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आशंका से डरी नेकां

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11 Jul 18
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पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती के बाद अब नेशनल कॉन्फ्रेंस को अपनी पार्टी में टूट का डर सता रहा है। दरअसल, भाजपा-पीडीपी गठबंधन टूटने पर सरकार के गिरने के बाद से पीडीपी नेताओं के लगातार इस प्रकार के बयान आते रहे हैं, जिससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि पीडीपी में विभाजन की स्थिति बन सकती है। इन हालातों के पीछे एक अहम वजह पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद लोन की सक्रियता बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि भाजपा सूबे में फिर से सत्ता का खेल बनाने में लगी है। इसके लिए उसने सज्जाद लोन को एक बड़ा टास्क सौंपा है। राजनीतिक हलकों में यह खबरें तेजी से उड़ रही हैं कि सज्जाद लोन के जरिए भाजपा सूबे के क्षेत्रीय दलों में सेंध लगाने की कोशिश में है। हालांकि इनमें सबसे पहले अंतर्कलह से बेपर्दा हुई पीडीपी के विधायकों से जोड़तोड़ व संपर्क की र्चचाओं ने जोर पकड़ा, लेकिन अब नेशनल कान्फ्रेंस के भीतर भी विधायकों की टूट को लेकर आशंका के बादल मंडरा रहे हैं। संभवत: इसी खतरे के मद्देनजर नेकां के कार्यवाहक अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राज्यपाल एनएन वोहरा से विधानसभा भंग करने की मांग की है। उमर का कहना है कि उक्त तमाम अफवाहों पर तभी रोक लग पाएगी। गौरतलब है कि पीपुल्स कान्फ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद लोन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी बेहद नजदीकी माने जाते हैं। इस बीच, सूबे के राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यदि भाजपा सज्जाद लोन को आगे रखकर किसी रणनीति पर काम कर रही है तो नई सरकार के गठबंधन को लेकर कुछ भी हो सकता है। जहां तक दल विरोधी अधिनियम की बात है तो उसको पूर्ववर्ती नेकां-कांग्रेस गठबंधन सरकार के वक्त सन 2011 में कमजोर कर दिया गया था। उस वक्त भाजपा के 11 एमएलए थे, जिनमें से 7 सदस्यों ने नेकां के विधान परिषद के लिए तय प्रत्याशियों के पक्ष में वोट डाले थे। जब भाजपा की ओर से उन 7 विधायकों के खिलाफ तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष से कार्रवाई की मांग की थी तो अध्यक्ष ने उन 7 भाजपा विधायकों के खिलाफ दल विरोधी अधिनियम के तहत कार्रवाई करने की मांग को खारिज कर एक नई नजीर पेश की थी
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