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जप दिवस पर तेरापंथ भवन में हुआ कार्यक्रम

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12 Sep 18
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जप दिवस पर तेरापंथ भवन में हुआ कार्यक्रम उदयपुर। शासन श्री साध्वी गुणमाला ने कहा कि ध्यान और जप दो ऐसे माध्यम हैं जिनके माध्यम से आत्म उद्धार की दिशा में बढा जा सकता है। जप क्यों किया जाए, यह पहला सवाल होता है। जप के मंत्रों में वह शक्ति होती है जो पारिवारिक- सामाजिक समस्याओं का समाधान करता है।
वे बुधवार को अणुव्रत चौक स्थित तेरापंथ भवन में पर्युषण के छठें दिन जप दिवस पर धर्मसभा को संबोधित कर रही थी। इस अवसर पर धर्मसभा में मौजूद सभी धर्मप्रेमियों ने सामूहिक जप किया।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति निराश-हताश होता है तब उसे आलम्बन की की जरूरत होती है। इंसान के भीतर अहंकार का भूत होता है। जब तक उसे पांच बार कहा नहीं जाए तब तक वह झुकने को तैयार नहीं होता। जहां जीवन है, वहां समस्या है। जिस समस्या से व्यक्ति निजात पा सकता है। जप का महत्व पुरातन ऋषि-मुनियों ने बताया। मंत्र का पुनः पुनः उच्चारण जप है। मंत्र को भावों से परिमित कर दिया जाए तो उसकी शक्ति अपरिसीमित हो जाती है। हालांकि पुस्तकों में हजारों मंत्र हैं लेकिन अगर उनके साथ भाव नहीं जुडे तो उनका कोई अर्थ नहीं है। लयबद्ध शुद्ध उच्चारण के साथ मंत्रों को बोला जाए तो उनका महत्व बढ जाता है।
साध्वी श्री लक्ष्यप्रभा, साध्वी प्रेक्षाप्रभा और साध्वी नव्यप्रभा ने जप दिवस की महत्ता प्रतिपादित करते हुए कहा कि आत्म कल्याण के अनेक मार्गों में एक मार्ग जप का है। जप में शुद्ध उच्चारण का ध्यान रखना चाहिए। जन्म-मरण की परंपरा का नाश ही जप है। शब्दों में इतनी ताकत होती है कि शांति को अशांति में बदल सकती है। शब्दों में ताकत नहीं होती तो महाभारत नहीं होता। आचार्य महाप्रज्ञ ने भी बताया कि अपने शरीर के तापमान को शब्दों के उच्चारण से कम अधिक किया जा सकता है। जप करना है लेकिन एकाग्रता से करें। एक माला फेरनी है उसमें भी इतने विचार मन में आते हैं कि एकाग्र नहीं कर सकते। घर में पूजा कक्ष के अलावा उपासक कक्ष होना चाहिए। उत्तर-पूर्व दिशा उर्जा प्राप्त करने के लिहाज से बेहतर है। जप में स्थान, समय, दिशा और आसन बहुत महत्व रखते हैं। आसन बिछाने का और बैठने का दोनों तरह के होते हैं। बैठने के लिए हम सुखासन, वज्रासन, पद्मासन, अर्द्धपद्मासन श्रेष्ठ हैं। बिना आसन बिछाये ध्यान नहीं करना चाहिए। हम जो उर्जा प्राप्त करते हैं तो बिना आसन के वह उर्जा गुरुत्वाकर्षण के कारण धरती में चली जाती है।
साध्वी श्री ने भगवान महावीर के भवों का भी उल्लेख किया। महिला मंडल की सदस्याओं चन्दा बोहरा आदि ने मंगलाचरण किया। राकेश चपलोत ने गीत प्रस्तुत किया।
सभा के अध्यक्ष सूर्यप्रकाश मेहता ने बताया कि सांयकालीन कार्यक्रमों में भी समाजजन उत्साह से भाग ले रहे हैं।


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