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पाँच दिवसीय सतत् पुर्नवास शिक्षा कार्यक्रम का समापन

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18 May 19
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पाँच दिवसीय सतत् पुर्नवास शिक्षा कार्यक्रम का समापन

उदयपुर|  द्विव्यांग व मंदबुद्धि बच्चों के जिस क्षेत्र में शिक्षक अपनी सेवाएं दे रहे हैं वे सराहनीय है वह अपने परिवार को चलाने के लिए आर्थिक साधन मुहैया करवाने के साथ-साथ पुण्य का काम भी कर रहेहैं।दिव्यांगबच्चों कोशिक्षादेनाचुनौतीभराकार्यहै। ऐसेशिक्षकसमाज के लिए प्रेरणा का स्रोतहै विशेषबच्चों के सर्वागीणविकास के लिए यहां अभिभावक अहम भूमिका अदा कररहहै।दिव्यांगोंका ेशिक्षा देने वाल ेशिक्षक अमृत रूपी कलश के समानहैंउक्त विचार शुक्रवारकोकुलपतिप्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने अपने उद्बोधन में कही।अवसर था जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ(डीम्डटूबीविश्वविद्यालय) के संघटकविभाग माणिक्य लाल वर्मा श्रमजीवी सांयकालीनमहाविद्यालय में चलरहीपांचदिवसीयसतत् पुर्नवासशिक्षाकार्यक्रमकेसमापनसमारोहका। अध्यक्षता प्रो. आर. पी. नारनीवाल, रजिस्ट्रार ने कहा की इस सेमिनार से अध्यापकों के ज्ञान में वृद्धि होने सेदिव्यांगों व विशेष जरूरत वालेवर्ग की दूसरोंपरनिर्भररहने की समस्याभी कम होसके।समाज के बदलते परिवेषमें यह जरूरीहैकिहम सभी अपन ेलिय ेकार्य करने की बजाए अपने सामाजिक उत्तरदायित्वोंको समझते हुए जरूरतमंद लोगो की मदद के लिए आग ेआए। विशिश्ठ अतिथि डीप्टी रजिस्ट्रार रियाज हुसैन थे। समन्वयक डॉ. एस. बी. नागर ने पांच दिवसीय सेमिनार में हुई गतिविधियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। धन्यवाद डॉ. संजय शर्मा ने ज्ञापित किया। पांच दिवसीय सेमिनार में विभिन्न राज्यों से आए ३० प्रतिभागियों ने भाग लिया।


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