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“वेद विद्या के अध्ययन-अध्यापन का प्रमुख केन्द्र विरजानन्द-आश्रम-पाणिनि महाविद्यालय, मुरथल-सोनीपत”

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16 Mar 19
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-मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून।

“वेद विद्या के अध्ययन-अध्यापन का प्रमुख केन्द्र विरजानन्द-आश्रम-पाणिनि महाविद्यालय, मुरथल-सोनीपत”

आर्यसमाज की विचारधारा पर आधारित देश में संचालित गुरुकुलों में ‘‘विरजानन्द-आश्रम-पाणिनि महाविद्यालय गुरुकुल, मुरथल-सोनीपत” का अनन्य स्थान है। इसगुरुकुल का पूरा पता है निकट शिवमन्दिर (राजवहा), ग्राम रेवली, पत्रालय ई0सी0 मुरथल, थाना मुरथल, तहसील सोनीपत, जिला सोनीपत, राज्य हरयाणा पिनकोड 131039। गुरुकुल से सम्पर्क के लिये मोबाइल नम्बर 7082111460 एवं 7082111457 हैं। गुरुकुल का ईमेल vedvanee@gmail.com है। गुरुकुल की स्थापना पं. ब्रह्मदत्त जिज्ञासु जी के द्वारा अलीगढ़ के हरदुआगंज में सन् 1921 में हुई थी। पं. ब्रह्मदत्त जिज्ञासु जी आर्ष व्याकरण प्रमुख अधिकारी विद्वानों में से एक हैं जिन्होंने अपना सारा जीवन संस्कृत भाषा एवं साहित्य सहित वैदिक वांग्मय के अध्ययन-अध्यापन व प्रचार-प्रसार में व्यतीत किया। आपने और आपके शिष्यों ने अनेक स्थानों पर अनेक गुरुकुलों की स्थापना की और उनका सफल संचालन किया। यह गुरुकल आज भी चल रहे हैं। आपके सुयोग्य शिष्यों में पं0 युधिष्ठिर मीमांसक, डॉ. आचार्या प्रज्ञादेवी, आचार्य भद्रसेन जी आदि का नाम लिया जा सकता है। पं0 ब्रह्मदत्त जिज्ञासु जी गुरुकुल के संस्थापक आचार्य थे और इसके पूर्व आचार्यों में स्वामी सर्वदानन्द सरस्वती जी, पं, युधिष्ठिर मीमांसक एवं आचार्य विजयपाल जी के नाम सम्मिलित हैं। वर्तमान में वा विगत लम्बे समय से इस गुरुकुल का संचालन रेवली-हरयाणा स्थित रामलाल कपूर टस्ट के अन्तर्गत किया जा रहा है। इससे पूर्व यह गुरुकुल बहालगढ़-हरियाणा में स्थित था। पं. ब्रह्मदत्त जिज्ञासु जी अध्ययन-अध्यापन के क्षेत्र में जो महत्वपूर्ण कार्य कर सके, उसमें उनका रामलाल कपूर ट्रस्ट से अन्तिम समय तक सम्बन्ध बने रहना महत्वपूर्ण हैं। आप इस ट्रस्ट की मासिक पत्रिका वेदवाणी के आद्य सम्पादक भी रहे हैं। यह भी बता दें कि पं. ब्रह्मदत्त जिज्ञासु जी भारत के राष्ट्रपति जी से सम्मानित एक राष्ट्रीय विद्वान के रूप में आदृत हुए थे। वर्तमान समय में गुरुकुल का संचालन रामलाल कपूर ट्रस्ट के द्वारा किया जा रहा है। गुरुकुल आरम्भ से ही गतिशील है और यहां छात्र बिना किसी सरकारी मान्यता प्राप्त उपाधि के शास्त्रीय शिक्षा प्राप्त कर सांगोपांग वेद का अध्ययन कर अपने जीवन को एक उच्च कोटि का वैदिक विद्वान बनाते हैं। यह पुनः बता दें कि यहां शिक्षा की पाठ विधि व प्रणाली वही है जो ऋषि दयानन्द को पूरी तरह से मान्य है अर्थात् गुरुकुल आर्ष शिक्षा प्रणाली का पूर्णतः पोषण यहां किया जाता है। गुरुकुल किसी सरकारी संस्था से न तो सम्बद्ध है, न मान्यता प्राप्त है और न ही सरकार से इसे किसी प्रकार की कोई सुविधा अथवा आर्थिक सहायता प्राप्त होती है।

 

                वर्तमान समय में गुरुकुल में 50 छात्र अध्ययनरत हैं। यह छात्र ज्योतिष, वाक्यपदीय, निरुक्त, उपनिषद्, काशिका, धातुवृत्ति, प्रथामवृत्ति, साहित्य-पंचतन्त्र, हितोपदेश आदि का अध्ययन कर रहे हैं। हमारा यह प्रिय गुरुकुल एक एकड़ भूमि में संचालित है। गुरुकुल में भवनों की दृष्टि से हम यह कह सकते हैं कि यहां 15 भवन वा प्रकोष्ठ हैं। गुरुकुल को संचालित करने वाले रामलाल कपूर ट्रस्ट की ओर से वैदिक वांग्मय का प्रकाशन किया जाता है। ट्रस्ट से उच्च कोटि की एक मासिक पत्रिका ‘‘वेदवाणी” का प्रकाशन भी नियमित रूप से होता है। वर्ष में इस पत्रिका के 12 अंक प्रकाशित किये जाते हैं जिसमें वर्ष में एक विशेषांक भी पाठकों को दिया जाता है। इस पत्रिका की यह विशेषता है कि यह प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह के आरम्भ में ही पाठकों को सुलभ होती है। प्रकाशन तिथि को कभी आगे पीछे नहीं किया जाता। गुरुकुल में शिक्षेणतर गतिविधियों में ग्रन्थों व मासिक पत्रिका के सम्पादन सहित समय-समय पर अनेक नये व पुराने ग्रन्थों का प्रकाशन होता है। यहां के आचार्यगण लेखन कार्य करते रहे हैं और छात्र सम्भाषण सीखते व कुशलता के साथ प्रस्तुत भी करते हैं।

 

                इस गुरुकुल में शिक्षित छात्रों ने यहां अध्ययन कर इसके बाद सरकारी शैक्षिक उपाधियां प्राप्त कर महाविद्यालयों में प्रोफेसर आदि पदों पर नियुक्तियां प्राप्त की हैं। बहुत से छात्र गुरुकुलों का संचालन करते हुए अध्यापन कर रहे हैं। यहां के विद्वान स्नातक छात्र वैदिक धर्म वा आर्यसमाज का प्रचार भी करते हैं। कुछ छात्रों ने आईएएस परीक्षा की तैयारी भी की है और बने भी हैं। यहां के छात्र पुरोहित का कार्य भी सुगमता एवं सफलता से अधिकारपूर्वक करते हैं।   

 

                गुरुकुल जनता के सहयोग से चल रहा है। गुरुकुल को वैदिक धर्म प्रेमी ऐसे समर्थ लोगों की आवश्यकता है जो गुरुकुल में अध्ययनरत निर्धन छात्रों को छात्रवृत्तियां प्रदान कर सकें। सरकार से भी गुरुकुल की अपेक्षा है कि वैदिक वांग्मय के प्रचार व प्रसार के लिये अनुकूल वातावरण मिलना चाहिये। वर्तमान में आचार्य प्रदीप कुमार शास्त्री इस गुरुकुल के आचार्य हैं। स्वामी वेदानन्द सरस्वती जी पाणिनी महाविद्यालय प्रबन्ध समिति के प्रधान एवं श्री सनत् कपूर जी सचिव हैं। श्री रमेश कपूर जी महाविद्यालय के कोषाध्यक्ष हैं।

 

                इस गुरुकुल का अतीत स्वर्णिम है। वर्तमान एवं भविष्य भी स्वर्णिम प्रतीत होते हैं। हम गुरुकुल को अपनी शुभकामनायें देते हैं। ओ३म् शम्।

-मनमोहन कुमार आर्य

पताः 196 चुक्खूवाला-2

देहरादून-248001

फोनः09412985121


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