फिर भी कोई पकड़ा नहीं गया।

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03 Dec, 10 08:15
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 फिर भी कोई पकड़ा नहीं गया। गृह मंत्रालय का आईएएस अधिकारी अपने व्यापारी मित्र के लिए संवेदनशील सूचनाएं बेचते हुए पकड़ा गया। बड़े-बड़े बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों के यहां सीबीआई के छापों ने एक और महाघोटाले का परदाफाश किया है। इस घोटाले के पूरे तथ्य अभी सामने नहीं आए हैं और शायद आ भी न पाएं, क्यांकि इसमें देश की नामी-गिरामी भवन निर्माता कंपनियां फंसी हैं। बड़े बैनर वाली इन कंपनियों ने बैंकों से अरबों रुपयों के कर्ज बिना किसी जमानत या बिना अपनी संपत्ति गिरवी रखे हासिल किए हैं। चूंकि भवन निर्माता कंपनियों और नेताओं का चोली-दामन का साथ होता है, इसलिए कोई राजनीतिक दल भी इस घोटाले पर हो-हल्ला नहीं करेगा।
उधर 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले में सरकार के शपथपत्र के बाद तो प्रधानमंत्री ही चक्कर में आ गए थे। पर फिलहाल उन्हें शक के दायरे से बाहर रखा गया है। इससे दिल्ली के सत्ता गलियारों में पिछले कुछ दिनों से उड़ रही इस अफवाह को विराम मिलेगा कि सोनिया गांधी मनमोहन सिंह को बदलने की सोच रही हैं। उनकी ईमानदारी का सर्टिफिकेट जारी करने के बाद अब सोनिया या राहुल गांधी के लिए ऐसा कोई कदम उठाना अगले एक-दो वर्ष तो संभव नहीं होगा। वैसे भी बिहार के चुनाव परिणाम ने राहुल गांधी को भौंचक कर दिया है। उत्तर प्रदेश को लेकर उनकी कोशिश जारी रहेगी, पर मायावती के खिलाफ अभी ऐसा कोई माहौल नहीं बना है, जो इस बात का संकेत दे कि सपा, भाजपा या कांग्रेस उत्तर प्रदेश में मायावती से लोहा ले पाएगी। एक तरफ तो देश रोज एक से बढ़कर एक घोटालों का सामना कर रहा है, दूसरी तरफ देश का मतदाता जाति समीकरणों से हटकर विकास की राजनीति को समर्थन देने लगा है। इसमें कर्नाटक ही एक अपवाद है, जिसका जवाब भाजपा के पास नहीं है। रेडड्ी बंधुओं की अवैध खनन गतिविधियों से लेकर येदियुरप्पा के जमीन घोटालों के बावजूद भाजपा अपने भ्रष्ट मुख्यमंत्री को नहीं हटा पाई।
इसलिए संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने की मांग के पीछे की राजनीति को समझना होगा। भाजपा की अगुवाई वाले विपक्ष का हंगामा हटाए गए संचार मंत्री ए राजा के भ्रष्टाचार को पकड़ने का नहीं था, बल्कि जेपीसी के जरिये अगले दो वर्ष तक इस मुद्दे को जिंदा रखकर राजनीतिक रोटियां सेंकने का था। प्रतिभूति घोटाले पर भी विपक्ष ने ऐसा ही तूफान मचाया था। जेपीसी बनी, जिसमें लालकृष्ण आडवाणी और जॉर्ज फर्नांडिस जैसे दिग्गज नेता थे। फिर भी कोई पकड़ा नहीं गया। तो फिर स्पेक्ट्रम घोटाले पर हंगामे का मकसद क्या था? सोनिया गांधी ने ठीक ही पलटवार किया है कि कांग्रेस को भ्रष्टाचार का पर्याय बताने वाली भाजपा येदियुरप्पा को तो हटा नहीं पाई, जबकि कांग्रेस ने आईपीएल घोटाले में शशि थरूर, आदर्श हाउसिंग सोसाइटी घोटाले में अशोक चव्हाण और 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले में ए राजा को फौरन हटाया और सुरेश कलमाडी के खिलाफ आपराधिक जांच बैठा दी। इस संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय का नए केंद्रीय सतर्कता आयुक्त पी जे थॉमस की नियुक्ति पर सवाल खड़े करना भी चर्चा में बना हुआ है। लेकिन जब तक घोटालों की जननी ‘जैन हवाला केस’ का सर्वोच्च न्यायपालिका ईमानदारी और निष्पक्षता से पुनर्मूल्यांकन नहीं करती, तब तक भ्रष्टाचार को लेकर मचाया जा रहा सारा शोर बेमानी होगा।
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