स्वप्रेरणा से करें धर्मरक्षा का कार्य !

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28 May 19
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स्वप्रेरणा से करें धर्मरक्षा का कार्य !
जिस प्रकार हम सभी अपने परिवार के पालन-पोषण के लिए पूर्ण निष्ठा एवं समर्पित भाव से कार्य करते हैं उसी प्रकार अपने धर्म की रक्षा, उसके संवर्धन के लिए भी वैसा ही समर्पण भाव जागृत करने की आवश्यकता है। हम में आसक्ति हो या विरक्ति जो भी हो चरम सीमा तक होनी चाहिए तभी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। 

भारतवर्ष को हिन्दू राष्ट्र बनाने की अवधारणा को साकार करने के लिए हर उस व्यक्ति को जो सनातन धर्म में विश्‍वास रखता है, जो ॐ को अपनाता है और जो अपने-अपने इष्ट देव की आराधना करने में आस्था रखता है, उसे पूर्ण समर्पण भाव से इस धर्म रक्षति आंदोलन में तथा सनातन धर्म के वैभव को पुनः स्थापित करने के लिए सहयोग करना चाहिए।
 
1. हिन्दू राष्ट्र की आवश्यकता क्यों ?

 

1. क्योंकि सम्पूर्ण विश्‍व में बहुसंख्यक लोगों के धर्म के अनुसार ही उस देश में  विधान और परम्पराओं का निर्वहन होता है तो फिर भारतवर्ष में क्यों नहीं ?
2. स्वतंत्रता से पूर्व भी जो राजा शासन करता था, वह धर्मानुसार ही आचरण और व्यवहार करता था । शासन, न्याय तथा प्रजा पालन भी धर्म के अनुसार ही किया जाता था तो आजादी के बाद इन सनातन परम्पराओं को खंडित क्यों कर दिया गया?
3. सनातन धर्म का सबसे बड़ा गुण आपसी सौहार्द, प्रेम, बंधुत्व है । यह मार-काट करने वाला नहीं, बलपूर्वक धर्म परिवर्तन करवाने वाला नहीं, धर्म के नाम पर जिहाद करवाने वाला नहीं है।

स्वतंत्रता के पश्‍चात विभिन्न सरकारों ने बहुसंख्यक हिन्दुओं के अधिकारों, परम्पराओं, मान्यताओं को कुचला है, दबाया है और दूसरे मतों को पोषित करने का काम किया है । बहुसंख्यकों के धन से अल्पसंख्यकों का पोषण किया है, पाला है, उन्हें धर्म के नाम पर सुरक्षा प्रदान की है । शासनकर्ताओं का यह दोहरा चरित्र बहुसंख्यक वर्ग अर्थात  हिन्दू अब भारतवर्ष में कदापि सहन नहीं करेगा । सभी सनातन प्रेमियों को एक मंच पर आकर बहुसंख्यक वर्ग अर्थात सनातन प्रेमी अर्थात हिन्दुओं को समाप्त करने के लिए चलाए जा रहे कुचक्र का सामना बलपूर्वक करने के लिए एक मंच पर एकत्रित आना होगा तथा बिखरे हुए प्रयासों को एकसूत्र में पिरो कर भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए प्रतिज्ञाबद्ध होना होगा ।

 

2. जगाएं अपने स्वाभिमान को !


     आर्य पुत्रो ! क्या हम इतने निर्बल और असहाय हो गए हैं कि अपनी रक्षा स्वयं करने में भी असमर्थ हैं ? नहीं ऐसा नहीं है । अपनी रक्षा करने से तात्पर्य है अपने कुल की रक्षा करना,अपनी परम्पराओं की रक्षा करना, अपने रीति-रिवाजों की रक्षा करना, अपने धर्म की रक्षा करना तथा उसका संवर्द्धन करना । जाति, प्रांत, संप्रदाय, संगठन आदि से ऊपर उठकर हिन्दू राष्ट्र-स्थापना हेतु एक हो जाना । 

सुरक्षित एवं समृद्ध भारत वर्ष के लिए एकमात्र विकल्प है हिन्दू राष्ट्र क्योंकि वर्तमान में दूसरे मत वाले धर्मांध लोग आतंकवाद को बढ़ाने, भ्रष्टाचार को पोषित करने, गौ हत्या, घुसपैठ, नक्सलवाद, धर्म परिवर्तन, मूर्तिभंजन तथा लव जिहाद जैसे कुकृत्यों में सम्मिलित होकर निरंतर सनातन धर्म को हानि पहुंचा रहे हैं । इन सबको रोकने के लिए आवश्यक है कि धर्म के प्रति सुुप्त हो चुकी हमारी चेतना को जागृत करना तथा हमें उन कार्यकर्ताओं, राष्ट्रवीरों, धर्मवीरों का साथ देना होगा जो हिन्दू राष्ट्र-निर्माण के लिए सपरिवार अपना सर्वस्व धर्म-रक्षक-यज्ञ (हिन्दू राष्ट्र की स्थापना) में समर्पित करने को तत्पर हैं । वर्तमान में हिन्दू जनजागृति समिति तथा सनातन संस्था वृहद स्तर पर, सूक्ष्मता से सनातन धर्म की रक्षा के लिए संपूर्ण भारतवर्ष में बहुसंख्यक हिन्दुओं में चेतना जागरण का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है उनके इस यज्ञ को सभी सनातन प्रेमी और धर्मानुरागी घर-घर तक पहुंचा कर हिन्दू राष्ट्र-स्थापना में योगदान देकर यज्ञ अग्नि को अधिकाधिक प्रज्वलित कर सकते हैं।

 

3. अष्टम अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन का आयोजन !    

    इसी अनुषंग से हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से रामनाथी, गोवा में 27 मई से 8 जून 2019 की  अवधि में अष्टम अर्थात आठवें ‘अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन’ का आयोजन किया गया है । इस अधिवेशन के अंतर्गत सभी कार्यक्रमों को मिलाकर भारत के 26 राज्य, तथा बांग्लादेश यहां कार्यरत छोटे-बडे 200 से अधिक हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों के 800 से अधिक प्रतिनिधि इस वर्ष के अधिवेशन में उपस्थित रहनेवाले हैं । इस अधिवेशन के अंतर्गत 27 और 28 मई को ‘धर्मप्रेमी अधिवक्ता अधिवेशन’, 28 मई को ‘उद्योगपति अधिवेशन’, 29 मई से 4 जून की अवधि में 7-दिवसीय ‘अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन’, 2 जून को ‘सोशल मीडिया कॉन्क्लेव’ तथा 5 से 8 जून की अवधि में ‘चतुर्थ हिन्दू राष्ट्र संगठक  प्रशिक्षण और अधिवेशन’ आयोजित किया जानेवाला है । निःसंदेह इससे प्रेरणा लेकर हिन्दुत्वनिष्ठ वर्ष 2023 में स्थापित  होनेवाले हिन्दू राष्ट्र की दिशा में संगठित होकर योजनाबद्ध आश्‍वासक कदम उठाएंगे ।’


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