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आदर्श पीढ़ी निर्माण के लिए एकजुट संकल्प की जरूरत-देवनानी

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17 Feb, 17 15:41
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आदर्श पीढ़ी निर्माण के लिए एकजुट संकल्प की जरूरत-देवनानी उदयपुर / शिक्षा राज्यमंत्री प्रो. वासुदेव देवनानी ने कहा कि विकास की ऊंचाइयों को छूने के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता पूर्ण शिक्षित आदर्श पीढ़ी के निर्माण की है। श्रेष्ठ पीढ़ी के निर्माण के लिए हमारी मौलिक संस्कृति एवं आदर्श ही प्रथम सीढ़ी है।

श्री देवनानी शुक्रवार को रेजीडेंसी स्कूल सभागार में 13वें कौशल विकास मेले के समापन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दहेज, अशिक्षा, नशाखोरी के अभिशाप को जड़ से मिटाने के लिए माताओं की भूमिका सर्वोपरि है। भावी पीढ़ी को संस्कारवान बनाने के लिए परिवार से ही हमारी मौलिक संस्कृति के भावों को बालक-बालिकाओं के आचार-विचार में आरंभिक तौर से ही ढालने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि हमने शिक्षा पाठ्यक्रम में भी बड़ा परिवर्तन कर उच्च आदर्श संस्कारवान पीढ़ी के लिए महापुरूषों के जीवन चरित्र को शामिल किया गया है। वहीं जल स्वावलंबन, स्वच्छता एवं कौशल विकास आधारित शिक्षा भी बच्चों को दी जा रही है। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे बच्चों के बौद्धिक स्तर का आंकलन कर उसे तराशते हुए देश का श्रेष्ठ नागरिक बनाने का दायित्व निभाएं। उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में प्रोत्साहन देने के लिए गार्गी पुरस्कार, लेपटॉप, छात्रवृत्ति, स्कूटी आदि प्रदान करने की योजनाएं लागू की गई है। विद्यार्थी वर्ग स्वयं में प्रतियोगिता में श्रेष्ठ बनने की भावना पैदा करें और बेहतर बनकर दिखायें। उन्होंने कहा कि बेटियों को संरक्षण एवं उन्हें श्रेष्ठ शिक्षा देने के लिए समाज को विशेष जागरूकता एवं दूरदर्शिता का परिचय देना होगा क्यंोकि बेटियां ही आगे जाकर भावी पीढ़ी निर्माण करती है। प्रो. देवनानी ने कहा कि ज्ञान विस्तृत है, आज का दौर विज्ञान और तकनीकी का दौर है ऐसे में विद्यार्थी को सम्पूर्ण और सहज ज्ञान सुलभ हो इसके पूरे अवसर दिये जाएं ताकि वह नकारात्मक व सकारात्मक पहलुओं का आंकलन कर सही दिशा में अग्रसर हो सके। श्री देवनानी ने पाश्चात्यीकरण के प्रभाव से मुक्त होने एवं जनसंख्या नियंत्रण के लिए संकल्पबद्ध होने की जरूरत बतायी और कहा कि हमारे राष्ट्र मूल्यों को पुनसर््थापित करने के लिए हमारी संस्कृति का अनुसरण करना होगा।

कार्यक्रम में नगर विकास प्रन्यास अध्यक्ष रवीन्द्र श्रीमाली ने कहा कि शिक्षक व विद्यार्थी विकास की धुरी है, शिक्षक वर्ग बालक में प्रतिभा को श्रेष्ठतम ढंग से निखारते हुए उन्हें स्वावलंबी एवं श्रेष्ठ नागरिक बनाने में अपनी समर्पित भूमिका निभाएं। शैक्षिक नवाचारों में बालक बालिकाओं का भविष्य संवारने की पहल वर्तमान सरकार ने की है। उन्होंने यूआईटी की ओर से शालाओं के विकास के प्रति प्रतिबद्धता जताई।

समारोह में एसआईईआरटी की निदेशक श्रीमती रूकमणि रियाड़ ने कौशल विकास मेले के आयोजन, विद्यार्थी विकास के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों एवं विभागीय प्रयासों पर विस्तार से चर्चा की। समारोह में करौली जिले से भाग लेने आई बालिकाओं ने बेटी बचाओ, शिक्षा, जनसंख्या नियंत्रण सहित समाजोत्थान का संदेशपरक गीत प्रस्तुत किया। बालिकाओं ने लघु नाटिका के माध्यम से सुरक्षित यातायात एवं नेत्रदान आदि का भी प्रेरक संदेश दिया। अंत में आभार जिला शिक्षाधिकारी यमुनाशंकर चौबीसा ने जताया।

विजेताओं को पुरस्कार

अतिथियों ने तीन दिवसीय कौशल विकास मेले के दौरान विभिन्न क्विज, सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। विद्यार्थियों के साथ फोटो सेशन भी हुआ।

शिक्षकों को भी मिला सम्मान

त्रिदिवसीय कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए शिक्षकों को भी पारितोषिक प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी शिवजी गौड़, मधुसूदन व्यास, नारायणलाल प्रजापत सहित शिक्षा विभाग के विभिन्न अधिकारी, शिक्षक एवं विभिन्न जिलों से आए मेला प्रतिभागी मौजूद थे।

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