ने सुदामा चरित्र को रोचक ढंग से सुनाया जिससे श्रोताओं की आँखों से आँसू झलक पड़े। उन्होंने कहा कि मित्रता में कोई छोटा बड़ा नहीं होता, मित्रता धन, पद से नहीं होती मित्रता तो सच्चे प्रेम, समर्पण भाव की परिकाष्ठा होती है। श्रीकृष्ण अपने मित्र सुदामा के लिए अपनी ठुकराई को भूलकर नंगे पैर दौड़कर सुदामा के चरण धोकर अपने बराबर बिठाकर सच्ची मित्रता का संदेष दिया। शुक्रवार को श्रीकृष्ण-सुदामा की मनोहर झाँकी भी सजायी गई। श्अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो दर पे सुदामा गरीब आ गया हैश् भजन पर श्रृद्वालु झूमकर नाचे जिससे मन्दिर परिसर भक्तिमय हो गया। इस मौके पर हरिपुरा, बटावदी, बम्बूलिया, गजनपुरा, बावड़ीखेड़ा, देवपुरा, अन्ता कस्बे से भी बड़ी संख्या में श्रृद्धालु पहुँचे। कालूलाल मीणा ने सहपत्नी सहित यज्ञ में आहुतियाँ दी व अमन चैन की ईष्वर से प्रार्थना की।
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