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संस्कृति,रीति-रिवाज, खान-पान, गीत-संगीत से परिचित होंगे विदेशी पर्यटक

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07 Feb 19
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संस्कृति,रीति-रिवाज, खान-पान, गीत-संगीत से  परिचित होंगे विदेशी पर्यटक

चित्तौडगढ,   भारतीय ग्रामीण जीवन, संस्कृति, आस्था, रीति-रिवाज, खान-पान, गीत-संगीत, हस्तशिल्प, लोककला, हुनर आदि से विदेशी पर्यटकों को परिचित कराने के लिए चित्तौडगढ फोर्ट फेस्टिवल के तहत विलेज सफारी एवं मान मनुहार का एक विशिष्ट आयोजन निकटवर्ती बस्सी गाँव में १२ फरवरी को किया जायेगा।

जिला कलक्टर श्रीमती शिवांगी स्वर्णकार एवं विलेज सफारी के प्रभारी अधिकारी तथा जिला परिषद् के सीईओ अंकित कुमार सिंह के निर्देशन में ग्रामीण जीवन के विविध पक्षों की प्रभावशाली एवं मनोहर प्रस्तुतियां आयोजन स्थल पर विदेशी पर्यटकों के लिए आयोजित की जायेगी। विलेज सफारी के सहायक प्रभारी व चित्तौडगढ के विकास अधिकारी धनसिंह राठौर ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि विदेशी पर्यटकों को  चित्तौडगढ से वाहन द्वारा बस्सी पहुँचाया जायेगा। बस्सी में निर्धारित स्थल से सजी-धजी बैलगाडयों एवं ऊँटगाडयों में सवार होकर ये पर्यटक लक्ष्मीनाथ मंदिर कुंण्ड एवं तालाब परिसर तक पहुँचेंगे। बैल एवं ऊँटगाडी में सवारी के दौरान मार्ग में पर्यटकों का पुष्पवर्षा से स्वागत किया जायेगा, साथ ही मार्ग में पडने वाले घरों के बाहर सुंदर मांडने भी बनाए जायेंगे।

तालाब के घाट पर पर्यटकों को सरोवर पूजन की परम्परा एवं कुंए से बालटी-रस्सी के सहारे पानी निकालने की ग्रामीण जीवनचर्या का परिचय दिया जायेगा। मंदिर प्रांगण में उगे वटवृक्ष के विशाल तने पर लटके झुंलों के सहारे पर्यटक झुलने का आनंद भी उठाएंगे। परिसर के विभिन्न मंदिरों को फुलों एवं रोशनी के सहारे आकर्षक ढंग से सजाया जायेगा। पशुधन के ग्रामीण जीवन में महत्व को बताने के लिए अस्थाई गौशाला  भी पर्यटकों को दिखाई जायेगी। पलाश के पत्तों से पत्तल दौने बनाने की व्यावहारिक गतिविधि का परिचय देते हुए भोजन के दौरान इनका ही इस्तेमाल किया जायेगा। कुंण्ड में स्थित गोकडें पर झुला लगाकर दैनिक जीवन में उपयोग आने वाले गद्दा-तकिया आदि का प्रदर्शन किया जायेगा। परिसर के मुख्य स्थलों पर शहनाई एवं नगाडा बजाने वाले वादक मधुर स्वरलहरियां बिखेरेंगे। लक्ष्मीनाथ मंदिर की ऊपरी मंजिल पर तेजाजी के भजन गाने वाले गायक अपनी प्रस्तुतियां देंगे। परिसर में ग्रामीण जीवन में छाछ एवं मक्खन तैयार करने के उपकरण का प्रायोगिक प्रदर्शन किया जायेगा। पर्यटकों को चाय, पानी-पतासा, चना जोर गरम जैसी स्वादिष्ट खाद्य वस्तुएं भी उपलब्ध होगी।

राजस्थानी व्यंजन परोसेंगे

विदेशी पर्यटकों को राजस्थान के खान-पान एवं परम्परा से रूबरू कराने के लिए उन्हें बाजोट पर थाली रखकर भोजन कराया जायेगा। भोजन में उन्हें बाजरे, मक्की, गेहुं की रोटी, मक्की की पपडी, बाटी, ढोकला, राब परोसी जायेगी। मोगरी, टमाटर की सब्जी, उडद की दाल, कडी-पकौडा, केर सांगरी के स्वाद से भी पर्यटकों को परिचित कराया जायेगा। पर्यटक लाल एवं लहसुन की चटनी, अचार, छाछ, मलाई, पकौडी, पापड, बाजरे का खिंचडा एवं गुड भी चखेंगे। जलेबी, गुलाबजामुन, बुंदी के लड्डु जैसी ग्रामीण मिठाईयों का लुप्त भी मेहमान उठाएंगे।

हस्तशिल्प से कराएंगे परिचित

आयोजन स्थल पर तैयार की जा रही रंगबिरंगी जुट एवं लकडी की टपरियों में अस्थाई बाजार सजेगा। बाजार के जरिए ग्रामीण क्षेत्र के हस्तशिल्प एवं हुंनर की जानकारी दी जायेगी। इन हस्तशिल्पों में कुम्हार का चांक, वन विभाग की हर्बल सामग्री बनाने की स्टॉल, लाख की चुडी बनाने वाला कारीगर, हाथ से कसिदा कार्य करने का प्रदर्शन, बीडी बनाने की स्टॉल, आकोला प्रिंट बैग बनाने का कार्य, मेहन्दी लगाने की कलाकारी, राजीविका के कास्मेटिक का प्रदर्शन होगा। इसके साथ ही बस्सी की पहचान लकडी के कावड, खिलौने और गणगौर बनाने की तीन दुकानें भी विदेशी पर्यटकों के लिए सजेगी। गौरतलब है कि बस्सी के कलाकार राष्ट्रपति पुरस्कार से भी सम्मानित हो चुके हैं।


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