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खत्री की काव्य कृति सुगंध हुई प्रकाशित

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13 Mar 22
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खत्री की काव्य कृति सुगंध हुई प्रकाशित

जैसलमेर  : राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर द्वारा चयनित तथा लोक कला विद, साहित्यकार लक्ष्मीनारायण खत्री द्वारा रचित काव्य कृति सुगंध प्रकाशित हो गई है।
कृति के रचयिता लक्ष्मीनारायण खत्री ने बताया कि 96 पेज की काव्य कृति में कुल विविध विषयों की 79 कविताओं को पेश किया गया है। जिसमें लोक जनजीवन, संस्कृति, अध्यात्म, प्रेम इत्यादि विषय की स्वयचित कविताएं पेश की है। इस साहित्यिक पुस्तक की भूमिका वरिष्ठ आई.ए.एस दार्शनिक विचारक तथा कवि कृष्णा कांत पाठक ने लिखी है। उल्लेखनीय है राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर द्वारा पांडुलिपि प्रकाशन के तहत ₹15000 इस कृति को प्रदान किए गए हैं।

प्रकाशित हुई काव्य कृति सुगंध के रचयिता लक्ष्मीनारायण खत्री ने बताया कि मेरी कविता में लोक जनजीवन, मरु इतिहास, विरासत, पर्यटन, धरोहर की अनुपम सौंदर्य का श्रंगार है। खत्री ने बताया कि कविता विरासत को अमर रहने दो, शिल्प साधना, खंडहर, कशीदाकारी की अभिलाषा की शांति, कालबेलिया, आखातीज का त्योहार, गोरी आओ मेरे गांव, बकरे की बलि, मांगणियार आदि यहां की संस्कृतिक संपदा का मेरे शब्दों में प्रस्तुतीकरण है। इसी प्रकार प्रकृति एवं पर्यावरण को सजीव सरंक्षण का संदेश देती हुई मेरी कविता पृथ्वी की उपेक्षा, सांसों में जहर, शहर का मजबूर आदि प्रेरणादाई है।
खत्री ने बताया कि इसी प्रकार रोटी का मोल, श्मशान में जश्न, मौत, दरिद्रता का डेरा, भर जाए पेट, मानव कर्ज का ढोर, मजदूर का उपकार कविताएं समाज की दशा का चित्र है और कृति की पहली कविता जिंदगी और पहिया में तेज गति सड़क पर चलती जिंदगी का वर्णन है दुर्घटना से मौत और उससे बचने का संदेश इसमें है। मेरे जीवन में रिश्तो की मिठास का वर्णन बेटियां, मेरे दादा, मेरी मां की महिमा, पिता, बुढ़ापा, जवानी, परिवार का सुख, कविताओं में है खत्री ने बताया कि मेरी कविताओं में लोक शिक्षक, दादी का घर, उड़ान, जिंदगी में हंसना, जीवन की चढ़ाई, रहो तैयार, जीत जाए जंग, मेरा आत्मबल तथा युवाओं को आत्मविश्वास से आगे बढ़ने का आह्वान है। खत्री ने अपनी कविताओं के बारे में चर्चा करते हुए और बताया कि इस काव्य कृति के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों तथा विसंगतियों जैसे जाति की व्यथा, मदिरा का अंधेरा, सती की व्यथा, नशे से नाश, बकरे की बलि आदि पर प्रहार भी किया गया है।
खत्री ने बताया की उनकी कविताएं साधारण हिंदी की सरल बोलचाल की भाषा में है।
इस चर्चित काव्य कृति सुगंध की भूमिका राजस्थान के सुप्रसिद्ध आई.ए.एस दार्शनिक विचारक तथा कवि श्री कृष्णा कांत पाठक ने लिखा हैं।
श्री पाठक ने लिखा है कि लक्ष्मीनारायण खत्री की कविताएं समकालीन संसार की साहित्यिक संवेदना से भरी हैं उनकी कविताओं में वंचित उपेक्षित निराश्रित वर्ग के लिए सहज करुणा है। उनमें देश की सुरक्षा, समाज की जिम्मेदारी, करुणा की विभीषिका, स्त्री पर हिंसा, व्यक्ति की संकट पर दशा दिशा आदि सब पर प्रचुर लेखन किया गया है।


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