संस्कृत भारती ने संस्कृत को विश्व मे एक नई पहचान दी है- गोपबन्धु मिश्र।

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24 Aug 20
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संस्कृत भारती ने संस्कृत को विश्व मे एक नई पहचान दी है- गोपबन्धु मिश्र।


संस्कृत के स्वर्णिम युग की शुरुआत- गोपाबंधु।
संस्कृति व संस्कारों की जननी है संस्कृत - हस्तीमल ।
व्यक्ति के सर्वांगीण विकास का साधन है संस्कृत -हस्तीमल।
भारत की क्षमता का मुख्य आधार है संस्कृत- हस्तीमल।

     संस्कृत संभाषण वर्गों का समापन समारोह ऑनलाइन किया गया।23 अगस्त 2020 रविवार को ऋषि पंचमी के शुभ अवसर पर संस्कृतभारती चित्तौड़ प्रांत द्वारा 12 अगस्त से 23 अगस्त 2020 तक आयोजित तीन संस्कृत संभाषण वर्गों का समापन समारोह ऑनलाइन किया गया।
समारोह के अतिथि संस्कृत भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय, गुजरात के कुलपति श्री गोपबंधु मिश्र तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय पदाधिकारी माननीय हस्तीमल जी रहे । अध्यक्षता प्रांत संगठन मंत्री देवेंद्र पंड्या ने की।
महानगर प्रचार प्रमुख रेखा सिसोदिया ने बताया कि समारोह के प्रारम्भ में दीप प्रज्वलन के साथ कोटा महिला प्रमुखा निहारिका बच्चन ने ध्येय मन्त्र से कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। 
इस अवसर पर अतिथि संस्कृतभारती के अ.भा. अध्यक्ष व कुलपति श्री गोपाबंधु मिश्र ने संस्कृतभारती के अथक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संस्कृत भारती ने संस्कृत को एक नई पहचान दी है , उन्होंने कहा कि संस्कृत सेवा के ईश्वरीय कार्य मे लगे कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम से आज संस्कृत आम बोलचाल की भाषा बनती हुई दिखाई देती है, जिस भाषा को कभी डेड लैंग्वेज कहा जाता था उसको पढ़ने के लिए ऑनलाइन वर्गों में उमड़ती हुई भीड़  इस बात का संकेत है कि आज  संस्कृत के स्वर्णिम युग की शुरुआत हो चुकी है, अब हमें अपनी पूरी शक्ति के साथ इस कार्य को और गति देनी होगी यही हमारे संकल्पित साधना का प्रकटीकरण होगा।
अतिथि आरएसएस के अखिल भारतीय आमंत्रित सदस्य हस्तिमल जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्कृत भाषा सभी भाषाओं व संस्कारों की जननी है, उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा के सीखने से  व्यक्ति का सर्वांगीड़ विकास होता है तथा संस्कृत को ज्ञान का पुंज बताते हुए कहां की संस्कृत जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उपयोगी व पोषक साबित होती है साथ ही उन्होंने कहा कि आज संपूर्ण विश्व में भारत की चर्चा हो रही है इस कोरोना महामारी के दौर में विश्व भारत की ओर देख रहा है तो भारत की क्षमता का मुख्य आधार उसकी संस्कृति एवं संस्कृत में छिपे ज्ञान के भंडार ही है।
उन्होंने सभी वर्गार्थियो से संस्कृत सीखने के उपरांत रोजमर्रा में संस्कृत के सरल लघु वाक्य बोलते रहने हेतु आग्रह किया तथा संस्कृत के संवर्धन में अपनी अहम भूमिका निभाने हेतु सभी को प्रेरित किया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में संगठन मंत्री देवेंद्र पंड्या ने सभी वर्ग 8 क्यों से निरंतर संस्कृत के क्षेत्र से जुड़े रहने एवं नियमित संस्कृत को बोलचाल की भाषा बनाने का संकल्प दिलाने के साथ-साथ संस्कृत भारती का परिचय प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का संचालन संस्कृत में प्रांत शिक्षण प्रमुख मधुसूदन शर्मा द्वारा किया गया।
  इस अवसर पर बूंदी की संगीता राठौर द्वारा अतिथि परिचय कराया गया तथा बारां जिला शिक्षण प्रमुख मीठालाल ने वर्ग प्रतिवेदन करए हुए कहा कि तीनों वर्गों का उद्घाटन 12 अगस्त 2020 कृष्णजन्माष्टमी को किया गया। महिलओं के लिए मध्याह्न 12.00 से 1.30 तेजस्विनी वर्ग में 72 छात्र, सायं 4.00 से 5.30 तक कुटुम्ब वर्ग में 43 छात्र, कृष्णजन्माष्टमी को संस्कृत संगीत संन्ध्या के साथ रात्रि 8.00 से 9.30 तक सम्भाषणवर्ग में 177 वर्गार्थी के साथ कुल मिलाकर 327 वर्गार्थियो ने संस्कृत सम्भाषण सीखा। वर्गों में राजस्थान के साथ साथ उत्तरप्रदेश, दिल्ली आदि से भी वर्गार्थी उपस्थित थे । वर्गों मे 10 शिक्षकों के गण ने  ऑनलाइन शिक्षण कराया।
महानगर संपर्क प्रमुख हिमांशु भट्ट ने बताया कि इस अवसर पर संभाषण वर्ग के छात्रों द्वारा अपने अनुभव प्रस्तुत किए गए जिसके अंतर्गत उदयपुर से तेजस्विनी वर्ग की  डॉक्टर भूमिका राठौड़, ऋतु व अनुसूया सुमन तथा सम्भाषण वर्ग में  आगरा से विकास सारस्वत व उदयपुर के पीयूष दशोरा एवं कुटुंब वर्ग में उदयपुर से मंगल कुमार जैन व पाखी जैन द्वारा संस्कृत में संवाद प्रस्तुत किया गया।
 इस अवसर पर बूंदी से सरिता राठौर ने "अवनीतलम पुनरवतीर्णास्यात" एकल गीत प्रस्तुत किया।
धन्यवाद बारां जिला शिक्षण प्रमुख पीयूष गुप्ता ने व्यक्त किया। अंत में अजमेर की गरिमा मौर्य ने कल्याणमन्त्र कर समापन किया।
इस अवसर पर उदयपुर से प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. यज्ञ आमेटा, विभाग संयोजक दुष्यंत नागदा, जिला संयोजक संजय शांडिल्य, सहसंयोजक चेंन शंकर दशोरा, महानगर संयोजक नरेंद्र शर्मा, महानगर प्रचार प्रमुख रेखा सिसोदिया, संपर्क प्रमुख डॉ. हिमांशु भट्ट, पत्राचार प्रमुख मंगल जैन, शिक्षण प्रमुख डॉ. रेनू पालीवाल, दुष्यंत कुमावत आदि उपस्थित रहे।


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