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राहत बुलबुले जैसी है भारत की इकॉनामी में सुस्ती : आईंएमएफ

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12 Oct 17
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वाशिंगटन. चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान वास्तव में उसकी अर्थव्यवस्था की दीर्घावधि संभावनाओं में एक अस्थायी व्यवधान की तरह है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईंएमएफ) के एक शीर्ष अधिकारी ने यह बात कही।

नोटबंदी और माल एवं सेवाकर (जीएसटी) की वजह से उत्पन्न हुईं समस्याओं के चलते आईंएमएफ ने अपनी नवीनतम विश्व आर्थिक रपट में भारत की आर्थिक वृद्धि 2017 में 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। यह उसके पूर्व के दो अनुमानों से 0.5ञ् कम है। इस रपट के जारी होने के बाद आईंएमएफ में आर्थिक सलाहकार एवं शोध विभाग के निदेशक मॉरिस ऑब्स्टफेल्ड ने कहा,अर्थव्यवस्था में इस साल आया यह धीमापन वास्तव में उसकी दीर्घावधि सकारात्मक आर्थिक विकास की तस्वीर पर एक छोटे से अस्थायी दाग की तरह है।

एक प्रेसवार्ता के दौरान यहां विभिन्न प्रश्नों के जवाब देते समय ऑब्स्टफेल्ड भारतीय अर्थव्यवस्था के भविष्य को लेकर आस्त नजर आए। उन्होंने कहा,आम तौर पर भारत की अर्थव्यवस्था बेहतर हालत में है। सरकार ने पूरी ऊर्जा के साथ ढांचागत सुधार लागू किए हैं जिनमें जीएसटी शामिल है। इसका दीर्घावधि में लाभ होगा। आईंएमएफ में आर्थिक सलाहकार मॉरिस ऑब्स्टफेल्ड ने कहा कि भारत को व्यापार की बेहतर शर्तो का लाभ मिला है। साथ ही मानसून के सामान्य होने का भी इसे लाभ मिला है क्योंकि इससे कृषि को फायदा मिला है। हालांकि इस वर्ष के लिए दो प्रमुख व्यवधान दिखते हैं। उन्होंने कहा कि इसमें से एक है जीएसटी का लागू किया जाना वह भी विशेषकर जुलाईं और अगस्त के महीने में, जिसके कुछ रकावट पैदा करने वाले प्रभाव देखे गए हैं। आईंएमएफ का मानना है कि यह प्रभाव बीत रहे हैं औरआप देख सकते हैं कि अगले साल के लिए हमारा आर्थिक वृद्धि (भारत की) का अनुमान ऊंचा है, मेरे हिसाब से 7.4 प्रतिशत। उन्होंने कहा कि दूसरी परेशानी है नोटबंदी। इससे अस्थायी तौर पर नकदी की कमी हुईं जो अब खत्म हो गईं है।

अपनी रपट में आईंएमएफ ने भारत की वृद्धि की गति धीमे होने की बात कही है जिसकी अहम वजह देश में नोटबंदी और साल के मध्य में जीएसटी लागू करने से छायी अनिश्चितता है। हालांकि जीएसटी से मध्यम अवधि में 8 प्रतिशत की वृद्धि दर पाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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