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शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 उदयपुर · 29°C
Sir Padampat Singhania University

एसपीएसयू में भव्य ‘गणेश महोत्सव’

मुख्य बिंदु
  • सर पदमपत सिंघानिया विश्वविद्यालय, उदयपुर ने 7 सितंबर से 11 सितंबर, 2024 तक पांच दिनों की अवधि में बड़ी श्रद्धा और उल्लास के साथ ‘गणेश महोत्सव मनाया।
  • यह उत्सव आनंदमय कार्यक्रमों और उत्साही भागीदारी का एक ताना-बाना था, जो इस अवसर के वास्तविक सार को दर्शाता है।
  • ) पृथ्वी यादव के मार्गदर्शन और समर्थन ने छात्रों को उत्साह और समर्पण के साथ इस कार्यक्रम आयोजित करने के लिए प्रेरित किया।
  • उत्सव की शुरुआत श्री गणेश स्थापना के साथ हुई और इसके बाद कई आकर्षक कार्यक्रम हुए, जिसमें भजन संध्या, कलात्मक रचनात्मकता को प्रदर्शित करने वाली रंगोली प्रतियोगिता और विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधिया सम्मिलित थी।
  • प्रत्येक दिन पूजा अनुष्ठान और अन्य सांस्कृतिक और भक्ति कार्यक्रमो में विद्यार्थिओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखी गई।
  • 11 सितंबर, 2024 को भगवान गणेश की मूर्ति का भव्य विसर्जन पांच दिवसीय उत्सव का एक उपयुक्त और भावनात्मक समापन था।
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एसपीएसयू में भव्य ‘गणेश महोत्सव’

सर पदमपत सिंघानिया विश्वविद्यालय, उदयपुर ने 7 सितंबर से 11 सितंबर, 2024 तक पांच दिनों की अवधि में बड़ी श्रद्धा और उल्लास के साथ ‘गणेश महोत्सव मनाया।

यह उत्सव आनंदमय कार्यक्रमों और उत्साही भागीदारी का एक ताना-बाना था, जो इस अवसर के वास्तविक सार को दर्शाता है। माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) पृथ्वी यादव के मार्गदर्शन और समर्थन ने छात्रों को उत्साह और समर्पण के साथ इस कार्यक्रम आयोजित करने के लिए प्रेरित किया।

उत्सव की शुरुआत श्री गणेश स्थापना के साथ हुई और इसके बाद कई आकर्षक कार्यक्रम हुए, जिसमें भजन संध्या, कलात्मक रचनात्मकता को प्रदर्शित करने वाली रंगोली प्रतियोगिता और विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधिया सम्मिलित थी।

प्रत्येक दिन पूजा अनुष्ठान और अन्य सांस्कृतिक और भक्ति कार्यक्रमो में विद्यार्थिओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखी गई। 11 सितंबर, 2024 को भगवान गणेश की मूर्ति का भव्य विसर्जन पांच दिवसीय उत्सव का एक उपयुक्त और भावनात्मक समापन था।

"गणपति बप्पा मोरया" के जयकारों के बीच, छात्र, शिक्षक और कर्मचारी बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ सम्मिलित हुए । प्रॉक्टर डॉ. दीपक व्यास, डिप्टी डीन छात्र कल्याण, लेफ्टिनेंट डॉ. डी.एस. चौहान और समन्वयक छात्र कल्याण डॉ. अर्चना गजभिये ने कार्यक्रम का समन्वय किया।

यह उत्सव छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की भागीदारी एक जीवंत सामुदायिक भावना को बढ़ावा देते हुए सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।