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सी ए जी के आई सी ई डी में अनिल मेहता का उद्बोधन

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29 Aug 19
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सी ए जी के आई सी ई डी में अनिल मेहता का उद्बोधन

 जयपुर| झील तालाब व नदी  संरक्षण योजनाओं की ऑडिट में यह भी जाँचा जाना चाहिए कि वास्तविक  जनसहभागिता सुनिश्चित हुई या नही। झीलों तालाबों के जलग्रहण क्षेत्र, जल आवक के नालों , पेटें व बांध की सुरक्षा ,  भूजल दोहन पर नियंत्रण तथा प्रदूषण निवारण के लिए समन्वित प्रयास जरूरी है। 

यह विचार झील संरक्षण समिति के सहसचिव , विद्या भवन पोलीटेक्निक प्राचार्य डॉ अनिल मेहता ने इंटरनेशनल सेंटर फॉर एनवायरनमेंट ऑडिट एन्ड सस्टेनेबल डवलपमेन्ट  ( आई सी ई डी ) में व्यक्त किये।  

सी ए जी ऑफ इंडिया के  तमिलनाडु, आसाम, बिहार, आंध्र प्रदेश,   मणिपुर, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश , बिहार इत्यादि राज्यो के डिप्टी अकाउंटेंट जनरल व अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को झील तालाब नदी के विविध पर्यावरणीय पहलुओं से अवगत कराते हुए मेहता ने पानी मे नए प्रकार के विषैले प्रदूषकों की जानकारी दी। 

मेहता ने कहा कि पानी मे एंटीबायोटिक दवाइयों व अन्य घरेलू रसायनों जो साबुन, शेम्पू, डीओ इत्यादि  में होते है उनकी अत्यधिक उपस्थिति है जिससे इंसानों की प्रतिरोधक क्षमता पर विपरीत असर पड़ रहा है। तथा कई गंभीर बीमारियां हो रही है। पर्यावरणीय ऑडिट में ये जांच जाना चाहिए कि प्रदूषण निवारण योजना से ऐसे प्रदूषक दूर हुए या नही।

मेहता ने कहा कि रियासतकालीन बांधो की सुरक्षा पर किसी का ध्यान नही है। इनकी मजबूती को जांचना जरूरी है। साथ ही अधिकतम भराव तल तक झील सीमाओं को संरक्षित रखना चाहिए।

मेहता ने सतही व भूजल के प्रबंधन में उदयपुर व हिंता गांव में चल रहे सहभागी प्रयासों की भी जानकारी रखी


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