कोटा सम्भाग में बाढ़ के हालात लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लोगो के हाल जाने

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16 Aug 19
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के डी अब्बासी

कोटा सम्भाग में बाढ़ के हालात लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लोगो के हाल जाने

कोटा |  हाड़ौती में लगातार भारी बारिश से बाढ़ के हालात बन गए हैं। चारों जिलों की सभी बड़ी नदियां जबरदस्त उफान पर होने से प्रमुख मार्ग बंद हो गए हैं। वहीं, निचले इलाकों में पानी भर गया है। कोटा में 24 घंटे में 6 इंच बारिश दर्ज की गई है। कैथून में बाढ़ से हालात बिगड़ गए हैं। घरों में 4 से 5 फीट पानी भर गया है। कोटा में पुलिया पार करते समय एक मासूम बच्चा और उसकी माँ पानी में बह गए जिनका आज भी कोई सुराग नही लगा है। सड़कें दरिया बन गई। हालातों को देखते हुए जिला कलक्टर ने सेना से मदद मांगी है। वहीं, एनडीआरएफ टीम राहत कार्य में जुटी हुई है। मौसम विभाग ने आगामी दो दिन यानी 17 अगस्त तक रेड अलर्ट जारी किया है। बारां, बूंदी, झालावाड़ और कोटा के ग्रामीण अंचल में कई बस्तियां जलमग्न हो गई। बाढ़ की खबर सुनकर कोटा बूंदी के सांसद और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सारे प्रोग्राम को छोड़कर बाढ़ पीडितो से मिलने के लिए कैथून पहुंचे और वंहा के हालात जाने  जन जीवन का सामन्य बनाने और उनके खाने की व्यवस्था की लिए लंगर की व्यवस्था कराई।

 

जिला प्रशासन ने कैथून व आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ के हालात देखते हुए आज से दो दिन सभी विद्यालयों में अवकाश की घोषणा की है। प्रशासन ने संस्था प्रधानों को निर्देश दिए हैें कि वे स्थिति देखते हुए अपने स्तर पर स्कूलों में अवकाश घोषित कर सकते हैं ताकि किसी भी तरह की विपरीत परिस्थितियां उत्पन्न न हो सके।

 

रानपुर स्थित तालाब पांच साल में पहल बार लबालब हुआ है। जोरदार बारिश की आवक होने से तालाब पर चादर चलने लगी है। प्रशासन द्वारा शहर में सभी निचले इलाकों के रहने वालों को सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी जा रही है।

 

भारी बारिश से कोटा-झालावाड़, कोटा-सांगोद, बारां-झालावाड़, बपावर-झालावाड़, सिमलिया-देवली (सांगोद) मार्ग बंद हो गए हैं। यहां प्रमुख नदिया उफान पर होने से जिला मुख्यालय से सम्पर्क कट गया है। वहीं, कोटा-बारां फोरलेन और कोटा-जयपुर फोरलेन हाइवे ही हैं चालू हैं।

 

संभाग में मंगलवार देर रात 12.35 बजे से झमाझम बारिश शुरू हुई जो तड़के 4 बजे तक जारी रही। इसके बाद बुधवार सुबह 6 बजे फिर से झमाझम बारिश का शुरू हुई जो गुरुवार सुबह 10 बजे तक लगातार जारी रही। आज भी बारिश जारी है। कोटा में तकरीबन 29 घंटे में करीब 8.30 इंच बारिश दर्ज की गई। बुधवार शाम तक कोटा बैराज के 13 गेट पांच फीट ऊपर तक खोले गए। वहीं, गुरुवार सुबह 10 बजे तक 4 गेट खोलकर 24 हजार क्यूसेक पानी की निकासी की गई। इसके बाद दोपहर 2 बजे फिर से 10 गेट खोलकर 60 हजार 600 क्यूसेक पानी की निकासी की गई। आज कोटा बेराज के 16 गेट खोल रखे है। इससे चंबल नदी उफन गई। जवाहर सागर बांध में से 49 हजार 164 क्यूसेक पानी की निकासी की गई। इसके अलावा मशीनों से 11 हजार 124 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज किया गया। लगातार भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। कई कॉलोनियां जलमग्न हो गई। लोग घरों में कैद हो गए। जगह-जगह रेस्क्यू टीम पानी में फंसे लोगों को निकालने के लिए दौड़ती नजर आ रही है। हाड़ौती में कई मार्ग बंध हो गए। भारी बारिश को देखते हुए मौसम विभाग 15 अगस्त तक रेड अलर्ट जारी कर दिया है।

 

लगातार बारिश होने से बूंदी शहर पानी-पानी हो गया। जैतसागर में पानी की आवक होने से 4 गेट चार खोले गए हैं। वहीं, नवल सागर के भी चार गेट दस-दस इंच खोलकर पानी की निकासी की जा रही है। गुढ़ा बांध के लबालब हो गया। मेज नदी में उफान आ गई। भंडेड़ा क्षेत्र के कालानला-बांसी मार्ग पर मेज नदी की पुलिया से गुजरते समय एक राहगीर की मोटरसाइकिल बह गई। घोड़ा पछाड़ नदी में जोरदार उफान आने से बरुन्धन कस्बा टापू बना हुआ है। लोगों का आवागमन बंद पड़ा है

कालीसिंध बांध के खुले गेट 

झालावाड़ जिले में दो दिन से जोरदार बारिश हो रही है। जोरदार बारिश के चलते छोटी कालीसिंध नदी उफान पर आ गई। चंवली बांध 354 मीटर के लेवल पर आ गया है। वहीं कालीसिंध बांध फुल होने पर चार गेट खोलकर 32 हजार 712 क्यूसेक पानी की निकासी की गई। जिले गागरोन, कालीखार, भीमली, रेवा, मोगरा, विनायका बांध फुल हो चुके हैं। रुपाली नदी खानपुर कस्बे से होकर बहने लगी है। बाजारों में 4 फीट पानी भरा हुआ है। निचली बस्तियां जलमग्न हो गई है।

बारां के यह इलाके जलमग्न

बारां शहर में प्रताप चौक, अस्पताल रोड, कृष्णा कॉलोनी, सदर बाजार, इंद्रा मार्केट, विक्रम चौक सहित दो दर्जन कॉलोनियों में ढाई फीट पानी भरा हुआ है। ग्रामीण अंचल के कई इलाकों में बाढ़ के हालात बने हुए हैं। कोयला में खैरखडी नदी उफान पर एक दर्जन गावो का संपर्क कटा हुआ है। केलवाड़ा में भैसासुर नदी एवं बाणगंगा व खिरिया नदी उफान पर है। लोग घरों में कैद हो गए। दर्जनों गांवों का सम्पर्क कट गया है। बारां के ल्हासी डेम के दो गेट खोले गए हैं। छबड़ा में बाढ़ के हालात बन गए हैं।


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