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सम्पत्ति का विरूपण एवं चुनाव अभियान

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16 Mar 19
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सम्पत्ति का विरूपण एवं चुनाव अभियान

बांसवाड़ा / लोकसभा आम चुनाव 2019 के तहत क्षेत्र में प्रभावी आदर्श आचार संहिता को देखते हुए  शहरी क्षेत्रों में विज्ञापन स्थलों हॉर्डिंग के चिह्नीकरण व आवंटन के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।  

जिला निर्वाचन अधिकारी आशीष गुप्ता ने बताया कि सम्पत्ति विरूपण की रोकथाम से संबंधित कानूनी प्रावधान राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 के अध्याय 12-क में बताये गये हैं। विज्ञापन स्थलों के चिह्निकरण एवं इनके उपयोग आदि के संबंध में नगरपालिका संस्थाओं द्वारा उप-विधियां भी बनायी हुई है।

सार्वजनिक स्थानों पर लगे ऐसे चिह्नित विज्ञापन स्थलों पर कोई विशिष्ट राजनीतिक दल अथवा अभ्यर्थी एकाधिकार नहीं कर सकें एवं सभी को समान अवसर प्राप्त हो, इस संबंध में भारत निर्वाचन आयोग ने दिशा-निर्देश जारी किए है।

उन्होंने बताया कि नगरपालिका की अनुबंधित संबंधित फर्म द्वारा चुनाव संबंधी विज्ञापनों के लिए जिले में चिह्नित किए गए विज्ञापन स्थलों की सूची एवं उनमें प्रत्येक के लिए अनुबंधित फर्म द्वारा निर्धारित की हुई दरों की सूची संबंधित नगरपलिका संस्था के माध्यम से जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा प्राप्त की जाएगी तथा इस सूची के पश्चात अब कोई अन्य विज्ञापन स्थलन अनुबंधित फर्म या नगरपालिका संस्था द्वारा चिह्नित नहीं किया जाएगा और ना ही दी गई दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा।

इस तरह मिलेंगी हॉर्डिंग की अनुमति:

चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों की स्थिति अभ्यर्थिता वापिस लेने की तिथि को स्पष्ट हो सकेगी। अतः अभ्यर्थिता वापिस लेने की तिथि से पूर्व यदि को राजनीतिक दल या संस्था/संगठन चुनाव संबंधित विज्ञापनों के लिए चिह्नित किसी विज्ञापन स्थल पर अपना विज्ञापन प्रदर्शित करना चाहे तो उसकी अनुमति जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा गठित समिति की अनुशंषा के आधार पर अभ्यर्थिता वापिस लेने की की तिथि तक के लिए ही दी जाएगी। राज्य में निर्वाचन एक से अधिक चरणों में होने की स्थिति में विभिन्न संसदीय क्षेत्रों के लिए अभ्यर्थिता वापिस लेने की तिथि अलग-अलग हो सकती है।

चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों की सूची तैयार होने के दिन शाम 5 बजे के पश्चात यथाशीघ्र चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों या उनके अधिकृत प्रतिनिधियों की एक बैठक जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा बुलाई जाएगी। बैठक में जिला निर्वाचन अधिकारी जिले में चिह्नित विज्ञापन स्थलों की सूची की प्रति सभी अभ्यर्थियों या उनके अधिकृत प्रतिनिधियों को उपलब्ध कराते हुए उनसे जानकारी लेंगे कि अभ्यर्थी या उनका राजनैतिक दल कौन-कौन से विज्ञापन स्थलों का उपयोग करना चाहते है। बैठक में जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा आदर्श आचार संहिता के दृष्टिगत जानकारी दी जाएगी कि किस प्रकार की विज्ञापन सामग्री प्रदर्शित करना निषिद्ध है।

निजी संपत्ति पर विज्ञापन की भी स्वीकृति जरूरी:

निजी सम्पत्ति पर भी विज्ञापन नगरपालिका अधिनियम के अध्याय 12-क के अंतर्गत प्रतिबंधित है लेकिन निजी सम्पत्ति पर मालिक या अधिभोगी की लिखित स्वीकृति से केवल बैनर या झंडे लगाये जा सकते है।

निजी वाहन स्वामी अपने वाहन पर अपनी पसंद से किसी दल या अभ्यर्थी का झंडा और स्टीकर लगाता है और साथ ही इससे यदि राहगीरों को उद्विग्नता अथवा असुविधा नहीं होती हो तो इसमें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति अभ्यर्थी की अनुमति लिए बिना, अपने वाहन पर झंडे तथा स्टीकर इस प्रकार से लगता है कि जिससे किसी अभ्यर्थी विशेष के पक्ष में मत याचना का उद्देश्य स्पष्ट होता है तो ऐसे व्यक्ति के विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा 171-एच आईपीसी के अंतर्गत कानूनी कार्रवाही की जाएगी।

वाहन का खर्च भी जुड़ेगा प्रचार में:

अभ्यर्थी द्वारा प्रचार के प्रयोजन से लिये गये तथा पयोग में लिए गये उसके व्यक्तिगत वाहन को प्रचार वाहन माना जायेगा तथा बाजार दर से ईंधन पर अनुमानित व्यय तथा चालक का वेतन अभ्यर्थी के व्यय लेखे में शामिल किया जाएगा।

अनधिकृत सामग्री हटाने की समय सीमा निर्धारित:

जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा अनाधिकृत रूप से प्रदर्शित प्रचार सामग्री को हटाने के लिए समय सीमा निर्धारित की है। इस संबंध में राजकीय सम्पत्ति से 24 घण्टे के भीतर तथा सार्वजनिक स्थलों से 48 घण्टों के भीतर पोस्टर, कट-आउट, होर्डिंग, बैनर आदि हटाने के निर्देश हैं।


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