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‘‘नानी बाई रो मायरो’’ कथा का समापन

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07 Dec, 17 09:52
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उदयपुर नारायण सेवा संस्थान के लियो का गुडा(बडी) स्थित मीरा की मुरली भवन के इंसानियत सभागार में त्रिदिवसीय‘‘नानी बाई रो मायरा’’कथा का बुधवार को समापन हुआ। आस्था भजन चैनल से सीधे प्रसारित इस आयोजन म संस्थापक कैलाश ‘मानव’ ने कहा कि कभी किसी की निन्दा नही करनी चाहिए और न ऐसे कटु वचन बोलने चाहिए जिससे किसी को कष्ट पहुंचे। एक दूजे के प्रति ईर्ष्या का भाव न रखकर प्रेम व अपनत्व का भाव रखना चाहिए। उन्होने कहा कि भगवान कृष्ण के परम भक्त नरसीजी जब बेटी के ससुराल में मायरा भर पाने की स्थिति में नहीं थे और बेटी ससुराल की प्रताडना से तंग आकर अपने पिता को कोस रही थी कि यदि आज मां जिंदा होती तो कम से कम एक चुनरी तो अवश्य लातीं। भगवान कृष्ण ने तब अपने भक्त नरसी की पुकार पर नानीबाई का ऐसा मायरा भरा कि देखने वाले दंग रह गए। भगवान ने कपडे, गहने, सोने के सिक्के, हीरे, जवाहरात और पूरे गांव को उपहार प्रदान कर भक्त का मान रखा। संचालन महिम जैन ने किया।

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