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करेडा पार्श्वनाथ महातीर्थ में भव्य आराधना महोत्सव 11 से-

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06 Dec 17
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करेडा पार्श्वनाथ महातीर्थ में भव्य आराधना महोत्सव 11 से- उदयपुर। आगामी 11 से 14 दिसंबर तक करेडा में भव्य आराधना महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। करेडा पार्श्वनाथ महातीर्थ में पार्श्वनाथ भगवान की 2300 वर्ष प्राचीन चमत्कारी प्रतिमा स्थापित है। यहां पार्श्वनाथ प्रभु के जन्म कल्याणक निमित्त सामूहिक अष्ठम तप की भव्य आराधना त्रि-दिवसीय मेला महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। यह जानकारी बुधवार को आयोजित प्रेसवार्ता में परम पूज्य राष्ट्रसंत यतिवर्य डॉ. श्री वसंत विजयजी महाराजश्री ने दी। इस अवसर पर देवेन्द्र मेहता, मुकेश चेलावत, स्नेहल चेलावत भी उपस्थित थे।
डॉ. श्री वसंत विजयजी ने बताया कि श्रीपार्श्व पद्मावती सेवा ट्रस्ट द्वारा तमिलनाडु के कृष्णागिरी में विश्व के प्रथम अद्भुत 365 फुट ऊंचे सर्वोच्च शिखर वाले भव्य मन्दिर की 11 फरवरी 2019 को अभूतपूर्व प्रतिष्ठा की जायेगी। इससे पूर्व 3 से 10 फरवरी 2019 तक संस्कार प्रतिष्ठा सेमिनार का विशेष आयोजन किया जाएगा जिसमें देश विदेश के लाखों लोगों के भाग लेने की संभावना है। उन्होंने बताया कि सहस्रफणा भगवान शक्ति पाश्वर्नाथ का एक करोड काँच के टुकडों की नक्काशी से निर्मित्त भव्य मन्दिर, अद्भुत भव्यता के कारण गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान पा चुका है। इसी मन्दिर मण्डप में माँ पद्मावती के 23 मनभावन विभिन्न रूपों की प्रतिमाओं के दशर्न होते हैं। माँ पद्मावती की अनुपम सहस्रभुजा प्रतिमा को विश्व कीर्तिमान प्रदान कर विश्व गौरवान्वित हुआ है। 23 एकड में फैला हुआ यह शक्तिपीठ परिसर तमिलनाडु का एक प्रमुख पवित्र दर्शनीय स्थल बन चुका है जहाँ हजारों श्रद्धालु नियिमत रूप से आकर पे*म, शान्ति और आत्मिक प्रसन्नता का दिव्य अनुभव करते हैं।
डॉ. श्री वसंत विजयजी ने बताया कि इस अद्भुत एवं अद्वितीय प्रतिष्ठा की विशिष्टताओं से भक्तजनों को लाभान्वित एवं परिचित कराने के लिए विशेष धर्म रथयात्रा प्रारम्भ की जा रही है। इस विशिष्ट रथ में प्रभु पाश्वर्नाथ की 51 इंच की अनुपम प्रतिमा होंगी। यह प्रतिमा एक सुन्दर कलश के ऊपर स्थापित की जाएगी। इस कलश में देश भर के 108 पार्श्वनाथ तीर्थों से मंगायी गई दिव्य वासक्षेप रहेगी। यह रथ, 325 दिनों में देश भर के 250 से अधिक शहरों एवं गाँवों में जाएगा।
उन्होंने बताया कि कृष्णागिरी में विश्व के सर्वप्रथम 365 फुट ऊँचे तथा 415 फुट चौडे भव्य देवालय का निमार्ण कार्य प्रारम्भ हो गया है। इस भव्य देवालय में 51 फुट ऊँचे अशोक वृक्ष के नीचे प्रभु पार्श्वनाथ की 23-23 फुट ऊँची चहुंमुखी विशाल चार प्रतिमाएं, चारों दिशाओं की ओर प्रतिष्ठित होंगी। प्रतिमाओं के दोनों ओर सेवा में 17-17 फुट के आठ देवों की सुन्दर प्रतिमाएं, अष्ट प्रतिहार्यों से युक्त समवसरण का मनोहारी दृश्य भक्तजनों को आत्म शांति प्रदान करेगा।
उन्होंने बताया कि जिनालय में 9-9 फिट के चन्द्रप्रभु स्वामी, मुनि सुव्रत स्वामी, मणिभद्र वीर, कुबेर देव एवं 7-7 फिट के बटुक भैरव देव, महालक्ष्मी, सरस्वती, चन्द्रप्रभ यक्ष, पंच अंगुलीदेव की भव्य प्रतिष्ठा की जायेगी। इनके साथ ही 100 एकड के विशाल परिक्षेत्र में नगरियों का निर्माण किया जाएगा एवं विशाल सुविधायुक्त भोजन मंडप बनाया जाएगा। चार विशाल सभा मंडपों का वृहद निर्माण भी किया जाएगा जो बालक, युवा, वरिष्ठजन तथा गृहलक्ष्मी मंडप नाम से सुशोभित होंगे। इनमें प्रत्येक मंडप में 5॰ हजार श्रावक-श्राविकाओं के बैठने की सुव्यवस्था होगी।
उल्लेखनीय है कि प्रभु पाश्वर्नाथ की प्रत्येक प्रतिमा अखंड पत्थर से बन रही है। प्रतिमाओं के लिए डॉ. श्री वसंत विजयजी ने 15 वर्षों तक अथक प्रयासों ये राजस्थान से श्वेत, पीले, हरे एवं काले रंग के अखंड पत्थरों की खोज की। ये प्रतिमाएं विश्व की विशालतम प्रतिमाओं में होंगी ताकि आने वाले दर्शनार्थी यहाँ पूर्व, वर्तमान और भविष्य में आने वाली चौबीसी के दर्शनों का लाभ एक ही स्थान पर ले सकें।
संपूर्ण विश्व में डॉ. श्री वसंत विजयजी ने 147 से अधिक शान्ति केन्द्रों की स्थापना की। उनका मानना है कि जब तक मनुष्य के अंतर्मन में शान्ति नहीं होगी तब तक बाह्य जगत की शान्ति की बात करना निरथर्क है। अंतर्मन की शान्ति के लिए सही शिक्षा, सही मागर्दशर्न की आवश्यकता है। बालक, युवा, पौढ तथा महिलाओं प्रत्येक वर्ग की समस्या अलग-अलग है अतः आज सभी को उनकी समस्याओं के अनुरूप समाधान और मार्गदर्शन की जरूरत है तभी इनके अंतर्द्वन्द्व समाप्त होंगे और आन्तरिक शान्ति की ओर बढ सकेंगे।

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