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संस्थापक जनुभाई की जयंति हर्षोल्लास से मनाई

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17 Jun, 17 08:34
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संस्थापक जनुभाई की जयंति हर्षोल्लास से मनाई उदयपुर जिस समय देश में स्वतंत्र्ता संग्राम आंदोलन में महात्मा गांधी स्वतंत्र्ता की अलख जगा रहे थे उस समय मेवाड की सुदूर आदिवासी अंचलों में पंडित जनार्दनराय नागर शिक्षा की ज्योत जलाने में व्यस्त थे। विद्यापीठ की स्थापना उनकी अज्ञानता दूर करने की सोच का ही परिणाम है। उक्त विचार शुक्रवार को जनार्दनराय नागर विद्यापीठ विश्वविद्यालय के संस्थापक मनीषी पं. जनार्दनराय नागर की 106 वीं जयंती अवसर पर आयोजित तीन समारोह के तहत आयोजित समापन समारेाह के अवसर पर कुलाधिपति एच.सी. पारख ने कहे। उन्होने कहा कि पंडित नागर ने साक्षरता, बेहतर शिक्षा तथा मूल्य बोध के लिए ही राजस्थान विद्यापीठ की स्थापना की थी। वे शिक्षा को लोकतंत्र् के लिए जरूरी मानते थे। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत ने कहा कि पंडित नागर की सोच का ही परिणाम था कि वे शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति को साक्षर एवं प्रबुद्ध नागरिक बनाते हुए जीविकोपार्जन के लिए तैयार करना है, लेकिन वास्तविक उद्देश्य मनुष्य को सभी पहलुओं से व्यापक बनाना एवं विकसित करना है। कुल प्रमुख भंवरलाल गुर्जर ने कहा कि जनुभाई अपने आप में किसी पुरस्कार से कम नहीं थे। उन्होने संस्था की शुरूआत रात्र्किालीन साक्षरता केन्द्र के रूप में किया। उन्होने शोषित, निम्न वर्ग एवं गरीब तबके के लोगो के लिए ग्रामीण अंचलों में शिक्षा का प्रचार किया। समारोह का संचालन निदेशक प्रो. मनीष श्रीमाली ने किया जबकि धन्यवाद प्राचार्य प्रो. सुमन पामेचा ने दिया। समारोह में प्रो. मंजू मांडोत, प्रो. जे.एस. खरकवाल, सहायक कुल सचिव डॉ. हेमशंकर दाधीच, प्रो. जीएम मेहता, डॉ. चन्द्रेश छतवानी, स्पोट्र्स बोर्ड के सचिव भवानीपाल सिंह, डॉ. प्रकाश शर्मा, डॉ. अपर्णा श्रीवास्तव, घन६याम सिंह भीण्डर, कृष्णकांत नाहर, डॉ. दिनेश श्रीामाली, डॉ. कुलशेखर व्यास, जितेन्द्र सिंह चौहान विद्यापीठ के डीन डायरेक्टर एवं कार्यकर्ताओं ने जनुभाई को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनके द्वारा बताये मार्ग पर चलते हुए विद्यापीठ के उत्तरोत्तर विकास में सहयोग देने की शपथ ली। जनुभाई की 106वी जयंति समारोह राजस्थान विद्यापीठ कुल के केन्द्रीय कार्यालय में स्मरणांजलि कार्यक्रम हुआ।

जीएसीटी के लागू होने से किमतों में कमी आयेगी - प्रो. सारंगदेवोत

जी.एस.टी. पर व्याख्यानमाला ः- संस्थापक मनीषी पंडित जनार्दनराय नागर की 106वीं जयंति समारोह में आयोजित ‘‘जी.एस.टी. का भारतीय अर्थ व्यवस्था पर प्रभाव’’ विषयक पर व्याख्यानमाला में मुख्य वक्ता कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि जीएसटी एक एकीकृत टेक्स है यह वस्तुओं एवं सेवाओं दोनो पर लगेगा। इसके लागू होने से पूरे देश में एक ही प्रकार का अप्रत्यक्ष कर होगा। उन्होने बताया कि इससे व्यवसायों द्वारा खरीदी गई वस्तुओं एवं सेवाओं पर चुकाये गये जीएसटी की पूरी क्रेडिट मिल जायेगी। जीएसटी कर प्रणाली सरल होने से व्यापारियों को सुविधा होगी तथा समस्त कार्य ऑन लाईन होने से पारदर्शिता बढेगी। उन्होने कहा कि जीएसटी के लागू होने से वस्तुओं की किमतों की कमी आयेगी और सरकार के रेवेन्यू मे बढोतरी होगी। जीएसटी के लागू होने के बाद जो कम्पनिया जल्दी रिटर्न फाईल करेगी उसकी स्टार रेटिंग उतनी अच्छी मानी जायेगी। उन्होने कहा कि जीएसीटी दो स्तर पर लगेगा सीजीएसटी एवं एसजीएसटी। सीजीएसटी का हिस्सा केन्द्र व एसजीएसटी का हिस्सा राज्य सरकार केा प्राप्त होगा।

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