पवन ऊर्जा पर्याप्त ऊर्जा जरूरतें पूरी करने के लिए
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11 Sep, 12 10:06
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पवन चक्कियों से बिजली पैदा करना ना सिर्फ सस्ता साधन है बल्कि पूरी दुनिया की मौजूदा ऊर्जा जरूरतें पूरी करने के लिए पवन ऊर्जा पर्याप्त है। अमेरिकी वैज्ञानिकों के ताजा शोध में यह दावा तब किया गया है जब पूरी दुनिया में तेल, गैस और कोयले की खपत और माग तेजी से बढ़ती जा रही है। इन तीनों ही ईधनों की किल्लत के बीच पवन ऊर्जा की भावी कमी का भी खतरा नहीं है।
अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि पवन ऊर्जा मैदानी और महासागरों के करीब स्थित पवन चक्कियों के मुकाबले पर्वतीय इलाकों में लगाई गई पवन चक्कियों से अधिक बिजली मिलती है। वैज्ञानिकों का दावा है कि धरती की सतह के आसपास मौजूद हवाओं से विश्व की ऊर्जा की मागों को 20 गुना अधिक पूरा किया जा सकता है। वहीं ऊंचे स्थानों या अक्षाशों पर पवन चक्कियों की मदद से बिजली की मौजूदा मागों को सौ गुना अधिक पूरा किया जा सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सतही हवाएं वह हैं जो ऊंचे खंभों या जमीन पर लगी पवन चक्कियों की मदद से कुछ ऊंचाई तक की हवाओं को प्रभावित कर ऊर्जा पैदा करे। वहीं उच्च अक्षाशों वाली पवन ऊर्जा वह है जो तकनीक के जरिए हवाओं की ऊंची सतहों को प्रभावित करती हैं।
कारनेगी इंस्टीट्यूट के अनुसंधानकर्ता केन कालडेरिया ने पवन चक्की की मदद से अधिकतम कितनी हवा का ऊर्जा के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है इसपर अध्ययन किया है। साथ ही उन्होंने ऊंचे अक्षाशों पर हवाओं से बिजली बनाने के पर्यावरण पर पड़ने वाले असर का भी अध्ययन किया। कालडेरिया ने बताया कि बडे़ स्तर पर देखने में यह तकनीक आर्थिक या राजनीतिक तौर पर बहुत सफल लगती है। पर्वतीय या अन्य ऊंचे स्थानों पर पवन चक्किया लगाने से पूरे विश्व में बिजली और तेज आर्थिक विकास होगा। बावजूद पर्वतीय व ऊंचे अक्षाशों वाली कठिन और दुरुह परिस्थितियों में इन पवन चक्कियों को स्थापित करना कोई आसान काम नहीं है। लारेंस लिवरमोल नेशनल लैब के केट मारवेल के अनुसार आज की दुनिया की सभ्यता केवल 18 टेरावॉट बिजली का ही उपभोग कर रही है। लेकिन पवन चक्कियों की मदद से सतही हवाओं से 400 टेरावॉट ऊर्जा और पूरे पर्यावरण की हवाओं से 1800 टेरावॉट बिजली पैदा की जा सकती है। इस शोध में बताया गया है कि केवल पवन चक्किया बढ़ाने से अत्यधिक ऊर्जा नहीं मिलेगी। चूंकि अत्यधिक पवन चक्किया एक स्थान पर लगाने से एक समय के बाद बिजली बनने की गति मंद पड़ जाएगी। लेकिन उनका कहना है कि ऐसे स्थान ढूंढे जाने चाहिए जहा पवन चक्की लगाने से अधिकाधिक ऊर्जा बने।
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