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लॉयन्स क्लब कोटा टेक्नो की पहल ’’जीवनदाता...मुहिम जिंदगी की‘‘ की मदद का बढता कारवां

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16 Mar 20
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लॉयन्स क्लब कोटा टेक्नो की पहल ’’जीवनदाता...मुहिम जिंदगी की‘‘ की मदद का बढता कारवां

सिंगल डोनर प्लेटलेट ;SDP  प्रक्रिया द्वारा Platelet donate करने में लगभग डेढ घण्टे का समय लग जाता है। इस प्रक्रिया में कुछ निश्चित मापदण्ड पूरे करने वाले डोनर ही योग्य होते है। तीन माह में रक्तदान (Blood donation) नही किया हुआ होना और हाथ में वेन ;नसद्ध की एक निश्चित मोटाई का होना Donor के योग्य होने के लिए आवश्यक है। यही कारण है कि शहर में ज्ञात रक्तदाताओं से तुलनात्मक SDP donors की संख्या काफी कम है। हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में व्यस्त होता है, किंतु किसी रोगी के दर्द को कम करने और उसकी जिंदगी को बचाने से बढकर कोई कार्य महत्वपूर्ण नही है। ऐसी सोच और विचार लिए Team जीवनदाता के युवा वक्त-बेवक्त SDP Donate करने के लिए सबकुछ छोडकर दौड पडते है।

बिटिया के वैवाहिक संबंध की चल रही थी महत्वपूर्ण बैठक

टीम जीवनदाता के संयोजक व लॉयन्स क्लब कोटा टेक्नो के अध्यक्ष भुवनेश गुप्ता के अनुसार शनिवार को भी ऐसा ही वाकया हुआ। टीम में वर्षो से अपनी सेवाऐ दे रहे वरिष्ठ साथी ए पॉजीटिव वर्धमान जैन की बिटिया स्वाति जैन के वैवाहिक संबंध की चर्चा चल रही थी। बिटिया स्वाति को विवाह हेतु देखने के लिए कोटा का ही एक परिवार उनके घर आया हुआ था। इसी दौरान बिटिया के विवाह संबंधित पारिवारिक चर्चा जोरो पर ही थी कि ए पॉजीटिव एसडीपी के लिए टीम के सूर्यप्रकाश शर्मा, नितिन मेहता व भुवनेश गुप्ता ने अत्यंत आपातकालीन स्थिति में SDP की व्यवस्था हेतु वर्धमान जैन से अनुरोध किया।

ब्लड बैंक पहुंचे डोनर रहे अनफिट

      गुप्ता बताते है कि शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती ६१ वर्षीय भैरूलाल फेफडे के कैंसर से जूझ रहे थे। पुत्र निखिल से हुई बातचीत के अनुसार उनकी प्लेटलेट्स घटकर दस हजार से भी कम रह गई थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसडीपी की व्यवस्था एक नवजीवन के रूप में अतिआवश्यक हो रही थी। गुप्ता ने वर्धमान को इस स्थिति से अवगत करा दिया। कुछ A positive donor इस दौरान Blood bank आए, किंतु उनकी वेन एसडीपी मापदण्ड के अनुरूप फिट नही पाई गई।

समधि को समझा दौडे वर्धमान जैन

      वर्धमान जैन ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए मानवीय रूख अपनाया। उन्होने अपने समधि को रोगी की नाजुक स्थिति का हवाला देकर वैवाहिक चर्चा को बीच में छोडकर तुरंत ब्लड बैंक आकर एसडीपी डोनेट कर दी। इस दौरान टीम के सूर्यप्रकाश शर्मा, मनोज जैन, कुलदीप सिंह, चंदन शर्मा, भुवनेश गुप्ता पहले से ही मौजूद रहकर संयोजन कर रह थे। टीम सदस्यो ने मिलकर एसडीपी का कार्य पूर्ण करने में सहयोग किया और देर शाम को पुत्र निखिल से हुई बातचीत में पता लगा कि उनकी प्लेटलेट बढकर अस्सी हजार हो गई है। उन्होने टीम जीवनदाता के वर्धमान जैन व उनके साथियो के प्रति कृतज्ञता जाहिर की।

     

 


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